स्वतंत्रता दिवस भाषण पर अरविंद केजरीवाल का बड़ा हमला, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन को बताया घबराया हुआदेश के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़े सुधार की तैयारी, केंद्र सरकार ने जारी किए नए लाइसेंसिंग और सुरक्षा नियमगॉल टेस्ट में चमके ऋषभ पंत, विदेशी सरजमीं पर सबसे ज्यादा छक्के जड़ने वाले बने नंबर-1 विकेटकीपरडिज्नी के D23 इवेंट में जुटोपिया 3 पर लगी मुहर, एनीमेशन सीरीज में होगी पक्षियों की नई एंट्रीउत्तर प्रदेश में बाइक पर ओवरलोडिंग को लेकर अखिलेश यादव ने जताई चिंता, लोगों से की सुरक्षित रहने की अपीलबलूच नेतृत्व ने डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग को भेजी गंभीर चिट्ठी, सुराब एयरस्ट्राइक के बाद अमेरिकी और चीनी हथियारों की सप्लाई रोकने की मांगगुजरात के सुल्तानाबाद में फार्महाउस शराब पार्टी पर छापा, 8 महिलाओं सहित 22 लोग हिरासत मेंशकुन शास्त्र के अनुसार सिर पर कौवा बैठना किस बात का संकेत माना जाता हैपिक्सार ने कोको 2 की पहली झलक दिखाई, 2029 में मिगुएल की आफ्टरलाइफ में होगी वापसीकोरापुट में अल्बिना गराडा की हत्या कर आंध्र प्रदेश में दफनाया शव, मोबाइल लोकेशन से खुला राज
मध्य प्रदेश के खेगांव में 5 हजार साल प्राचीन धारेश्वर महादेव मंदिर, जहां सावन में नटेश्वर रूप के दर्शन को जुटते हैं चार राज्यों के श्रद्धालुधर्म
7 अग॰ 2026, 10:32 pm (8 दिन पहले)· 0

मध्य प्रदेश के खेगांव में 5 हजार साल प्राचीन धारेश्वर महादेव मंदिर, जहां सावन में नटेश्वर रूप के दर्शन को जुटते हैं चार राज्यों के श्रद्धालु

मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में नर्मदा किनारे स्थित धारेश्वर महादेव मंदिर में सावन महीने के दौरान भारी संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं। करीब 5 हजार साल पुराने इस धाम में भगवान शिव के दुर्लभ नटेश्वर यानी अर्धनारीश्वर रूप की पूजा की जाती है।

पवित्र सावन माह के दौरान शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के खेगांव में नर्मदा नदी के तट पर स्थित धारेश्वर महादेव मंदिर में इन दिनों भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। यह प्राचीन मंदिर भगवान शिव के अत्यंत दुर्लभ नटेश्वर स्वरूप के लिए जाना जाता है, जिन्हें अर्धनारीश्वर रूप भी कहा जाता है। सावन के पूरे महीने, विशेषकर सोमवार को, यहां सुबह से लेकर देर रात तक दर्शन और पूजन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगती हैं।

दारुक की तपस्या और 5 हजार साल पुराना पौराणिक इतिहास

धारेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह धाम लगभग 5 हजार साल पुराना है। पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि भगवान श्रीकृष्ण के सारथी दारुक को माता पार्वती द्वारा दिए गए एक श्राप के कारण धरती यानी मृत्युलोक में जन्म लेना पड़ा था। अल्पायु में ही दारुक ने गृहस्थ जीवन का त्याग कर दिया और नर्मदा परिक्रमा का संकल्प लेकर यात्रा पर निकल पड़े।

