सावन महीने की शुरुआत के साथ ही सूर्यनगरी जोधपुर में हर-हर महादेव की गूंज सुनाई देने लगी है। पवित्र मास के पहले सोमवार के अवसर पर तखत सागर क्षेत्र की ऊंची पहाड़ियों में स्थित सिद्धनाथ महादेव दादा दरबार में तड़के ब्रह्ममुहूर्त से ही भक्तों का भारी जमावड़ा शुरू हो गया। भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और 'ॐ नमः शिवाय' के उद्घोष के साथ पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस पावन अवसर पर मंदिर में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और बेलपत्र चढ़ाने के लिए भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं, जिससे समूचा धाम अध्यात्म के माहौल में डूब गया।
800 वर्ष पुराना इतिहास और तपोस्थली का महत्व
यह प्राचीन धाम न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि इसका अपना ऐतिहासिक और आध्यात्मिक गौरव भी है। लगभग आठ शताब्दी पुराने इस सिद्धनाथ महादेव दादा दरबार को पूज्य नारायण स्वामी जी तथा नेपाली दादाजी की पवित्र तपोस्थली के रूप में भी पूजा जाता है। स्थानीय और दूर-दराज से आने वाले लोगों के लिए सावन का यह पहला सोमवार विशेष पावन अवसर लेकर आता है। मान्यता है कि इस पावन धाम में भोलेनाथ का रुद्राभिषेक करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और परिवारों में सुख, समृद्धि तथा आरोग्यता का वास होता है। दिनभर चलने वाले भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों से यहां आने वाले हर व्यक्ति को आत्मिक शांति का अहसास हो रहा है।
मौनी नेपाली बाबा द्वारा निर्मित 355 सीढ़ियों का कठिन सफर
ऊंची पहाड़ी पर स्थित होने के कारण सिद्धनाथ धाम तक पहुंचना आसान नहीं है। यहां तक आने के लिए श्रद्धालुओं को कुल 355 सीढ़ियों का रास्ता तय करना पड़ता है। हालांकि, भगवान भोलेनाथ के प्रति अटूट निष्ठा के चलते यह चढ़ाई भक्तों के उत्साह को डिगा नहीं पाती। इन 355 सीढ़ियों का निर्माण संत मौनी नेपाली बाबा ने अपने कठिन परिश्रम और तपस्या से कराया था। आज भी दूर-दूर से आने वाले भक्त इसी पारंपरिक मार्ग से होकर दादा दरबार पहुंचते हैं और अपनी मन्नतें मांगते हैं। केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के विश्राम के लिए संत निवास, भोजन की व्यवस्था के लिए भोजनशाला और गौ सेवा हेतु गौशाला का संचालन भी किया जा रहा है, जो यहां आने वाले लोगों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र है।
मंदिर प्रबंधन के विशेष इंतजाम और सुचारू व्यवस्था
सावन के प्रथम सोमवार पर उमड़ने वाले भारी जनसैलाब को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रबंधन की ओर से विशेष तैयारियां की गई थीं। भक्तों की सुरक्षा और सुविधा के लिए पूरे परिसर में उचित बैरिकेडिंग लगाई गई थी, ताकि कतारें व्यवस्थित रहें। इसके साथ ही पेयजल की पर्याप्त आपूर्ति, तत्काल चिकित्सा सहायता और प्रसाद वितरण के विशेष प्रबंध किए गए थे। सुबह से लेकर देर शाम तक दर्शनार्थियों का सिलसिला बिना रुके चलता रहा। भक्ति रस में डूबे इस माहौल और गूंजते जयकारों ने यह सिद्ध कर दिया कि जोधपुर में सावन के पहले सोमवार का दिन केवल एक तिथि नहीं, बल्कि आस्था और अध्यात्म का एक भव्य उत्सव बन चुका है।


















