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कोडरमा के झुमरी तिलैया में इस्कॉन ने रचा इतिहास, भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा में टूटे भीड़ के सारे रिकॉर्डधर्म
2 दिन पहले· 2

कोडरमा के झुमरी तिलैया में इस्कॉन ने रचा इतिहास, भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा में टूटे भीड़ के सारे रिकॉर्ड

कोडरमा के झुमरी तिलैया में इस्कॉन द्वारा पहली बार आयोजित भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। बारिश के बावजूद भक्तों का उत्साह चरम पर रहा और स्थानीय निवासियों ने इस ऐतिहासिक आयोजन को जिले के धार्मिक सफर का एक नया अध्याय बताया है।

कोडरमा के झुमरी तिलैया में उस समय एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक अध्याय की शुरुआत हुई, जब इस्कॉन के मार्गदर्शन में पहली बार भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा का आयोजन किया गया। इस अभूतपूर्व धार्मिक अनुष्ठान ने पूरे शहर को एक गहरी भक्ति के सागर में डुबो दिया। मुख्य आकर्षण वह अत्यंत सुंदर और भव्य रूप से सुसज्जित रथ था, जिस पर ब्रह्मांड के नाथ भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा विराजमान थे। अपने आराध्य की एक झलक पाने और उनके दिव्य स्वरूप के दर्शन करने के लिए पूरे यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। यह केवल एक यात्रा नहीं थी, बल्कि स्थानीय लोगों की वर्षों की आध्यात्मिक आकांक्षाओं का प्रकटीकरण था, जिसने शहर के चप्पे चप्पे को पवित्र कर दिया।

सुभाष चौक से मौसीबाड़ी तक का पावन सफर

इस पवित्र रथ यात्रा का विधिवत शुभारंभ शहर के प्रमुख सुभाष चौक से हुआ। इस अत्यंत पावन अवसर पर कोडरमा क्षेत्र की विधायक डॉ. नीरा यादव ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने भगवान जगन्नाथ के समक्ष शीश नवाकर उनका विशेष आशीर्वाद प्राप्त किया और इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनीं। सुभाष चौक से शुरू होने के बाद, यह विशाल शोभायात्रा कोडरमा रेलवे स्टेशन और झंडा चौक जैसे प्रमुख मार्गों से होते हुए गुजरी। यात्रा का अंतिम पड़ाव महाराणा प्रताप चौक स्थित संकट मोचन मंदिर था, जिसे पारंपरिक रूप से मौसीबाड़ी का स्वरूप दिया गया था। मौसीबाड़ी पहुंचने पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का अत्यंत भव्य और विशेष स्वागत किया गया।

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बारिश की फुहारें भी नहीं डिगा पाईं भक्तों का संकल्प

रथ यात्रा के दौरान आसमान से बारिश की फुहारें भी गिरने लगीं, लेकिन मौसम का यह बदलाव भी भगवान जगन्नाथ के भक्तों के अटूट उत्साह और जोश में कोई कमी नहीं ला सका। पूरे रास्ते में श्रद्धालुओं के बीच भगवान के रथ की पवित्र रस्सी को छूने और उसे खींचने की एक अद्भुत होड़ मची रही। समाज के हर वर्ग, जैसे महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और यहां तक कि छोटे बच्चों ने भी पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ रथ की रस्सियों को अपने हाथों में थामा। बारिश के बीच भी, भक्त पूरे जोश के साथ रथ के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते रहे। पूरे शहर का वातावरण जय जगन्नाथ और हरि बोल के गगनभेदी जयघोष से गूंजता रहा। भजन, कीर्तन और संकीर्तन की धुन पर झूमते श्रद्धालु भगवान की भक्ति में पूरी तरह से सराबोर नजर आए।

सनातन संस्कृति का प्रसार और इस्कॉन का विजन

इस ऐतिहासिक आयोजन के पीछे इस्कॉन के पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों की कड़ी मेहनत थी। इस्कॉन के प्रतिनिधियों ने बताया कि झुमरी तिलैया में पहली बार इस भव्य रथ यात्रा को आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य भगवान जगन्नाथ की असीम भक्ति और महान सनातन संस्कृति के पावन संदेश को समाज के हर व्यक्ति तक पहुंचाना है। इस विशाल आयोजन को सफल बनाने में बड़ी संख्या में जुड़े स्वयंसेवकों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार, पहली बार आयोजित हुई इस भव्य रथ यात्रा ने जिले के धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास में एक बिल्कुल नया और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया है। इस आयोजन को पूरी तरह से अविस्मरणीय बताते हुए, शहरवासियों ने यह प्रबल कामना व्यक्त की है कि भविष्य में भी हर वर्ष इसी तरह की रथ यात्रा का आयोजन होता रहे।

श्रद्धालुओं ने साझा की अपनी अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति

इस महाआयोजन में हिस्सा लेने वाले श्रद्धालुओं के व्यक्तिगत अनुभव भी बेहद भावपूर्ण रहे। रथ यात्रा में शामिल हुए 70 वर्षीय बुजुर्ग भक्त विजय पांडेय ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि कोडरमा में हर वर्ष एक भव्य कांवड़ पदयात्रा का भी आयोजन होता है, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं, लेकिन इस बार भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में जिस प्रकार से अपार जनसैलाब उमड़ा है, उसने भीड़ और श्रद्धा का एक बिल्कुल नया रिकॉर्ड स्थापित कर दिया है। वहीं, स्थानीय निवासी रामानुज सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आज आयोजित हुई इस भव्य रथ यात्रा ने समाज में सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक जागृति का एक अत्यंत सशक्त संदेश प्रेषित किया है। उनका मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की स्वतः स्फूर्त भागीदारी यह स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि आधुनिक समाज में भी धार्मिक आस्था और एकता की भावना लगातार मजबूत हो रही है।

भीड़ के बावजूद मिला रथ खींचने का सौभाग्य

इस अद्भुत यात्रा में शामिल एक अन्य श्रद्धालु सुमन रानी ने अपनी खुशी और कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि जब वे वहां पहुंचीं, तो शुरुआत में वहां मौजूद अपार भीड़ को देखकर उन्हें ऐसा लगा था कि शायद वे भगवान के रथ तक पहुंच ही नहीं पाएंगी। लेकिन उनका मानना है कि यह सीधे तौर पर भगवान की ही विशेष कृपा थी कि उन्हें आगे बढ़ने और पवित्र रथ को खींचने का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने पूरी श्रद्धा और असीम भक्ति के साथ रथ की रस्सी खींचकर स्वयं को अत्यंत धन्य महसूस किया। इस पवित्र और आध्यात्मिक कार्य में सुमन रानी अकेले नहीं थीं, बल्कि उनके साथ उनके पति अनिल कुमार ने भी रथ की रस्सी खींचकर भगवान जगन्नाथ का विशेष आशीर्वाद प्राप्त किया, जो उनके परिवार के लिए एक अद्भुत पल बन गया।

सवाल-जवाब

झुमरी तिलैया में रथ यात्रा का आयोजन किसने किया?
झुमरी तिलैया में इस भव्य रथ यात्रा का आयोजन पहली बार इस्कॉन द्वारा किया गया।
रथ यात्रा में कौन से देवी-देवता विराजमान थे?
भव्य रथ पर भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा विराजमान थे।
रथ यात्रा का मार्ग क्या था?
यह रथ यात्रा सुभाष चौक से शुरू होकर कोडरमा स्टेशन और झंडा चौक होते हुए महाराणा प्रताप चौक स्थित मौसीबाड़ी तक पहुंची।
इस आयोजन में किस प्रमुख राजनीतिक हस्ती ने हिस्सा लिया?
कोडरमा की विधायक डॉ. नीरा यादव ने इस रथ यात्रा में शामिल होकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद लिया।
खराब मौसम का रथ यात्रा पर क्या असर पड़ा?
रथ यात्रा के दौरान बारिश हुई, लेकिन इससे श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आई और उन्होंने पूरे जोश के साथ रथ खींचा।
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