भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को निकट से जानने के इच्छुक श्रद्धालुओं के लिए तेलंगाना का यादाद्री भुवनगिरि जिला एक विशेष गंतव्य बन चुका है. राजधानी हैदराबाद से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी तय करके यादगिरिगुट्टा मंदिर के तलहटी क्षेत्र में पहुंचा जा सकता है, जहां सुरेंद्रपुरी पौराणिक थीम पार्क स्थित है. कुंडा सत्यनारायण कलाधामम के नाम से प्रसिद्ध यह विस्तृत स्थल देश के पहले ऐसे पार्क के रूप में पहचान रखता है, जिसका पूरा ढांचा प्राचीन धर्मग्रंथों, वेदों तथा महाकाव्यों की कथाओं को शिल्पकला के माध्यम से साकार करने पर केंद्रित है.
पुत्र की स्मृति में हुआ था इस अनूठे कलाधाम का सृजन
इस अनूठे कलाधामम की नींव समाजसेवी कुंडा सत्यनारायण ने रखी थी, जिन्होंने अपने दिवंगत पुत्र सुरेंद्र की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के उद्देश्य से इसका निर्माण कराया. उनका मुख्य ध्येय आधुनिक पीढ़ी तथा युवाओं को देश के प्राचीन सांस्कृतिक मूल्यों, वैदिक धरोहर और आध्यात्मिक जड़ों से सहज रूप में जोड़ना रहा है. आज के व्यस्त दौर में यह परिसर पारिवारिक आगंतुकों को अपनी पौराणिक जड़ों से रूबरू कराने का उत्तम माध्यम उपलब्ध कराता है. लगभग तीन किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग पर फैला यह परिसर आगंतुकों का स्वागत भगवान हनुमान की 101 फीट ऊंची भव्य पंचमुखी प्रतिमा के साथ करता है, जो अपनी विशालता के कारण काफी दूरी से ही दृष्टिगोचर हो जाती है.
शिल्पकला में साकार हुए महाकाव्यों के प्रसंग और अलौकिक लोक
परिसर के भीतरी भाग में रामायण एवं महाभारत के कालजयी आख्यानों को अत्यंत सधे हुए शिल्प में ढाला गया है. कुरुक्षेत्र के समरांगण में अर्जुन को गीता का ज्ञान देते श्रीकृष्ण, माता सीता का हरण तथा लंका दहन जैसे ऐतिहासिक अध्यायों को आदमकद शिल्पों के रूप में प्रस्तुत किया गया है. इन कलाकृतियों में शारीरिक भाव-भंगिमाएं स्पष्ट रूप से झलकती हैं. इसके अतिरिक्त प्राचीन मान्यताओं में वर्णित स्वर्ग लोक, पाताल लोक, नाग लोक तथा नरक लोक की संकल्पना को कृत्रिम गुफाओं के भीतर साकार किया गया है. नरक लोक में विभिन्न कर्मों के अनुरूप वर्णित दंड तथा स्वर्ग लोक की आभा मनुष्य को सदाचार के मार्ग पर चलने की नैतिक प्रेरणा देती है.
समस्त पावन धामों की जीवंत अनुकृतियां
इस परिसर का सबसे उल्लेखनीय पक्ष यह है कि यहां भारत के सुदूर कोनों में स्थित विख्यात तीर्थों की हूबहू अनुकृतियां तैयार की गई हैं. श्रद्धालु एक ही परिक्रमा में जगन्नाथ पुरी, केरल स्थित सबरीमाला अय्यप्पा स्वामी, काशी विश्वनाथ, केदारनाथ, बद्रीनाथ तथा बाबा अमरनाथ जैसे पवित्र धामों की प्रतिकृतियों के दर्शन कर सकते हैं. शारीरिक अक्षमता, बढ़ती उम्र अथवा समय की कमी के कारण जो भक्त हिमालयी चोटियों या दूरदराज के क्षेत्रों की कठिन यात्राएं करने में असमर्थ हैं, उनके लिए यह व्यवस्था अत्यंत सुगम साधन बनकर उभरी है. यहां एक ही दिन में संपूर्ण भारत के पावन तीर्थों की यात्रा का आध्यात्मिक संतोष प्राप्त किया जा सकता है.
आगमन, समय-सारणी और आगंतुकों के लिए तय शुल्क
हैदराबाद से सुरेंद्रपुरी की यात्रा बेहद सुगम है, जहां निजी वाहनों, टैक्सियों अथवा राज्य परिवहन निगम की बसों से सरलतापूर्वक पहुंचा जा सकता है. हैदराबाद के प्रमुख बस अड्डों से यादगिरिगुट्टा मार्ग के लिए नियमित अंतराल पर बसें संचालित होती हैं. कलाधामम में प्रवेश के लिए वयस्कों हेतु प्रति व्यक्ति 350 रुपये तथा 5 से 10 वर्ष की आयु वाले बच्चों के लिए 300 रुपये का टिकट निर्धारित है, जबकि 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों का प्रवेश पूरी तरह निशुल्क रखा गया है. यह पार्क रोजाना सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक खुला रहता है, हालांकि टिकट खिड़की शाम 5:30 बजे बंद कर दी जाती है. परिसर में स्वच्छ पेयजल, प्रसाधन और खानपान की समुचित व्यवस्था मौजूद है, जिससे यह स्थल परिवारों और अध्ययन दलों के लिए ज्ञानवर्धक भ्रमण केंद्र सिद्ध हो रहा है.



















