हिंदू मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि के महान वास्तुकार, शिल्पकार और प्रथम इंजीनियर भगवान विश्वकर्मा की जयंती आज पूरे देश में अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जा रही है। जब सूर्य देव सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस विशिष्ट क्षण को कन्या संक्रांति कहा जाता है। इसी पावन तिथि को हर साल विश्वकर्मा जयंती के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक दृष्टि से इस दिन का बहुत बड़ा महत्व है। इस विशेष अवसर पर लोग अपने कारखानों, औद्योगिक संस्थानों, दुकानों, मशीनों, वाहनों और लोहे के औजारों की विधि-विधान से पूजा करते हैं। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा ने ही देवताओं के लिए स्वर्ग लोक, अस्त्र-शस्त्र और अद्वितीय भवनों का निर्माण किया था। उन्होंने भगवान विष्णु के लिए सुदर्शन चक्र, देवों के देव महादेव के लिए त्रिशूल, रावण के लिए पुष्पक विमान और झारखंड के देवघर में स्थित प्रसिद्ध बाबा वैद्यनाथ मंदिर का निर्माण भी किया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक पौराणिक घटना के दौरान भगवान विश्वकर्मा के मंदिर निर्माण को रोकने के लिए साक्षात भगवान विष्णु को एक मुर्गे का रूप धारण करना पड़ा था?
एक ही रात के भीतर पांच भव्य मंदिरों का निर्माण
झारखंड के देवघर में स्थित बाबा वैद्यनाथ धाम न केवल शिव भक्तों की आस्था का मुख्य केंद्र है, बल्कि यह अपने आप में कई प्राचीन रहस्यों और चमत्कारों को भी समेटे हुए है। इस पावन ज्योतिर्लिंग के विषय में यह मान्यता है कि इसका निर्माण स्वयं देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा ने किया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में जब देवताओं ने इस घने और बीहड़ जंगल से घिरे हुए पवित्र स्थान पर एक भव्य मंदिर की स्थापना करने का निश्चय किया, तो इस विशाल कार्य का उत्तरदायित्व भगवान विश्वकर्मा को सौंपा गया। उन्होंने इस कार्य को स्वीकार किया और एक ही रात के भीतर संपूर्ण मंदिर परिसर का निर्माण पूरा करने का कड़ा संकल्प लिया। अपने इसी संकल्प के तहत उन्होंने अत्यंत तीव्र गति से कार्य करते हुए एक के बाद एक कुल पांच भव्य मंदिरों का निर्माण कार्य शुरू किया।
सबसे पहले महादेव और फिर अन्य देवी-देवताओं के मंदिर बने
अपने निर्माण कार्य का आरंभ करते हुए भगवान विश्वकर्मा ने सबसे पहले देवाधिदेव महादेव के भव्य मंदिर का निर्माण किया। इसके पश्चात उन्होंने माता पार्वती के पावन मंदिर की संरचना खड़ी की। शिव-पार्वती के मंदिर तैयार होने के बाद, उन्होंने भगवान गणेश के मंदिर का निर्माण किया और फिर संध्या मंदिर को आकार दिया। इन चार प्रमुख मंदिरों का कुशलतापूर्वक निर्माण करने के बाद, भगवान विश्वकर्मा ने स्वयं के लिए एक अत्यंत विशाल, भव्य और अद्वितीय मंदिर का निर्माण शुरू कर दिया। उनके इस कदम ने स्वर्ग लोक में बैठे देवताओं को गहरी चिंता में डाल दिया। देवताओं के मन में यह आशंका उत्पन्न होने लगी कि यदि भगवान विश्वकर्मा का स्वयं का मंदिर महादेव के मुख्य मंदिर से भी अधिक विशाल और भव्य बन गया, तो सृष्टि की मर्यादा और स्थापना प्रभावित हो सकती है।
भगवान विष्णु का मुर्गा अवतार और अधूरा रह गया संकल्प
