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आषाढ़ की संकष्टी चतुर्थी 3 जुलाई को, जानें चंद्रोदय का समय, पूजा मुहूर्त और व्रत कथाधर्म
3 जुल॰ 2026, 5:46 am (44 दिन पहले)· 2

आषाढ़ की संकष्टी चतुर्थी 3 जुलाई को, जानें चंद्रोदय का समय, पूजा मुहूर्त और व्रत कथा

इस बार आषाढ़ मास की संकष्टी चतुर्थी शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी। जानिए तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय का समय और भगवान गणेश की व्रत कथा।

भगवान गणेश के भक्तों के लिए संकष्टी चतुर्थी का व्रत साल के सबसे अहम मासिक व्रतों में गिना जाता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को पड़ने वाला यह व्रत दिनभर के उपवास, विशेष गणेश पूजा और चंद्रमा की उपासना के साथ रखा जाता है। भक्त इस दिन सफलता, आर्थिक मजबूती, अच्छी सेहत और जीवन की मुश्किलों से छुटकारे की कामना करते हैं।

इस व्रत को संकटहरा चतुर्थी या संकट चौथ के नाम से भी जाना जाता है और पूरे भारत में भक्तों के बीच इसका बड़ा धार्मिक महत्व है। खास बात यह है कि यह व्रत तभी पूरा माना जाता है जब चंद्रमा के दर्शन कर उसे अर्घ्य दिया जाए, इसलिए चंद्रोदय दिनभर का सबसे प्रतीक्षित पल बन जाता है। हर महीने हजारों भक्त गणेश मंदिरों में जाते हैं या घर पर विधि-विधान से पूजा करते हैं, ताकि जीवन की बाधाएं दूर हों और सकारात्मकता आए।

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तिथि और पंचांग

हिंदू पंचांग के मुताबिक आषाढ़ की संकष्टी चतुर्थी शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी। चतुर्थी तिथि 3 जुलाई को सुबह 11:20 बजे शुरू होगी और 4 जुलाई 2026 को दोपहर 12:40 बजे समाप्त होगी। चूंकि यह व्रत चतुर्थी के दिन चंद्रोदय के अनुसार रखा जाता है, इसलिए भक्त 3 जुलाई को ही उपवास रखेंगे।

  • सूर्योदय (3 जुलाई 2026): सुबह 5:49 बजे
  • सूर्यास्त: शाम 7:12 बजे
  • चंद्रोदय: रात 9:58 बजे
  • चंद्रास्त: सुबह 9:20 बजे (4 जुलाई)

व्रत का धार्मिक महत्व

संकष्टी चतुर्थी को भगवान गणेश को समर्पित सबसे फलदायी व्रतों में माना जाता है। हिंदू धर्मग्रंथों में गणेश जी को विघ्नहर्ता यानी बाधाओं को दूर करने वाला कहा गया है। भक्तों का विश्वास है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा निजी, कामकाजी और आर्थिक जीवन की रुकावटें दूर करती है।

यह व्रत उन लोगों के लिए भी लाभकारी माना जाता है जो करियर में तरक्की, स्थिर आमदनी, घर में सुख-शांति, अच्छी सेहत और नए कामों में सफलता की कामना करते हैं। कई भक्त गणेश जी के प्रति आभार और श्रद्धा जताने के लिए हर महीने यह व्रत रखते हैं।

पूजा की विधि

दिन की शुरुआत सूर्योदय से पहले होती है। भक्त पवित्र स्नान कर साफ कपड़े पहनते हैं और फिर व्रत का संकल्प लेते हैं। पूजा स्थल को साफ करने के बाद एक सजी हुई चौकी पर भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर रखी जाती है।

पूजा के दौरान भक्त दूर्वा घास, फूल, चावल के दाने और चंदन का लेप अर्पित करते हैं और भगवान के सामने दीपक जलाते हैं। भोग के रूप में मोदक, लड्डू या गुड़ के साथ भुने हुए चने चढ़ाए जाते हैं।

इस दौरान 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का बार-बार जाप किया जाता है और कई भक्त कम से कम 108 बार इसका पाठ करते हैं। पूरे दिन भक्त उपवास रखते हुए प्रार्थना और ध्यान में लीन रहते हैं।

व्रत तभी पूरा होता है जब चंद्रमा निकलता है। भक्त पहले चंद्र देव को अर्घ्य देते हैं, फिर एक बार भगवान गणेश की आरती करते हैं और उसके बाद ही व्रत खोलते हैं। इस मौके पर जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े या दूसरी जरूरी चीजें दान करना बेहद पुण्य का काम माना जाता है।

संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा

संकष्टी चतुर्थी से जुड़ी सबसे प्रचलित कथाओं में से एक राजा हरिश्चंद्र की है, जिन्हें अपना राज्य, धन और परिवार खोने के बाद भारी कष्ट झेलना पड़ा था।

इस कठिन दौर में राजा ने ऋषि लोमश से मार्गदर्शन मांगा। ऋषि ने उन्हें पूरी श्रद्धा के साथ संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत रखने की सलाह दी। ऋषि के बताए अनुसार राजा हरिश्चंद्र ने भगवान गणेश की पूजा की, पवित्र व्रत कथा सुनी और चंद्रमा को प्रार्थना करने के बाद ही व्रत पूरा किया।

राजा की सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान गणेश ने उनके जीवन के सारे कष्ट दूर कर दिए और उनका खोया हुआ राज्य, समृद्धि, मान-सम्मान और परिवार वापस लौटा दिया।

यह कथा भगवान गणेश की संकटनाशन यानी बाधाओं को खत्म करने वाली भूमिका को दर्शाती है। यह इस विश्वास को और मजबूत करती है कि जो भक्त पूरी आस्था के साथ संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखते हैं, उन्हें शांति, समृद्धि, सफलता और जीवन की चुनौतियों से लड़ने की ताकत मिलती है।

सवाल-जवाब

इस बार संकष्टी चतुर्थी कब है?
आषाढ़ की संकष्टी चतुर्थी शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी।
चतुर्थी तिथि कब शुरू और खत्म होगी?
चतुर्थी तिथि 3 जुलाई को सुबह 11:20 बजे शुरू होकर 4 जुलाई 2026 को दोपहर 12:40 बजे समाप्त होगी।
3 जुलाई को चंद्रोदय कितने बजे होगा?
3 जुलाई 2026 को चंद्रोदय रात 9:58 बजे होगा, जिसके बाद अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।
व्रत 3 जुलाई को ही क्यों रखा जाएगा?
क्योंकि यह व्रत चतुर्थी के दिन चंद्रोदय के अनुसार रखा जाता है, इसलिए भक्त 3 जुलाई को उपवास रखेंगे।
पूजा में कौन सा मंत्र जपा जाता है?
'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप किया जाता है और कई भक्त कम से कम 108 बार इसका पाठ करते हैं।
व्रत में भगवान गणेश को क्या भोग लगाया जाता है?
भोग के रूप में मोदक, लड्डू या गुड़ के साथ भुने हुए चने चढ़ाए जाते हैं।
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