चित्रकूट में इन दिनों नवरात्र के पावन पर्व पर भक्ति और संस्कृति का अद्भुत समागम देखने को मिल रहा है। मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित राघव प्रयाग घाट पर एक भव्य सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय रामलीला उत्सव चल रहा है, जहां देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से आए कलाकार भी अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य श्रीराम के जीवन चरित्र और उनके आदर्शों को अनूठी संस्कृतियों के माध्यम से दर्शकों के सामने लाना है, जिसे देखने के लिए उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के तमाम इलाकों से भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की पहल
यह सात दिवसीय विशेष आयोजन 13 से 19 अक्टूबर के बीच दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, नागपुर और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में चल रहा है। इसे पर्यटन एवं संस्कृति विभाग का पूरा सहयोग प्राप्त है। इस उत्सव के पीछे का मुख्य उद्देश्य रामकथा की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को एक मंच पर लाना और हमारी प्राचीन आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान देना है, ताकि चित्रकूट आने वाले सभी श्रद्धालु हमारी समृद्ध धार्मिक संस्कृति को और गहराई से समझ सकें।
थाईलैंड के खोन नृत्य ने मोहा मन
इस महोत्सव के दौरान विभिन्न संस्कृतियों का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। रामलीला दल के साथ जुड़े आयोजक संजीव मालवीय ने बताया कि कार्यक्रम के पहले दिन थाईलैंड से आए रामाकेन दल के कलाकारों ने अपनी विशेष खोन नृत्य शैली के माध्यम से भगवान श्रीराम के जन्म और उनकी बाल लीलाओं का बहुत ही सुंदर मंचन किया। कलाकारों की शानदार वेशभूषा, पारंपरिक नृत्य और भावपूर्ण अदाकारी ने रामकथा के उन दृश्यों को जैसे जीवंत ही कर दिया। इसके साथ ही तेलंगाना से पहुंचे कलाकारों ने भी अपनी अनूठी शैली में रामायण के कई महत्वपूर्ण प्रसंगों को मंच पर उतारा, जिससे दर्शकों को एक ही स्थान पर भारतीय संस्कृति की अद्भुत विविधता देखने को मिल रही है।
सोशल मीडिया पर छाई रामलीला
आज की युवा पीढ़ी भी इस पारंपरिक आयोजन से पूरी तरह जुड़ी हुई नजर आ रही है। आयोजकों का कहना है कि आज की जेन जी पीढ़ी द्वारा इस रामलीला के वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर शूट करके वायरल किए जा रहे हैं, जिन्हें देखकर पूरी टीम को बेहद प्रसन्नता होती है। यह इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक तकनीक और पुरानी परंपराएं मिलकर आज के युवाओं को भी अपनी जड़ों से जोड़ने में कामयाब हो रही हैं।
3D मंच पर जीवंत हुआ त्रेतायुग
इस पूरे आयोजन को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का भी भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है। इस 3D मंच को सजाने वाले चंद्र शेखर कुरील ने साझा किया कि मंदाकिनी तट पर बने इस विशेष 3D मंच के जरिए दर्शकों को त्रेतायुग का अहसास कराया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और पारंपरिक कला के इस अद्भुत मेल से लोग रामकथा को एक बिल्कुल नए और अनूठे अनुभव के रूप में देख रहे हैं।
यह उत्सव इस बात को भी साबित करता है कि रामकथा केवल आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे लोकजीवन और आध्यात्मिक चेतना का मुख्य आधार है। 3D मंच की मदद से दर्शकों को ऐसा प्रतीत कराया जाता है कि मानो भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी वास्तव में उनके ठीक सामने खड़े हों। शुरुआत में जब चित्रकूट में पहला शो आयोजित किया गया था, तब दर्शकों की संख्या काफी कम थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं और रात के 12 बजे तक हजारों की तादाद में श्रद्धालु इस भव्य रामलीला का आनंद लेने के लिए डटे रहते हैं। इन सात दिनों में अलग-अलग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी जबरदस्त बढ़ावा मिल रहा है।



