ये भी पढ़ें

परिक्रमा पूर्ण करने के पश्चात दारुक खेगांव पहुंचे, जहां उन्होंने नर्मदा तट पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या आरंभ की। उनकी अटूट भक्ति और कठिन तप से प्रसन्न होकर महादेव स्वयं उनके समक्ष नटेश्वर यानी अर्धनारीश्वर रूप में प्रकट हुए। जब दारुक को भगवान के साक्षात दर्शन हुए, तब उन्होंने विनम्र भाव से प्रार्थना की कि प्रभु सदैव इसी स्थान पर इसी स्वरूप में विराजमान रहें ताकि भविष्य में आने वाली पीढ़ियां भी उनके दर्शन कर कृपा प्राप्त कर सकें। भगवान शिव ने भक्त दारुक की यह प्रार्थना स्वीकार कर ली और तब से वे यहीं स्थापित हैं। इसी पौराणिक घटना के कारण इस तीर्थ क्षेत्र को दारुकेश्वर के नाम से भी प्रसिद्धि मिली।

चार राज्यों से पहुंचते हैं श्रद्धालु और चढ़ता है नर्मदा जल

सावन का महीना शुरू होते ही धारेश्वर महादेव मंदिर में धार्मिक गतिविधियों की रौनक बढ़ जाती है। यहां केवल मध्य प्रदेश के स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ के दर्शन करने आते हैं।

सावन के प्रत्येक सोमवार को यहां का दृश्य विशेष रूप से अलौकिक होता है। दूर-दराज के क्षेत्रों से कांवड़िया नर्मदा नदी का पवित्र जल लेकर पैदल यात्रा करते हुए मंदिर पहुंचते हैं और भगवान नटेश्वर पर जलाभिषेक करते हैं। ऐसी जनआस्था है कि जो भी भक्त इस पावन दरबार में सच्चे हृदय से अपनी मनोकामना मांगता है, भगवान भोलेनाथ उसकी हर मन्नत अवश्य पूरी करते हैं।

सावन सोमवार पर विशेष श्रृंगार, महाआरती और भंडारा

मंदिर के पुजारी कैलाश गिरी के अनुसार सावन के पवित्र महीने में प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव का भव्य और विशेष श्रृंगार किया जाता है। मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे सुगंधित पुष्पों से सजाया जाता है। दिनभर विशेष पूजा-अर्चना, मंत्रोच्चार और अभिषेक का दौर निरंतर चलता रहता है।

संध्या काल में मंदिर में भव्य महाआरती का आयोजन किया जाता है, जिसमें सैकड़ों भक्त एक साथ सम्मिलित होकर आरती का आनंद लेते हैं। इसके अतिरिक्त, दूर-दूर से आने वाले कांवड़ियों और यात्रियों की सुविधा के लिए मंदिर समिति द्वारा भंडारे का आयोजन भी किया जाता है, जहां श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाता है।

सवाल-जवाब

धारेश्वर महादेव मंदिर कहां स्थित है?
यह ऐतिहासिक मंदिर मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के खेगांव में पवित्र नर्मदा नदी के तट पर स्थित है।
धारेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव के किस स्वरूप की पूजा होती है?
इस मंदिर में भगवान शिव के दुर्लभ नटेश्वर स्वरूप यानी अर्धनारीश्वर अवतार की पूजा की जाती है।
धारेश्वर महादेव मंदिर का पौराणिक इतिहास क्या है?
मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के सारथी दारुक ने पार्वती माता के श्राप के बाद नर्मदा तट पर तपस्या की थी, जिसके बाद शिवजी ने नटेश्वर रूप में दर्शन दिए थे।
सावन के सोमवार को मंदिर में क्या विशेष आयोजन होते हैं?
सावन सोमवार पर भगवान शिव का विशेष पुष्प श्रृंगार, दिनभर पूजा-अभिषेक, शाम को महाआरती और श्रद्धालुओं के लिए भंडारा आयोजित किया जाता है।
इस मंदिर को दारुकेश्वर क्यों कहा जाता है?
भगवान श्रीकृष्ण के सारथी दारुक की प्रार्थना पर शिवजी ने यहां स्थायी रूप से निवास करने का वरदान दिया था, इसलिए इस स्थान को दारुकेश्वर भी कहा जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR