नागौर के ब्रह्मपुरी में 400 साल पुराना श्री महालक्ष्मी मंदिर, कमल पुष्प पर विराजी चार भुजाओं वाली माता देती हैं समृद्धि का आशीषकमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों और पश्चिम एशिया संकट के बीच चांदी में उछाल, भाव 61 डॉलर के करीबशांति नगर में मठ की भूमि पर निर्माण को लेकर भड़का आक्रोश, गांधी चौक पर संत और ग्रामीण धरने पर डटेसुल्तानपुर के ऐतिहासिक राहुल टॉकीज को दोबारा जिंदा करने की तैयारी, 2016 से बंद पड़े सिनेमा हॉल की बदलेगी सूरतबरमूडा से बोस्टन जा रहा एयर एम्बुलेंस जेट लापता, पायलट ने कहा 'कुछ दिखाई नहीं दे रहा'बचत और निवेश में तालमेल बनाकर सुरक्षित करें भविष्य, समझें अपनी पूंजी बढ़ाने के ठोस नियमओपेक प्लस के यथास्थिति फैसले और जी7 की आपातकालीन निकासी से कच्चे तेल में फिसलन, डब्ल्यूटीआई 89 डॉलर के करीबकच्चे तेल के अतिरिक्त भंडार जारी करने से जापान का इनकार, डॉलर के मुकाबले 158 के स्तर पर संभला येनजमशेदपुर में 40 वर्षों से ठेले पर चल रही चलती-फिरती मिष्ठान दुकान, 20 से अधिक किस्मों के साथ गलियों में पहुंच रहे मोहम्मद कलीमपलामू के खेतों में स्ट्रॉबेरी की नई राह, एक एकड़ में चार लाख रुपये तक कमाई का मौका
तेलंगाना के सुरेंद्रपुरी में एक ही परिसर में कीजिए बद्रीनाथ से लेकर सबरीमाला तक के दर्शनधर्म
5 अक्तू॰ 2026, 8:15 am (1 घंटे पहले)· 0

तेलंगाना के सुरेंद्रपुरी में एक ही परिसर में कीजिए बद्रीनाथ से लेकर सबरीमाला तक के दर्शन

हैदराबाद के निकट कुंडा सत्यनारायण कलाधामम में देश के विख्यात मंदिरों की प्रतिकृतियां और महाकाव्यों के प्रसंग जीवंत मूर्तियों के रूप में स्थापित किए गए हैं.

भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को निकट से जानने के इच्छुक श्रद्धालुओं के लिए तेलंगाना का यादाद्री भुवनगिरि जिला एक विशेष गंतव्य बन चुका है. राजधानी हैदराबाद से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी तय करके यादगिरिगुट्टा मंदिर के तलहटी क्षेत्र में पहुंचा जा सकता है, जहां सुरेंद्रपुरी पौराणिक थीम पार्क स्थित है. कुंडा सत्यनारायण कलाधामम के नाम से प्रसिद्ध यह विस्तृत स्थल देश के पहले ऐसे पार्क के रूप में पहचान रखता है, जिसका पूरा ढांचा प्राचीन धर्मग्रंथों, वेदों तथा महाकाव्यों की कथाओं को शिल्पकला के माध्यम से साकार करने पर केंद्रित है.

पुत्र की स्मृति में हुआ था इस अनूठे कलाधाम का सृजन

इस अनूठे कलाधामम की नींव समाजसेवी कुंडा सत्यनारायण ने रखी थी, जिन्होंने अपने दिवंगत पुत्र सुरेंद्र की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के उद्देश्य से इसका निर्माण कराया. उनका मुख्य ध्येय आधुनिक पीढ़ी तथा युवाओं को देश के प्राचीन सांस्कृतिक मूल्यों, वैदिक धरोहर और आध्यात्मिक जड़ों से सहज रूप में जोड़ना रहा है. आज के व्यस्त दौर में यह परिसर पारिवारिक आगंतुकों को अपनी पौराणिक जड़ों से रूबरू कराने का उत्तम माध्यम उपलब्ध कराता है. लगभग तीन किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग पर फैला यह परिसर आगंतुकों का स्वागत भगवान हनुमान की 101 फीट ऊंची भव्य पंचमुखी प्रतिमा के साथ करता है, जो अपनी विशालता के कारण काफी दूरी से ही दृष्टिगोचर हो जाती है.

