पवित्र सावन माह के दौरान शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के खेगांव में नर्मदा नदी के तट पर स्थित धारेश्वर महादेव मंदिर में इन दिनों भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। यह प्राचीन मंदिर भगवान शिव के अत्यंत दुर्लभ नटेश्वर स्वरूप के लिए जाना जाता है, जिन्हें अर्धनारीश्वर रूप भी कहा जाता है। सावन के पूरे महीने, विशेषकर सोमवार को, यहां सुबह से लेकर देर रात तक दर्शन और पूजन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगती हैं।
दारुक की तपस्या और 5 हजार साल पुराना पौराणिक इतिहास
धारेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह धाम लगभग 5 हजार साल पुराना है। पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि भगवान श्रीकृष्ण के सारथी दारुक को माता पार्वती द्वारा दिए गए एक श्राप के कारण धरती यानी मृत्युलोक में जन्म लेना पड़ा था। अल्पायु में ही दारुक ने गृहस्थ जीवन का त्याग कर दिया और नर्मदा परिक्रमा का संकल्प लेकर यात्रा पर निकल पड़े।
परिक्रमा पूर्ण करने के पश्चात दारुक खेगांव पहुंचे, जहां उन्होंने नर्मदा तट पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या आरंभ की। उनकी अटूट भक्ति और कठिन तप से प्रसन्न होकर महादेव स्वयं उनके समक्ष नटेश्वर यानी अर्धनारीश्वर रूप में प्रकट हुए। जब दारुक को भगवान के साक्षात दर्शन हुए, तब उन्होंने विनम्र भाव से प्रार्थना की कि प्रभु सदैव इसी स्थान पर इसी स्वरूप में विराजमान रहें ताकि भविष्य में आने वाली पीढ़ियां भी उनके दर्शन कर कृपा प्राप्त कर सकें। भगवान शिव ने भक्त दारुक की यह प्रार्थना स्वीकार कर ली और तब से वे यहीं स्थापित हैं। इसी पौराणिक घटना के कारण इस तीर्थ क्षेत्र को दारुकेश्वर के नाम से भी प्रसिद्धि मिली।
चार राज्यों से पहुंचते हैं श्रद्धालु और चढ़ता है नर्मदा जल
सावन का महीना शुरू होते ही धारेश्वर महादेव मंदिर में धार्मिक गतिविधियों की रौनक बढ़ जाती है। यहां केवल मध्य प्रदेश के स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ के दर्शन करने आते हैं।
सावन के प्रत्येक सोमवार को यहां का दृश्य विशेष रूप से अलौकिक होता है। दूर-दराज के क्षेत्रों से कांवड़िया नर्मदा नदी का पवित्र जल लेकर पैदल यात्रा करते हुए मंदिर पहुंचते हैं और भगवान नटेश्वर पर जलाभिषेक करते हैं। ऐसी जनआस्था है कि जो भी भक्त इस पावन दरबार में सच्चे हृदय से अपनी मनोकामना मांगता है, भगवान भोलेनाथ उसकी हर मन्नत अवश्य पूरी करते हैं।
सावन सोमवार पर विशेष श्रृंगार, महाआरती और भंडारा
मंदिर के पुजारी कैलाश गिरी के अनुसार सावन के पवित्र महीने में प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव का भव्य और विशेष श्रृंगार किया जाता है। मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे सुगंधित पुष्पों से सजाया जाता है। दिनभर विशेष पूजा-अर्चना, मंत्रोच्चार और अभिषेक का दौर निरंतर चलता रहता है।
संध्या काल में मंदिर में भव्य महाआरती का आयोजन किया जाता है, जिसमें सैकड़ों भक्त एक साथ सम्मिलित होकर आरती का आनंद लेते हैं। इसके अतिरिक्त, दूर-दूर से आने वाले कांवड़ियों और यात्रियों की सुविधा के लिए मंदिर समिति द्वारा भंडारे का आयोजन भी किया जाता है, जहां श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाता है।


















