स्वतंत्रता दिवस भाषण पर अरविंद केजरीवाल का बड़ा हमला, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन को बताया घबराया हुआदेश के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़े सुधार की तैयारी, केंद्र सरकार ने जारी किए नए लाइसेंसिंग और सुरक्षा नियमगॉल टेस्ट में चमके ऋषभ पंत, विदेशी सरजमीं पर सबसे ज्यादा छक्के जड़ने वाले बने नंबर-1 विकेटकीपरडिज्नी के D23 इवेंट में जुटोपिया 3 पर लगी मुहर, एनीमेशन सीरीज में होगी पक्षियों की नई एंट्रीउत्तर प्रदेश में बाइक पर ओवरलोडिंग को लेकर अखिलेश यादव ने जताई चिंता, लोगों से की सुरक्षित रहने की अपीलबलूच नेतृत्व ने डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग को भेजी गंभीर चिट्ठी, सुराब एयरस्ट्राइक के बाद अमेरिकी और चीनी हथियारों की सप्लाई रोकने की मांगगुजरात के सुल्तानाबाद में फार्महाउस शराब पार्टी पर छापा, 8 महिलाओं सहित 22 लोग हिरासत मेंशकुन शास्त्र के अनुसार सिर पर कौवा बैठना किस बात का संकेत माना जाता हैपिक्सार ने कोको 2 की पहली झलक दिखाई, 2029 में मिगुएल की आफ्टरलाइफ में होगी वापसीकोरापुट में अल्बिना गराडा की हत्या कर आंध्र प्रदेश में दफनाया शव, मोबाइल लोकेशन से खुला राज
गांधी के विचार आज भी प्रासंगिक, समाज और राजनीति में बदलाव का रास्ता: शोधार्थी शम्मी कुमार सिंहधर्म
11 जुल॰ 2026, 11:33 am (36 दिन पहले)· 2

गांधी के विचार आज भी प्रासंगिक, समाज और राजनीति में बदलाव का रास्ता: शोधार्थी शम्मी कुमार सिंह

गांधी दर्शन पर शोध करने वाले शम्मी कुमार सिंह का मानना है कि महात्मा गांधी के सिद्धांत आज के दौर में भी मानवता को सही दिशा दे सकते हैं। वे गांधी के विचारों को आधुनिक समाज और तकनीक के युग में अनिवार्य बताते हैं।

महात्मा गांधी को अक्सर केवल इतिहास की पुस्तकों में सिमटा हुआ या मुद्रा पर अंकित एक चित्र समझा जाता है, लेकिन गांधी के विचार आज भी हमारी सामाजिक व्यवस्था, राजनीति और व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में पूरी तरह सक्षम हैं। यह विचार शम्मी कुमार सिंह ने साझा किए हैं, जिन्होंने गांधी दर्शन पर वर्षों तक गहन अध्ययन और शोध कार्य किया है। शम्मी कुमार सिंह का मानना है कि गांधी केवल एक नाम मात्र नहीं हैं, बल्कि वे मानवता के उच्चतम मूल्यों को संरक्षित रखने का एक सशक्त माध्यम हैं।

छात्र राजनीति से गांधी दर्शन तक का सफर

शम्मी कुमार सिंह ने बताया कि गांधीवादी विचारों में उनकी रुचि का बीजारोपण यूपी कॉलेज में बीएससी के दौरान हुआ था, जब उन्होंने छात्र राजनीति में प्रवेश किया। महामंत्री पद के लिए चुनाव लड़ते समय वे गांधी के सिद्धांतों से अत्यधिक प्रभावित हुए। इसके बाद उन्होंने काशी विद्यापीठ से गांधी दर्शन में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की और यूजीसी फेलोशिप के लिए चुने गए। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर केसी पांडेय के मार्गदर्शन में ‘गांधी और लोहिया के समाजवादी चिंतन की समकालीन प्रासंगिकता’ विषय पर अपना शोध पूरा किया।

