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देव कमरुनाग मेला 14 से 16 जून: मंदिर पहुंचने के तीन रास्ते, लौटने का सिर्फ एक — जानें पूरा ट्रैफिक और सुरक्षा प्लानधर्म
13 जून 2026, 1:07 pm (137 दिन पहले)· 2

देव कमरुनाग मेला 14 से 16 जून: मंदिर पहुंचने के तीन रास्ते, लौटने का सिर्फ एक — जानें पूरा ट्रैफिक और सुरक्षा प्लान

मण्डी जिला के देव कमरुनाग के ऐतिहासिक मेले के लिए गोहर प्रशासन ने 14, 15 और 16 जून का विशेष ट्रैफिक प्लान जारी किया है, जिसमें मंदिर जाने के लिए तीन और वापसी के लिए केवल एक मार्ग तय किया गया है तथा करीब 70 जवान तैनात रहेंगे।

हिमाचल प्रदेश के मण्डी जिला में आराध्य देव कमरुनाग का ऐतिहासिक मेला फिर दस्तक दे रहा है, और इस बार प्रशासन ने श्रद्धालुओं की भीड़ को संभालने के लिए पहले से ही पूरी व्यवस्था कस ली है। गोहर प्रशासन का कहना है कि मेले के सफल और शांतिपूर्ण आयोजन से जुड़ी सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सबसे अहम बात यह है कि मंदिर तक पहुंचने और वहां से लौटने के लिए वाहनों का रास्ता अब तय कर दिया गया है — जाने के लिए तीन विकल्प हैं, मगर वापसी का रास्ता सिर्फ एक ही रहेगा।

14 से 16 जून तक लागू रहेगा विशेष ट्रैफिक रोड मैप

डीएसपी हेडक्वार्टर दिनेश कुमार ने मेले के दौरान लागू रहने वाली यातायात और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 14, 15 और 16 जून — इन तीन दिनों के लिए श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक विशेष ट्रैफिक रोड मैप तैयार किया गया है। योजना के मुताबिक देव कमरुनाग मंदिर की ओर जाने वाले वाहनों को तीन प्रमुख मार्गों से आने-जाने की अनुमति होगी।

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ये तीनों रास्ते चैलचौक से शुरू होते हैं — एक वाया सरोआ, दूसरा वाया फंग्यार और तीसरा वाया शाला। यानी श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार इनमें से कोई भी मार्ग चुन सकते हैं। लेकिन लौटते समय छूट नहीं रहेगी — दर्शन के बाद सभी वाहनों को झौर से वाया जाछ मार्ग का ही इस्तेमाल करना होगा। इस एकल वापसी मार्ग का मकसद आते-जाते वाहनों की भीड़ को आपस में टकराने से रोकना और रास्तों को जाम मुक्त रखना है।

नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई

प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यातायात नियमों की अनदेखी करने वालों पर गोहर पुलिस सख्ती बरतेगी और कड़ी कार्रवाई करेगी। व्यवस्था बनाए रखने के लिए मेले के दौरान करीब 70 पुलिस एवं होमगार्ड जवान तैनात किए जाएंगे। ये जवान श्रद्धालुओं की सुरक्षा के साथ-साथ यातायात को सुचारू रूप से चलाए रखने की जिम्मेदारी संभालेंगे।

13 जून से ही उमड़ने लगे श्रद्धालु

देव कमरुनाग के दर्शन के लिए भक्तों का आना 13 जून से ही शुरू हो चुका है। हर साल लाखों श्रद्धालु इस देवता के दरबार में शीश नवाकर आशीर्वाद लेते हैं। यह सिलसिला सिर्फ हिमाचल प्रदेश तक सीमित नहीं रहता — उत्तर भारत के अलग-अलग राज्यों से हजारों श्रद्धालु और पर्यटक इस ऐतिहासिक मेले में पहुंचकर इसकी रौनक बढ़ाते हैं। आस्था, संस्कृति और परंपरा का यह मेल हिमाचल प्रदेश के बड़े धार्मिक आयोजनों में खास पहचान रखता है।

इस बार भीड़ का सबसे बड़ा दबाव सोमवार, 15 जून को रहने की उम्मीद है, जब साजे का अवसर होगा। इस दिन देव कमरुनाग के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए बड़ी तादाद में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं, और जनसैलाब उमड़ने की प्रबल संभावना रहती है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात के व्यापक इंतजाम किए हैं।

एसडीएम की श्रद्धालुओं से अपील

एसडीएम गोहर देवी सिंह ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मेले के सफल और शांतिपूर्ण आयोजन में सहयोग दें। उन्होंने स्वच्छता और सफाई व्यवस्था का खास ध्यान रखने तथा तय किए गए यातायात नियमों का पालन करने की बात कही। साथ ही एक जरूरी सावधानी की ओर भी इशारा किया — ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम कभी भी करवट ले सकता है और बारिश की आशंका बनी रहती है। ऐसे में उन्होंने श्रद्धालुओं से पूरी तैयारी के साथ मेले में पहुंचने और इस धार्मिक आयोजन की गरिमा एवं शोभा बढ़ाने में योगदान देने की अपील की।

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