देवताओं की इसी चिंता का निवारण करने के लिए भगवान विष्णु ने एक अद्भुत योजना बनाई। उन्होंने तुरंत एक जंगली मुर्गे का रूप धारण किया और आधी रात के समय ही, भोर होने से बहुत पहले, जोर-जोर से बांग देना शुरू कर दिया। मुर्गे की तीव्र आवाज सुनकर भगवान विश्वकर्मा को यह भ्रम हो गया कि रात समाप्त हो चुकी है और सुबह की पहली किरण आ गई है। चूंकि उनका संकल्प केवल एक ही रात के भीतर निर्माण कार्य पूरा करने का था, इसलिए सुबह की आहट पाते ही उन्होंने अपना काम वहीं रोक दिया। इस प्रकार उनका स्वयं का वह भव्य मंदिर अधूरा रह गया, जिसे आज भी वैद्यनाथ धाम परिसर में लक्ष्मी नारायण मंदिर के नाम से जाना जाता है। एक अन्य पौराणिक मान्यता यह भी है कि जब देवर्षि नारद मुनि ने भगवान शिव को इस बात की सूचना दी कि विश्वकर्मा अपने लिए महादेव से भी भव्य मंदिर बना रहे हैं, तब भोलेनाथ ने अपने अंगूठे से उस मंदिर को नीचे की ओर दबा दिया था ताकि उसकी ऊंचाई सीमित रह सके।
विश्वकर्मा पूजा 2026 के अत्यंत शुभ मुहूर्त और समय सारणी
इस वर्ष भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चन करने और अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में सुख-समृद्धि की कामना करने के लिए कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। शास्त्रों के अनुसार, निम्नलिखित शुभ समय पर की गई पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है
- कन्या संक्रांति पुण्य काल: इस महत्वपूर्ण पुण्य काल का मुख्य समय सुबह 07:58 बजे से लेकर दोपहर 12:40 बजे तक रहेगा, जो पूजा के लिए अत्यंत प्रशस्त है।
- प्रातः काल का शुभ मुहूर्त: जो लोग सुबह के समय विशेष अनुष्ठान करना चाहते हैं, उनके लिए सुबह 07:58 बजे से सुबह 10:43 बजे तक का समय बहुत उत्तम है।
- दोपहर का चर-लाभ-अमृत मुहूर्त: दोपहर के समय पूजा संपन्न करने के लिए सुबह 10:12 बजे से दोपहर 02:47 बजे तक का समय निर्धारित है।
- अमृत चौघड़िया मुहूर्त: दिन की सबसे शुभ चौघड़ियों में से एक, अमृत चौघड़िया का समय दोपहर 12:16 बजे से लेकर दोपहर 01:48 बजे तक रहेगा।
- अभिजीत मुहूर्त: मध्याह्न काल का सबसे श्रेष्ठ अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक प्रभावी रहेगा।
- सायंकालीन पूजा मुहूर्त: शाम के समय आरती और दीपदान के लिए शाम 04:52 बजे से शाम 06:24 बजे तक का समय अत्यंत अनुकूल है।
- राहुकाल (वर्जित समय): धार्मिक नियमों के अनुसार, दोपहर 01:48 बजे से दोपहर 03:20 बजे तक राहुकाल रहेगा, इस अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की पूजा अथवा शुभ कार्य करने से पूरी तरह बचना चाहिए।
सृष्टि के महाशिल्पी की आराधना और उनका महत्व
बाबा वैद्यनाथ मंदिर न केवल हिंदू धर्म के अत्यंत पवित्र 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, बल्कि यह अनगिनत आस्थाओं और रहस्यों का एक बड़ा केंद्र भी माना जाता है। इस स्थान पर भगवान विश्वकर्मा द्वारा एक ही रात में पांच मंदिरों का अद्भुत निर्माण किया जाना उनके अलौकिक कौशल को दर्शाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा ने ही देवताओं के लिए सभी भव्य नगरों जैसे इंद्रलोक, द्वारकापुरी और लंका का निर्माण किया था। इसके साथ ही उन्होंने देवताओं के दिव्य अस्त्र-शस्त्रों की रचना भी की थी। इसी कारण उन्हें तकनीकी कौशल, वास्तुकला, विज्ञान और शिल्पकला का आदि देव माना जाता है। आज के दिन कारखानों, दुकानों और कार्यस्थलों पर मशीनों की पूजा करने से व्यापार में उन्नति होती है, तकनीकी बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में समृद्धि का वास होता है।



