ये भी पढ़ें

सत्य और अहिंसा की नई परिभाषा

शम्मी कुमार सिंह का तर्क है कि यदि आज की युवा पीढ़ी केवल गांधी की पुस्तक ‘माई एक्सपेरिमेंट विद ट्रुथ’ (सत्य के साथ मेरे प्रयोग) का अध्ययन कर ले, तो उनके व्यक्तित्व को लेकर फैली भ्रांतियां काफी हद तक खत्म हो जाएंगी। गांधी केवल एक राजनीतिक शख्सियत नहीं थे, बल्कि वे सामाजिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक चिंतन के एक आधारभूत स्तंभ थे। उन्होंने सत्य, अहिंसा और आत्मानुशासन जैसे सिद्धांतों को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाया। शम्मी के अनुसार, गांधीजी ने भगवान बुद्ध के करुणा और अहिंसा के उपदेशों को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में नई तरह से प्रस्तुत किया।

बुद्ध और कबीर का प्रभाव

शोधार्थी के अनुसार, गांधीजी ने बुद्ध के संदेशों और कबीर की सहजता को एक नया विस्तार प्रदान किया। वे बताते हैं कि गांधीजी का ‘एकादश व्रत’ आत्म-अनुशासन का प्रमुख आधार है। यदि कोई व्यक्ति इसे अपने दैनिक जीवन में अपनाता है, तो वह न केवल एक श्रेष्ठ इंसान बनता है, बल्कि दैवीय गुणों के भी करीब पहुंच जाता है। सत्य का कोई विकल्प नहीं है, यह संदेश गांधी के सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों में से एक है। साथ ही, उनका कथन ‘पाप से घृणा करो, पापी से नहीं’ आज भी समाज में मानवीय संवेदना और सहिष्णुता बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

अहिंसा: वीरता की निशानी

गांधीजी की अहिंसा को लेकर शम्मी कुमार सिंह की व्याख्या बहुत स्पष्ट है। उन्होंने बताया कि लोग अक्सर गांधी की अहिंसा का गलत अर्थ निकालते हैं। गांधी का स्पष्ट मानना था कि यदि चुनाव कायरता और हिंसा में से किसी एक को चुनना हो, तो वे हिंसा को प्राथमिकता देंगे, क्योंकि कायरता से बड़ा कोई पाप नहीं है। गांधीवादी अहिंसा का वास्तविक अर्थ भ्रष्टाचार मुक्त जीवन, ईमानदारी का पालन और निडरता है। आज के दौर में जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक का बोलबाला है, तो गांधी की भूमिका और भी अहम हो जाती है। शम्मी का मानना है कि तकनीकी युग में आत्मानुशासन सबसे बड़ी चुनौती है, इसलिए गांधी, बुद्ध और कबीर के विचारों को पढ़ना अनिवार्य है ताकि हम अपनी मानवता को बरकरार रख सकें।

सवाल-जवाब

शम्मी कुमार सिंह ने किस विषय पर शोध किया है?
उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर केसी पांडेय के निर्देशन में 'गांधी और लोहिया के समाजवादी चिंतन की समकालीन प्रासंगिकता' पर शोध किया है।
गांधीजी के अनुसार कायरता और हिंसा में से क्या चुनना चाहिए?
गांधीजी का मानना था कि यदि कायरता और हिंसा में से किसी एक को चुनना हो, तो वे हिंसा को चुनेंगे क्योंकि कायरता को वे सबसे बड़ा पाप मानते थे।
गांधीजी के अहिंसा के विचार का क्या अर्थ है?
गांधीवादी अहिंसा का अर्थ भ्रष्टाचार मुक्त जीवन, ईमानदारी और निडरता का पालन करना है।
शम्मी कुमार सिंह आज के युग में किनके विचारों को पढ़ने की सलाह देते हैं?
शम्मी कुमार सिंह आज के तकनीकी युग में गांधी, बुद्ध और कबीर के विचारों को पढ़ने की सलाह देते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR