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गुप्त नवरात्रि 2024: 15 जुलाई से शुरू, जानिए दस महाविद्याओं की साधना का महत्व और कलश स्थापना का समयधर्म
9 जुल॰ 2026, 7:35 am (38 दिन पहले)· 2

गुप्त नवरात्रि 2024: 15 जुलाई से शुरू, जानिए दस महाविद्याओं की साधना का महत्व और कलश स्थापना का समय

आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि इस साल 15 जुलाई से 23 जुलाई तक मनाई जाएगी। यह पर्व विशेष रूप से तंत्र साधना और दस महाविद्याओं की उपासना के लिए जाना जाता है।

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की पहली तिथि से गुप्त नवरात्रि का महापर्व आरंभ हो रहा है। इस वर्ष यह अनुष्ठान 15 जुलाई से शुरू होकर 23 जुलाई को पूर्णाहुति के साथ पूर्ण होगा। साल भर में आने वाली चार नवरात्रियों में से दो गुप्त नवरात्रियां होती हैं, जिन्हें माघ और आषाढ़ के महीनों में मनाया जाता है। इन दिनों का महत्व आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करने, गुप्त सिद्धियों को प्राप्त करने और तंत्र-मंत्र के विशेष प्रयोगों के लिए अत्यधिक माना जाता है। सामान्य नवरात्रियों के विपरीत, गुप्त नवरात्रि में किए जाने वाले अनुष्ठान अत्यंत गोपनीय रखे जाते हैं, इसीलिए इनका सार्वजनिक प्रसार बहुत कम होता है।

दस महाविद्याओं की उपासना का फल

ज्योतिषाचार्य रुद्रेश चतुर्वेदी का कहना है कि गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ सामान्य स्वरूपों के अलावा दस महाविद्याओं की अत्यंत प्रभावशाली साधना का विधान है। इन महाविद्याओं में मां काली, मां तारा, मां त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, मां छिन्नमस्ता, मां त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला की पूजा की जाती है। जो साधक इस गुप्त काल में पूर्ण निष्ठा और नियमों के साथ इन देवियों की आराधना करता है, उसे विशेष फल की प्राप्ति होती है। यह समय जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मकता लाने वाला माना गया है, जिससे व्यक्ति के कष्टों का स्वतः समाधान हो जाता है।

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आंतरिक शक्ति और सुरक्षा का कवच

गुप्त नवरात्रि का पर्व आंतरिक डर पर विजय पाने और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में एक बड़ा अवसर है। इस दौरान भक्त अपनी गुप्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए साधना करते हैं। इसमें मां वाराही और मां प्रत्यंगिरा जैसी गुप्त शक्तियों की आराधना का विशेष महत्व है। मां वाराही को ब्रह्मांड की परम माता माना जाता है, जो समस्त सृष्टि के मूल रूपों को अपने भीतर समेटे हुए हैं। इनकी कृपा से भक्तों को मोक्ष, परम ज्ञान और एक ऐसा दिव्य सुरक्षा कवच प्राप्त होता है जो संकटों से रक्षा करता है। तंत्र-मंत्र के साधकों के लिए यह नौ दिन का काल किसी वरदान से कम नहीं होता, जहां वे एकांत में रहकर कठोर नियमों का पालन करते हुए अपनी आंतरिक शक्तियों को जागृत करते हैं।

कलश स्थापना और पूजा का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष प्रतिपदा तिथि 14 जुलाई को दोपहर 03:12 बजे शुरू होकर 15 जुलाई को सुबह 11:50 बजे समाप्त होगी। उदयतिथि की मान्यताओं को आधार मानते हुए, 15 जुलाई को ही घटस्थापना और पूजा का शुभारंभ किया जाएगा। घटस्थापना के लिए सबसे उत्तम समय सुबह 05:33 बजे से लेकर सुबह 10:09 बजे तक का निर्धारित किया गया है। भक्तों को इसी समयावधि के भीतर अपनी पूजा की तैयारी और संकल्प का कार्य संपन्न कर लेना चाहिए। नौ दिनों की यह तपस्या और साधना 23 जुलाई को पूर्णाहुति एवं हवन के साथ संपन्न होगी।

सवाल-जवाब

गुप्त नवरात्रि कब शुरू हो रही है?
इस वर्ष आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से शुरू हो रही है।
यह नवरात्रि कितने दिनों की होती है?
यह पावन पर्व पूरे नौ दिनों तक चलता है और 23 जुलाई को पूर्णाहुति के साथ संपन्न होता है।
गुप्त नवरात्रि में किसकी पूजा की जाती है?
इस दौरान मां दुर्गा के स्वरूपों के साथ-साथ दस महाविद्याओं की साधना की जाती है।
कलश स्थापना का शुभ समय क्या है?
15 जुलाई को कलश स्थापना के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह 05:33 बजे से सुबह 10:09 बजे तक है।
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