सनातन संस्कृति में वनस्पति जगत को केवल पर्यावरण का हिस्सा नहीं माना गया, बल्कि इसे मानव जीवन और गहरी आस्था का मूल आधार बताया गया है। प्राचीन मनीषियों और पूर्वजों की स्थापित हर पंथ परंपरा के मूल में विज्ञान और लोक कल्याण की भावना छिपी होती है। ज्योतिषीय गणनाओं और पौराणिक ग्रंथों के अनुसार आकाश मंडल में कुल सत्ताईस नक्षत्रों का वर्णन मिलता है। इन सभी सत्ताईस नक्षत्रों का गहरा ताल्लुक अलग-अलग पावन वृक्षों से जोड़ा गया है। इसी प्राचीन अवधारणा को धरातल पर जीवंत रूप देने के लिए हैदराबाद में एक अनूठी और भव्य पहल की गई है, जिसे वृक्षारामम नाम दिया गया है।
एक ही परिसर में सभी नक्षत्रों का मिलन
आमतौर पर अधिकांश लोगों को अपने जन्म नक्षत्र या राशि की जानकारी तो होती है, लेकिन उससे जुड़े विशिष्ट पवित्र पौधे की पहचान के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। इसके अलावा, एक ही जगह पर इन सभी सत्ताईस पेड़ों के दर्शन करना आम तौर पर संभव नहीं हो पाता है। इसी जरूरत को समझते हुए वृक्षारामम की स्थापना की गई है। इस विशेष परिसर के भीतर सभी सत्ताईस नक्षत्रों से ताल्लुक रखने वाले सत्ताईस अलग-अलग पौधों को एक साथ रोपित किया गया है और उन्हें बेहद संभालकर विकसित किया गया है।
धार्मिक आस्था और श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रबंध
ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति अपने जन्म नक्षत्र के प्रतिनिधि पेड़ की नियमित रूप से पूजा-अर्चना और देखभाल करता है, उसके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और शुभ फलों का संचार होता है। यहाँ आने वाले आगंतुकों के लिए अपने संबंधित नक्षत्र वृक्ष को पहचानना बेहद आसान बनाया गया है। श्रद्धालु न केवल अपने नक्षत्र पेड़ के दर्शन कर सकते हैं, बल्कि विधि-विधान के साथ उसकी पूजा और परिक्रमा भी कर पाते हैं। इस परिसर की वास्तुकला और व्यवस्था काफी व्यवस्थित है, जहाँ प्रत्येक पौधे के आधार पर एक सुंदर गोल चबूतरे का निर्माण किया गया है। इन चबूतरों पर संबंधित पेड़, उससे जुड़े नक्षत्र और उसके धार्मिक व औषधीय महत्व का पूरा विवरण अंकित किया गया है.
सूचना पट्टिका और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
इस रमणीय परिसर के मुख्य द्वार के पास एक बड़ी सूचना पट्टिका भी स्थापित की गई है, जिस पर किस नक्षत्र के लिए कौन सा वर्ण यानी नामाक्षर निर्धारित है और उसका कौन सा वृक्ष है, इसकी विस्तृत सूची दी गई है। इस अनूठे वृक्षारामम की स्थापना का सफर 21 दिसंबर 2015 को शुरू हुआ था और तब से यह लगातार प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित कर रहा है। यह स्थल केवल धार्मिक अनुष्ठानों और आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि यह आधुनिक पीढ़ी को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने, पौधों के औषधीय गुणों से परिचित कराने और हमारी प्राचीन सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बन चुका है।



















