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साल की सबसे बड़ी एकादशी पर ये पांच चीजें दान करना देता है अक्षय पुण्य, जान लें देने का सही समयधर्म
24 जून 2026, 11:42 am (127 दिन पहले)· 3

साल की सबसे बड़ी एकादशी पर ये पांच चीजें दान करना देता है अक्षय पुण्य, जान लें देने का सही समय

बिना अन्न और जल के रखे जाने वाले इस कठोर व्रत में दान का महत्व व्रत जितना ही बताया गया है। जानिए कौन सी पांच चीजें दान करना सबसे शुभ है और किन मुहूर्तों में देना सबसे फलदायी रहेगा।

गर्मी की चिलचिलाती धूप में पड़ने वाली निर्जला एकादशी को साल भर की एकादशियों में सबसे कठिन और सबसे बड़ी माना गया है। इस दिन भक्त न तो अन्न ग्रहण करते हैं और न ही जल की एक बूंद पीते हैं। व्रत का नियम सूर्योदय से शुरू होकर अगले दिन के सूर्योदय तक चलता है, और इस पूरे समय में पानी तक नहीं पिया जाता। मान्यता है कि इस एक व्रत को पूरे विधि-विधान से रखने भर से साल की सभी एकादशियों के व्रत के बराबर पुण्य एक साथ मिल जाता है। खास बात यह है कि इस दिन व्रत जितना ही महत्व दान का भी बताया गया है, और कहा जाता है कि निर्जला एकादशी पर किया गया दान कभी खत्म नहीं होने वाला पुण्य देता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस दिन क्या दान करें और किस समय दान करना सबसे अच्छा रहेगा।

निर्जला एकादशी पर ये चीजें करें दान

इस दिन दान की सूची में सबसे ऊपर जल से जुड़ी चीजें आती हैं, क्योंकि जब आप खुद प्यासे रहकर व्रत कर रहे हों तो दूसरों की प्यास बुझाना सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है।

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  1. पानी से भरा मिट्टी का घड़ा: निर्जला एकादशी पर सबसे ज्यादा महत्व जल दान का है। किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को मिट्टी का नया घड़ा भेंट करना शुभ माना जाता है। चाहें तो राहगीरों के लिए प्याऊ लगवा सकते हैं या उन्हें मीठा शरबत पिला सकते हैं।
  2. मौसमी फल: इस दिन फलों का दान भी बहुत पुण्यदायी कहा गया है। तरबूज, खरबूजा और आम जैसे मौसमी फल दान कर सकते हैं। माना जाता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि आती है।
  3. छाता और हाथ का पंखा: यह व्रत भीषण गर्मी में आता है, इसलिए जरूरतमंदों को छाता और हाथ वाला पंखा देना बेहद शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इससे भगवान विष्णु की असीम कृपा मिलती है।
  4. सत्तू, गुड़ और चना: इस एकादशी पर सत्तू, चने और गुड़ का दान पितृ दोष से मुक्ति दिलाता है और घर की समृद्धि बढ़ाता है।
  5. वस्त्र और जूता-चप्पल: राहगीरों को सूती कपड़े और चप्पल दान करना भी बड़े पुण्य का काम माना गया है। मान्यता है कि इससे ईश्वर की कृपा बरसती है।

दान का सही समय क्या है

वैसे तो दान करने का सिलसिला एकादशी के सूर्योदय से लेकर द्वादशी तिथि के पारण तक चलता रहता है, लेकिन अगर सबसे शुभ मुहूर्त में दान करना चाहते हैं तो इन समय का ध्यान रखें।

  • 25 जून को सुबह 05:25 बजे से सुबह 10:30 बजे तक
  • 25 जून को शाम 05:30 बजे से सूर्यास्त तक
  • 26 जून को सुबह 05:25 से 08:13 बजे के बीच

यहां दी गई जानकारी धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

सवाल-जवाब

निर्जला एकादशी का व्रत कैसा होता है?
यह बिना अन्न और जल के रखा जाने वाला कठोर व्रत है, जिसमें सूर्योदय से अगले दिन के सूर्योदय तक जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती।
इस व्रत को रखने से क्या फल मिलता है?
मान्यता है कि इसे नियम से रखने पर साल की सभी एकादशियों के व्रत के बराबर पुण्य एक साथ मिल जाता है।
निर्जला एकादशी पर सबसे शुभ दान क्या माना गया है?
जल दान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसमें ब्राह्मण या जरूरतमंद को पानी से भरा मिट्टी का नया घड़ा भेंट किया जाता है।
इस दिन कौन-कौन सी चीजें दान कर सकते हैं?
पानी से भरा मिट्टी का घड़ा, तरबूज-खरबूजा-आम जैसे मौसमी फल, छाता और हाथ का पंखा, सत्तू-गुड़-चना तथा सूती कपड़े और चप्पल दान किए जा सकते हैं।
सत्तू, गुड़ और चना दान करने का क्या लाभ बताया गया है?
कहा जाता है कि इनका दान पितृ दोष से मुक्ति दिलाता है और घर की सुख-समृद्धि बढ़ाता है।
दान करने का सही मुहूर्त क्या है?
25 जून को सुबह 05:25 से 10:30 बजे, 25 जून शाम 05:30 से सूर्यास्त तक और 26 जून सुबह 05:25 से 08:13 बजे के बीच दान करना सबसे शुभ माना गया है।
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