राजस्थान के प्रसिद्ध खाटूश्याम जी मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचने वाले भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना जारी की गई है। अमावस्या की तिथि बीतने के बाद मंदिर में निभाई जाने वाली पारंपरिक धार्मिक व्यवस्थाओं के तहत बाबा श्याम का विशेष तिलक श्रृंगार किया जाना तय हुआ है। इस विशेष पूजा और सेवा कार्य के चलते मंदिर परिसर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए अस्थाई तौर पर बंद रखे जाएंगे। श्री श्याम मंदिर कमेटी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, यह पाबंदी 13 अगस्त की रात से लागू होगी और अगले दिन देर शाम तक बनी रहेगी। इस दौरान मंदिर परिसर में आम प्रवेश पूरी तरह से स्थगित रहेगा ताकि धार्मिक अनुष्ठान सुचारू रूप से संपन्न किए जा सकें।
19 घंटे का रहेगा कपाट बंद का समय
श्री श्याम मंदिर कमेटी के कोषाध्यक्ष रवि सिंह चौहान ने इस संदर्भ में आधिकारिक विवरण साझा किया है। उन्होंने बताया कि परंपरा के अनुसार 13 अगस्त की रात 10 बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद 14 अगस्त को दिनभर भक्तों को बाबा श्याम के दर्शन प्राप्त नहीं हो सकेंगे। मंदिर के पट पुनः 14 अगस्त की शाम 5 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। इस तरह कुल मिलाकर करीब 19 घंटे तक मंदिर में दर्शन सेवा पूरी तरह स्थगित रहेगी। मंदिर प्रशासन ने दूर-दराज से आने वाले सभी श्याम भक्तों से आग्रह किया है कि वे इस समयावधि का विशेष ध्यान रखें और अपनी यात्रा की योजना कपाट खुलने के समय के अनुसार ही बनाएं, ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा न उठानी पड़े।
तिलक श्रृंगार और चंदन लेप की विशेष धार्मिक प्रक्रिया
अमावस्या के उपरांत बाबा श्याम के मस्तक पर विशेष तिलक श्रृंगार करने की पुरातन परंपरा रही है। कोषाध्यक्ष रवि सिंह चौहान के अनुसार, इस धार्मिक विधि को पूरा करने में आमतौर पर 8 से 10 घंटे या उससे अधिक का समय लग जाता है। इस पूरी अवधि के दौरान बाबा श्याम के विग्रह के मस्तक पर चंदन का विशेष लेप लगाया जाता है। इसके साथ ही मंदिर के पुजारी वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान संपन्न करते हैं। चूंकि यह एक अत्यंत गोपनीय और एकांत में की जाने वाली सेवा प्रक्रिया है, इसलिए इस दौरान श्रद्धालुओं का प्रवेश वर्जित रहता है।
15 अगस्त को तिरंगे रूप में सजेगा दरबार
धार्मिक अनुष्ठान पूरा होने के बाद जब 14 अगस्त की शाम 5 बजे मंदिर के पट पुनः खुलेंगे, तब श्रद्धालु बाबा श्याम के नए स्वरूप के दर्शन कर सकेंगे। इसके अगले दिन यानी 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मंदिर में विशेष सजावट की जाएगी। हर साल की तरह इस बार भी 15 अगस्त को बाबा श्याम का तिरंगा थीम पर भव्य श्रृंगार किया जाएगा। इस खास मौके पर मंदिर के मुख्य गर्भ गृह को सुंदर और दुर्लभ देशी-विदेशी फूलों से कलात्मक रूप से सजाया जाएगा, जिससे समूचा मंदिर परिसर देशभक्ति के रंगों से सराबोर दिखाई देगा।
महीने में दो रूपों में दर्शन देने की परंपरा
खाटूश्याम जी मंदिर की मान्यताओं के अनुसार, बाबा श्याम एक महीने के भीतर दो अलग-अलग स्वरूपों में अपने भक्तों को दर्शन प्रदान करते हैं। इनमें से पहला रूप शालिग्राम स्वरूप कहलाता है, जिसमें बाबा अपने मूल रूप में विराजते हैं। शालिग्राम स्वरूप के दर्शन भक्तों को महीने में केवल सात दिन ही प्राप्त होते हैं। वहीं दूसरा रूप श्याम वर्ण कहलाता है, जिसमें बाबा श्याम लगभग 22 से 23 दिनों तक अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। तिलक श्रृंगार की यह विशेष प्रक्रिया इन्हीं स्वरूप परिवर्तनों और धार्मिक नियमों से जुड़ी हुई है।
शीश दानी बाबा श्याम और महाभारत की पौराणिक कथा
बाबा श्याम को सनातन परंपरा में 'हारे का सहारा' कहा जाता है और उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का ही कलयुगी अवतार माना गया है। इससे जुड़ी पौराणिक कथा महाभारत के युद्ध काल से संबंधित है। महाभारत युद्ध के समय भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक कौरवों की ओर से युद्ध क्षेत्र में उतरने की तैयारी कर रहे थे। बर्बरीक के पास ऐसे अमोघ बाण थे जो क्षण भर में युद्ध का परिणाम बदल सकते थे। तब भगवान श्रीकृष्ण ने एक ब्राह्मण का रूप धारण कर बर्बरीक से उनका शीश दान में मांग लिया। बर्बरीक ने बिना किसी संकोच के अपना शीश काटकर भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में अर्पित कर दिया। इस महान त्याग से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को वरदान दिया कि कलयुग में वे उनके स्वयं के नाम 'श्याम' से पूजे जाएंगे और जो भी व्यक्ति जीवन में हार मानकर उनके पास आएगा, वे उसके सबसे बड़े मददगार और सहारे बनेंगे। इसी वरदान के कारण आज देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर खाटूश्याम जी के दरबार में पहुंचते हैं।



















