सस्ते कबाड़ के झांसे में 9 लाख की डकैती, 12 जिलों में 1300 किमी पीछा कर दबोचे गए 7 बदमाशपितृ पक्ष में लोहे के बर्तनों और दान से क्यों बचना चाहिए, जानिए धार्मिक कारणशारदीय नवरात्र से पूर्व उत्तराभाद्रपद में शनि का प्रवेश, सप्तम भाव के गोचर से साझेदारी और कारोबार पर असरसपोटरा के गज्जूपुरा में राज्य स्तरीय खो-खो टूर्नामेंट का आगाज, 86 टीमों की 1032 छात्राएं दिखाएंगी दमउत्तर भारत से मानसून की विदाई तेज, पूर्वोत्तर और दक्षिण के राज्यों में भारी बारिश का अलर्टनोंगस्टोइन स्टाफ नर्स भर्ती विवाद: वीपीपी ने एमडीसी के हस्तक्षेप को ठहराया सही, निष्पक्ष जांच की उठाई मांगअजमेर में बस चालक से मारपीट पर रोडवेज कर्मियों का फूटा गुस्सा, अंबेडकर सर्किल पर बसें रोक लगाया जामबालाघाट में रहस्यमयी बीमारी के बाद हरकत में प्रशासन, 50 गांवों में 43 हजार से अधिक लोगों का हुआ स्वास्थ्य परीक्षणवोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के नियमों में बदलाव, कई राज्यों में फॉर्म-6 से हटी एसआईआर घोषणापंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से अमरिंदर सिंह राजा वारिंग की हो सकती है छुट्टी, विजय इंदर सिंगला सबसे आगे
धार्मिक अनुष्ठान में अचानक दीया बुझ जाने पर क्या करें? समझें छिपे संकेत और निवारणधर्म
15 अग॰ 2026, 12:24 am (47 दिन पहले)· 2

धार्मिक अनुष्ठान में अचानक दीया बुझ जाने पर क्या करें? समझें छिपे संकेत और निवारण

पूजा के दौरान दीपक का अचानक बुझ जाना केवल हवा या तेल की कमी नहीं, बल्कि एकाग्रता और वास्तु से जुड़े कई धार्मिक संकेत भी देता है। जानिए इसके कारण और सही नियम।

सनातन धर्म और भारतीय परंपराओं में किसी भी पूजा-पाठ, अनुष्ठान या मांगलिक कार्य का शुभारंभ करने से पहले दीपक जलाना अनिवार्य माना गया है। प्रज्वलित दीया केवल प्रकाश का जरिया नहीं है, बल्कि यह पवित्रता, सकारात्मक ऊर्जा और शुभता का सर्वोपरि प्रतीक है। पूजा स्थल पर जलती हुई लौ मन को शांति प्रदान करती है और साधक का ध्यान भगवान के चरणों में केंद्रित करने में मदद करती है। हालांकि, कई बार पूजा के मध्य में ही अचानक दीपक बुझ जाता है। ऐसी स्थिति बनते ही श्रद्धालुओं के मन में शंका पैदा हो जाती है कि यह किसी अनहोनी का संकेत है या महज एक सामान्य घटना। धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं में इसके अलग-अलग संकेत बताए गए हैं।

पूजा में दीपक का महत्व और एकाग्रता का संबंध

दीपक की लौ से निकलने वाली ऊर्जा घर के माहौल से नकारात्मकता को दूर करती है। जब कोई व्यक्ति भक्ति भाव से पूजा करने बैठता है, तो दीपक का प्रकाश उसके अंतर्मन में एकाग्रता जगाता है। शास्त्रों के अनुसार, ईश्वर के आह्वान से पूर्व दीप प्रज्वलन करना उनके प्रति आदर और भक्ति व्यक्त करने का मार्ग है। यदि पूजा के दौरान बार-बार दीया बुझता है, तो इसका एक अर्थ यह निकाला जाता है कि साधक का ध्यान पूरी तरह से पूजा में नहीं है। मन में चल रहे भटकाव और विचारों की हलचल के कारण भी ऐसा हो सकता है। इसलिए ध्यान को केंद्रित रखकर शांत चित्त से दोबारा पूजा आरंभ करनी चाहिए।

ये भी पढ़ें

दीपक बुझने से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और संकेत

धार्मिक एवं वास्तु शास्त्रों में दीपक के अचानक बुझने को कई प्रकार के संकेतों से जोड़कर देखा जाता है

  • नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष: ऐसा माना जाता है कि यदि पूजा स्थल पर नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव या वास्तु दोष मौजूद हो, तो दीया प्रज्वलित रहने में बाधा आती है। कुछ लोग इसे देवी-देवताओं की अप्रसन्नता से भी जोड़ते हैं।
  • पितरों की नाराजगी: मान्यताओं के अनुसार, पूजा के समय दीया बुझना अशांत पितरों या पितृ दोष की ओर भी इशारा करता है। इस स्थिति में अपने इष्ट देव के साथ-साथ पितरों का ध्यान करके क्षमा याचना करनी चाहिए।
  • कार्यों में बाधा की आशंका: अचानक लौ का शांत होना आने वाले समय में किसी महत्वपूर्ण कार्य में रुकावट या अनहोनी का संकेत माना जाता है। हालांकि, विद्वानों का मानना है कि हर बार इसे अमंगल ही नहीं समझना चाहिए।
  • व्यावहारिक कारण: कई बार पूजा कक्ष में तेज हवा चलने, दीपक में तेल या घी का स्तर कम होने अथवा बाती के ठीक से न जलने के कारण भी दीया बुझ जाता है।

दीपक बुझ जाए तो कैसे करें सुधार?

यदि पूजा करते समय दीया अचानक बुझ जाए, तो घबराने या असमंजस में पड़ने की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए सरल धार्मिक नियम बताए गए हैं। सबसे पहले दीपक में घी या तेल की पर्याप्त मात्रा की जांच करें। यदि बाती छोटी हो गई हो या जलकर मोटी हो चुकी हो, तो उसे बदलकर नए और सही आकार की बाती लगाएं। इसके बाद भगवान के समक्ष हाथ जोड़कर अपने जाने-अनजाने हुए अपराधों और ध्यान भटकने के लिए क्षमा प्रार्थना करें। इसके पश्चात पूर्ण श्रद्धा के साथ दीपक को पुन: प्रज्वलित करें और पूजा को संपन्न करें।

दीप प्रज्वलन के समय पढ़ें यह कल्याणकारी मंत्र

दीपक जलाते समय या उसे दोबारा प्रज्वलित करते समय पवित्र मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है। शास्त्रों में वर्णित प्रसिद्ध मंत्र इस प्रकार है

शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धनसंपदाम्।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥

इस मंत्र का अर्थ है कि हे दीप की ज्योति, आप हमारे जीवन में शुभता, कल्याण, उत्तम स्वास्थ्य और धन-संपत्ति प्रदान करें। साथ ही हमारी नकारात्मक सोच और शत्रुओं की बुद्धि का विनाश करें। इस मंत्र के उच्चारण से पूजा स्थल पर दिव्य तरंगों का संचार होता है।

लोक मान्यता और आस्था का संतुलन

दीपक के बुझने से जुड़ी ये तमाम बातें सदियों पुरानी लोक मान्यताओं और धार्मिक आस्था पर आधारित हैं। यदि ऐसा घटित होता है तो भयभीत होने के बजाय व्यावहारिक कारणों को ठीक करना चाहिए। सच्चे मन से ईश्वर का स्मरण करने और अपनी भक्ति पर अडिग रहने से हर प्रकार की नकारात्मकता स्वतः समाप्त हो जाती है।

सवाल-जवाब

क्या पूजा के दौरान दीपक का बुझना हमेशा अपशकुन होता है?
नहीं, हर बार यह अपशकुन नहीं होता। अक्सर हवा चलने या तेल-बाती समाप्त होने जैसे व्यावहारिक कारणों से भी दीपक बुझ जाता है।
यदि पूजा के बीच में दीया बुझ जाए तो तुरंत क्या करना चाहिए?
दीपक में तेल या घी की जांच करें, आवश्यकता होने पर नई बाती लगाएं, भगवान से क्षमा मांगें और दीया पुन: प्रज्वलित करें।
दीपक बुझना किन-किन धार्मिक बातों की ओर इशारा करता है?
धार्मिक मान्यताओं में इसे एकाग्रता की कमी, नकारात्मक ऊर्जा, वास्तु दोष, पितरों की अप्रसन्नता या कार्यों में रुकावट का संकेत माना जाता है।
दीपक जलाते समय किस मंत्र का जाप करना चाहिए?
दीप प्रज्वलन के समय 'शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धनसंपदाम्। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥' मंत्र का जाप करना चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp