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सावन के पहले सोमवार चित्रकूट में उमड़ा आस्था का सैलाब, चार युगों के शिवलिंगों वाले मंदिर में जलाभिषेकधर्म
3 अग॰ 2026, 12:28 pm (46 दिन पहले)· 0

सावन के पहले सोमवार चित्रकूट में उमड़ा आस्था का सैलाब, चार युगों के शिवलिंगों वाले मंदिर में जलाभिषेक

सावन के पहले सोमवार चित्रकूट के राजा मतगजेंद्रनाथ मंदिर में मंदाकिनी नदी के जल से भगवान शिव का जलाभिषेक करने लाखों श्रद्धालु पहुंचे, जिस मंदिर से प्रभु राम के वनवास की कथा जुड़ी है.

सावन के पहले सोमवार को धर्मनगरी चित्रकूट के प्रसिद्ध राजा मतगजेंद्रनाथ मंदिर में तड़के से ही भक्तों की भारी भीड़ जुट गई. हर-हर महादेव के जयकारों के बीच शिवभक्तों ने मंदाकिनी नदी के पवित्र जल से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया और परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली की कामना की.

मंदाकिनी में स्नान के बाद पैदल यात्रा

भीड़ का सिलसिला सबसे पहले रामघाट पर देखने को मिला, जहां लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र मंदाकिनी नदी में डुबकी लगाई. स्नान करने के बाद भक्तों ने कलश और अन्य पात्रों में मंदाकिनी का जल भरा और पैदल चलकर राजा मतगजेंद्रनाथ मंदिर पहुंचे. मंदिर पहुंचते ही उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हुए भगवान शिव पर जल चढ़ाया.

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राजा मतगजेंद्रनाथ से जुड़ी है प्रभु राम की कथा

इस मंदिर की मान्यता सीधे भगवान श्रीराम के वनवास काल से जुड़ी है. कहा जाता है कि जब श्रीराम वनवास के दौरान चित्रकूट पहुंचे थे, तो उन्होंने यहां के राजा मतगजेंद्रनाथ से ही अनुमति लेकर करीब साढ़े ग्यारह वर्ष तक इस भूमि पर निवास किया था. मान्यता यह भी है कि श्रीराम ने इसी मंदिर में भगवान शिव की आराधना की और खुद यहां शिव प्रतिमा की स्थापना भी करवाई थी. पौराणिक कथाओं के मुताबिक वनवास के छठवें दिन ही श्रीराम ने यहां पहला पाषाण शिवलिंग स्थापित कर पूजा की थी, जबकि इसके करीब 14 साल बाद लंका विजय से पहले उन्होंने रामेश्वरम में रामलिंगम और विश्वलिंगम की स्थापना की थी. इसी वजह से चित्रकूट के इस मंदिर का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है.

एक ही गर्भगृह में चार युगों के शिवलिंग

मंदिर की सबसे खास बात इसका गर्भगृह है, जहां एक ही स्थान पर चार अलग-अलग शिवलिंग चतुर्लिंग स्वरूप में विराजमान हैं. देशभर में ऐसा स्वरूप बेहद कम मंदिरों में देखने को मिलता है, क्योंकि आमतौर पर एक गर्भगृह में एक ही शिवलिंग होता है. यहां चारों शिवलिंग एक ही पीठ पर स्थापित हैं, जो इस मंदिर को बाकी शिवालयों से अलग पहचान देता है. मंदिर के पुजारी मोहित दास ने बताया कि गर्भगृह में मौजूद ये चारों शिवलिंग क्रमशः सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलियुग का प्रतिनिधित्व करते हैं, और इनका आकार भी चारों युगों के क्रम के हिसाब से अलग-अलग रखा गया है. उन्होंने यह भी बताया कि इसी मंदिर में औरंगजेब ने मूर्ति को खंडित करने का काम किया था.

भारी भीड़ के बीच चाक-चौबंद सुरक्षा

सावन के पहले सोमवार पर उमड़ी इस भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं. मंदिर परिसर में पुलिस बल तैनात किया गया है और बैरिकेडिंग लगाकर भक्तों को लाइन में दर्शन और जलाभिषेक की सुविधा दी जा रही है. स्थानीय मान्यता है कि जो भी सच्चे मन से चित्रकूट के राजा मतगजेंद्रनाथ की पूजा करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है. इसी आस्था के साथ आज लाखों की संख्या में भक्त यहां पहुंचे और भगवान शिव को जल चढ़ाने के लिए लंबी कतारों में अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए.

सवाल-जवाब

राजा मतगजेंद्रनाथ मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर धर्मनगरी चित्रकूट में स्थित है.
सावन के पहले सोमवार को मंदिर में क्या हुआ?
लाखों श्रद्धालुओं ने रामघाट पर मंदाकिनी नदी में स्नान किया और फिर मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया.
इस मंदिर का प्रभु राम से क्या संबंध है?
मान्यता है कि वनवास के दौरान राजा मतगजेंद्रनाथ से अनुमति लेकर श्रीराम यहां करीब साढ़े ग्यारह साल रहे और यहीं पहला पाषाण शिवलिंग स्थापित किया था.
मंदिर के गर्भगृह की क्या खासियत है?
यहां एक ही पीठ पर चार स्वतंत्र शिवलिंग चतुर्लिंग स्वरूप में विराजमान हैं, जो देश के दुर्लभ मंदिरों में गिना जाता है.
चारों शिवलिंग किसका प्रतिनिधित्व करते हैं?
पुजारी मोहित दास के अनुसार ये चारों शिवलिंग क्रमशः सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलियुग का प्रतिनिधित्व करते हैं और इनका आकार भी अलग-अलग है.
मंदिर में सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं?
पुलिस बल तैनात कर बैरिकेडिंग लगाई गई है ताकि भक्त कतार में लगकर दर्शन और जलाभिषेक कर सकें.
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