सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने से पहले पंचांग देखने की विशेष परंपरा है। मंगलवार, 21 जुलाई 2026 का दिन आध्यात्मिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पड़ रही है। इस खास अवसर पर एक साथ कई पवित्र संयोग बन रहे हैं। आज मासिक दुर्गाष्टमी और पार्वती जयंती का पावन पर्व मनाया जा रहा है, साथ ही मंगलवार होने के कारण यह दिन रामभक्त हनुमान की आराधना के लिए भी अत्यंत फलदायी है।
पूजन का महत्व और दुर्लभ संयोग
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब मंगलवार के दिन पार्वती जयंती और मासिक दुर्गाष्टमी एक साथ आते हैं, तो यह साधकों के लिए असीम कृपा का द्वार खोलता है। माता पार्वती की पूजा करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। इसके अतिरिक्त, इस दिन मां दुर्गा की उपासना करने वाले भक्तों को अदम्य साहस मिलता है और हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा से उनका बचाव होता है। क्योंकि यह मंगलवार का दिन है, इसलिए बजरंगबली की भक्ति का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता। इन तीनों देवी-देवताओं की एक साथ सच्चे मन से पूजा करने पर पारिवारिक क्लेश दूर होते हैं, घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
हनुमान जी की पूजा विधि
इस पावन दिन पर सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं और साफ कपड़े पहन लें। अपने घर के मंदिर या पूजा स्थल पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम, माता सीता और संकटमोचन हनुमान का ध्यान करें। बजरंगबली को प्रसन्न करने के लिए उन्हें चमेली का तेल और सिंदूर अर्पित करें। इसके साथ ही लाल या नारंगी रंग के फूल चढ़ाएं और भोग के रूप में गुड़-चना अथवा बूंदी के लड्डू का प्रसाद लगाएं। पूरी आस्था के साथ धूप और दीप प्रज्वलित करने के बाद श्री हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या फिर सुंदरकांड का श्रद्धापूर्वक पाठ करें। अंत में विधि-विधान से आरती उतारें और अपने पूरे परिवार के कल्याण, शांति और उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।
आज की ग्रह-नक्षत्र स्थिति और प्रमुख योग
वैदिक ज्योतिष की गणना के अनुसार, अष्टमी तिथि 22 जुलाई की सुबह 05:16 बजे तक प्रभावी रहेगी और उसके ठीक बाद नवमी तिथि लग जाएगी। आज शाम 08:49 बजे तक चित्रा नक्षत्र रहेगा, जिसके उपरांत स्वाति नक्षत्र की शुरुआत होगी। करण की बात करें तो दोपहर 04:34 बजे तक विष्टि और फिर अगले दिन 22 जुलाई की सुबह 05:16 बजे तक बव करण रहेगा। शाम 06:25 बजे तक सिद्ध योग का प्रभाव है, और उसके बाद साध्य योग निर्मित होगा। आज चंद्रमा आरंभ में कन्या राशि में गोचर कर रहा है और उसके बाद तुला राशि में प्रवेश करेगा, जबकि सूर्य देव कर्क राशि में ही विराजमान रहेंगे। आज उत्तर दिशा में दिशाशूल माना गया है, इसलिए इस ओर यात्रा करने से बचना चाहिए। इसके साथ ही, 22 जुलाई की सुबह 05:16 बजे तक शिववास श्मशान में है और वह माता गौरी के साथ उपस्थित हैं। भद्रा काल की अवधि सुबह 05:37 बजे से शाम 04:34 बजे तक है।
सूर्योदय-सूर्यास्त और चंद्र दर्शन का समय
आज दिन की शुरुआत सुबह 05:56 बजे सूर्योदय के साथ होगी और शाम 07:09 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, चंद्रमा के दर्शन दोपहर 12:28 बजे होंगे और रात 11:53 बजे चन्द्रास्त होने का समय निर्धारित है।
मंगल कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग में शुभ मुहूर्तों का विशेष ध्यान रखा जाता है। आज के दिन के सबसे उत्तम समय इस प्रकार हैं
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:15 बजे से लेकर 04:56 बजे तक। यह समय ईश्वर के ध्यान के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:01 बजे से दोपहर 12:56 बजे तक (या दोपहर 12:06 बजे से 12:59 बजे तक)। इस बेला में बिना राहुकाल का विचार किए नया काम या पूजा शुरू की जा सकती है।
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:45 बजे से दोपहर 03:40 बजे तक।
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:18 बजे से रात 07:38 बजे तक।
- अमृत काल: दोपहर 01:58 बजे से दोपहर 03:41 बजे तक।
- निशिता मुहूर्त: देर रात (22 जुलाई) 12:08 बजे से 12:49 बजे तक।
इन अशुभ समय में न करें शुभ काम
शास्त्रों के अनुसार कुछ विशेष समयावधि में महत्वपूर्ण कार्यों को टाल देना चाहिए। आज के लिए अशुभ मुहूर्त निम्नलिखित हैं
- राहुकाल: दोपहर 03:54 बजे से शाम 05:36 बजे तक। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य वर्जित माना जाता है।
- यमगण्ड: सुबह 09:03 बजे से सुबह 10:46 बजे तक।
- गुलिक काल: दोपहर 12:28 बजे से दोपहर 02:11 बजे तक।
- आडल योग: सुबह 05:37 बजे से शाम 08:49 बजे तक।
- दुर्मुहूर्त: सुबह 08:22 बजे से सुबह 09:17 बजे तक।
- वर्ज्य काल: 22 जुलाई को दोपहर 02:56 बजे से शाम 04:41 बजे तक।




















