सावन के पावन महीने में श्रद्धालु देश भर के प्रसिद्ध शिवालयों में जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक और दर्शन-पूजन कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में गौरीगंज के निकट स्थित रोहसी बुजुर्ग गांव का शिव मंदिर इन दिनों शिव भक्तों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ भगवान भोलेनाथ एक-दो नहीं बल्कि 108 अलग-अलग रूपों में अपनी अर्धांगिनी माता पार्वती के साथ विराजमान हैं। यहाँ स्थित हर शिवलिंग के लिए एक अलग लघु मंदिर निर्मित है, जो इसे देश के अन्य धार्मिक स्थलों से पूरी तरह अलग और भव्य बनाता है।
108 पृथक मंदिर और पंचमुखी प्रतिमा का दिव्य संगम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सामान्यतः कई प्रमुख धामों में एक ही परिसर या एक ही वेदी पर 108 शिवलिंग स्थापित देखे जाते हैं। हालाँकि, रोहसी बुजुर्ग गाँव के इस मंदिर परिसर में प्रत्येक 108 शिवलिंग के लिए अलग-अलग छोटे मंदिर बनाए गए हैं। इस वजह से परिसर में घूमकर दर्शन करना श्रद्धालुओं को एक अलौकिक और आत्मिक शांति का अहसास कराता है। 108 अलग मंदिरों के अलावा, यहाँ द्वादश ज्योतिर्लिंग के प्रतिरूप तथा भगवान शिव की अति सुंदर पंचमुखी प्रतिमा भी स्थापित है।
मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु यहाँ आकर सच्चे मन से भगवान आशुतोष और माता पार्वती की आराधना करता है, उसके जीवन के तमाम दुख-दर्द समाप्त हो जाते हैं। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का दृढ़ विश्वास है कि इस पावन धाम में पूजन करने से साधक को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिल जाती है। इसी अटूट आस्था के कारण सावन के पूरे महीने यहाँ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। इस दौरान मंदिर परिसर में प्रतिदिन विधि-विधान से विशेष रुद्राभिषेक और शिव पुराण का वाचन आयोजित किया जाता है।
जनसहयोग से बना भव्य धाम और धार्मिक परंपरा
मंदिर के मुख्य पुजारी रुद्रकांत महाराज के अनुसार, इस पवित्र स्थान की नींव दशकों पहले उनके पूज्य पिता ने रखी थी। उस समय यह एक साधारण स्थान था, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों तथा दूर-दराज से आने वाले शिव भक्तों के निरंतर सहयोग और असीम श्रद्धा के बल पर आज यह एक अत्यंत विशाल और दिव्य धार्मिक धाम का रूप ले चुका है। यहाँ की व्यवस्था और पूजा पद्धतियाँ पूरी तरह से सनातन धर्म के विधि-विधानों पर आधारित हैं।
सावन के महीने में यहाँ सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहता है। अमेठी जिले के स्थानीय निवासियों के अलावा आसपास के कई जिलों जैसे सुल्तानपुर, रायबरेली और अयोध्या से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए पहुँचते हैं। मंदिर परिसर में आने वाले प्रत्येक भक्त की मनोकामना पूर्ण होती है, जिसके चलते यहाँ वर्ष भर धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम जारी रहता है।



