ये भी पढ़ें

शिल्पकला में साकार हुए महाकाव्यों के प्रसंग और अलौकिक लोक

परिसर के भीतरी भाग में रामायण एवं महाभारत के कालजयी आख्यानों को अत्यंत सधे हुए शिल्प में ढाला गया है. कुरुक्षेत्र के समरांगण में अर्जुन को गीता का ज्ञान देते श्रीकृष्ण, माता सीता का हरण तथा लंका दहन जैसे ऐतिहासिक अध्यायों को आदमकद शिल्पों के रूप में प्रस्तुत किया गया है. इन कलाकृतियों में शारीरिक भाव-भंगिमाएं स्पष्ट रूप से झलकती हैं. इसके अतिरिक्त प्राचीन मान्यताओं में वर्णित स्वर्ग लोक, पाताल लोक, नाग लोक तथा नरक लोक की संकल्पना को कृत्रिम गुफाओं के भीतर साकार किया गया है. नरक लोक में विभिन्न कर्मों के अनुरूप वर्णित दंड तथा स्वर्ग लोक की आभा मनुष्य को सदाचार के मार्ग पर चलने की नैतिक प्रेरणा देती है.

समस्त पावन धामों की जीवंत अनुकृतियां

इस परिसर का सबसे उल्लेखनीय पक्ष यह है कि यहां भारत के सुदूर कोनों में स्थित विख्यात तीर्थों की हूबहू अनुकृतियां तैयार की गई हैं. श्रद्धालु एक ही परिक्रमा में जगन्नाथ पुरी, केरल स्थित सबरीमाला अय्यप्पा स्वामी, काशी विश्वनाथ, केदारनाथ, बद्रीनाथ तथा बाबा अमरनाथ जैसे पवित्र धामों की प्रतिकृतियों के दर्शन कर सकते हैं. शारीरिक अक्षमता, बढ़ती उम्र अथवा समय की कमी के कारण जो भक्त हिमालयी चोटियों या दूरदराज के क्षेत्रों की कठिन यात्राएं करने में असमर्थ हैं, उनके लिए यह व्यवस्था अत्यंत सुगम साधन बनकर उभरी है. यहां एक ही दिन में संपूर्ण भारत के पावन तीर्थों की यात्रा का आध्यात्मिक संतोष प्राप्त किया जा सकता है.

आगमन, समय-सारणी और आगंतुकों के लिए तय शुल्क

हैदराबाद से सुरेंद्रपुरी की यात्रा बेहद सुगम है, जहां निजी वाहनों, टैक्सियों अथवा राज्य परिवहन निगम की बसों से सरलतापूर्वक पहुंचा जा सकता है. हैदराबाद के प्रमुख बस अड्डों से यादगिरिगुट्टा मार्ग के लिए नियमित अंतराल पर बसें संचालित होती हैं. कलाधामम में प्रवेश के लिए वयस्कों हेतु प्रति व्यक्ति 350 रुपये तथा 5 से 10 वर्ष की आयु वाले बच्चों के लिए 300 रुपये का टिकट निर्धारित है, जबकि 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों का प्रवेश पूरी तरह निशुल्क रखा गया है. यह पार्क रोजाना सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक खुला रहता है, हालांकि टिकट खिड़की शाम 5:30 बजे बंद कर दी जाती है. परिसर में स्वच्छ पेयजल, प्रसाधन और खानपान की समुचित व्यवस्था मौजूद है, जिससे यह स्थल परिवारों और अध्ययन दलों के लिए ज्ञानवर्धक भ्रमण केंद्र सिद्ध हो रहा है.

सवाल-जवाब

सुरेंद्रपुरी पौराणिक थीम पार्क कहां स्थित है?
यह पार्क तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से करीब 60 किलोमीटर दूर यादाद्री भुवनगिरि जिले में यादगिरिगुट्टा मंदिर की तलहटी में स्थित है.
इस कलाधामम का निर्माण किसने और क्यों कराया था?
इसका निर्माण समाजसेवी कुंडा सत्यनारायण ने अपने दिवंगत पुत्र सुरेंद्र की स्मृति में युवाओं को भारतीय सभ्यता और वैदिक परंपराओं से जोड़ने के लिए कराया था.
सुरेंद्रपुरी में प्रवेश टिकट की दरें क्या हैं?
वयस्कों के लिए प्रवेश शुल्क 350 रुपये और 5 से 10 वर्ष तक के बच्चों के लिए 300 रुपये है, जबकि 5 वर्ष से छोटे बच्चों का प्रवेश निशुल्क है.
कलाधामम के खुलने और टिकट काउंटर का समय क्या है?
यह परिसर रोजाना सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक खुला रहता है, और टिकट काउंटर शाम 5:30 बजे तक संचालित होता है.
परिसर में मुख्य आकर्षण क्या हैं?
मुख्य आकर्षणों में भगवान हनुमान की 101 फीट ऊंची पंचमुखी प्रतिमा, विभिन्न पौराणिक लोक, रामायण-महाभारत की झांकियां और केदारनाथ, सबरीमाला व काशी विश्वनाथ जैसे तीर्थों की प्रतिकृतियां शामिल हैं.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp