धार्मिक नगरी उज्जैन में अवस्थित भगवान शिव के अनगिनत प्राचीन मंदिर दुनियाभर के शिव भक्तों के लिए अगाध श्रद्धा और आस्था का मुख्य केंद्र बने हुए हैं। महाकाल की इस पावन नगरी का प्रत्येक कोना शिव की दिव्य उपस्थिति से सराबोर माना जाता है। इन्हीं अलौकिक मंदिरों के बीच एक विशेष पहचान रखता है रामेश्वर महादेव मंदिर, जो अपनी अनोखी और अद्भुत धार्मिक मान्यताओं की वजह से पूरे भारत में जाना जाता है। यह पवित्र स्थान प्रसिद्ध माता हरसिद्धि मंदिर के ठीक पीछे तथा श्री महाकालेश्वर मंदिर से केवल 500 मीटर की दूरी पर स्थित है। इस पावन परिसर में स्थापित प्रत्येक शिवलिंग का अपना एक विशिष्ट आध्यात्मिक महत्व और गौरवशाली इतिहास है।
मंत्रोच्चार के साथ 160 डिग्री घूमने वाली अद्भुत मान्यता
इस ऐतिहासिक मंदिर की सबसे मुख्य विशेषता यहां प्रतिष्ठित दिव्य शिवलिंग है। स्थानीय मान्यताओं और दावों के अनुसार, जब मंदिर प्रांगण में पूर्ण विधि-विधान के साथ वेद मंत्रों का शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तब यह पवित्र शिवलिंग लगभग 160 डिग्री के कोण तक घूमता हुआ प्रतीत होता है। इस विहंगम और अलौकिक दृश्य को अपनी आंखों से देखने तथा महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां खिंचे चले आते हैं।
भगवान श्रीराम द्वारा स्थापना का ऐतिहासिक संदर्भ
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित विशाल लक्ष्मीकांत शुक्ला के अनुसार, रामेश्वर महादेव मंदिर की महिमा अत्यंत प्राचीन और चमत्कारिक मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार त्रेतायुग में अपने 14 वर्षों के वनवास काल के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ इस पवित्र स्थान पर पधारे थे। उसी समय प्रभु श्रीराम ने अपनी स्वयं की निष्ठा से इस दिव्य शिवलिंग की स्थापना की थी। इसी कारण इस मंदिर को रामेश्वर महादेव के नाम से पूजा जाता है। पुजारी का कहना है कि जब शास्त्रीय परंपराओं के अनुरूप यहां पूजा और आरती की जाती है, तब शिवलिंग के इस अद्भुत बदलाव का अनुभव श्रद्धालुओं को होता है।
स्कंद पुराण में उल्लेख और 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का पुण्य
रामेश्वर महादेव मंदिर की प्रामाणिकता और पौराणिक महत्ता का स्पष्ट उल्लेख सनातन धर्म के पवित्र ग्रंथ स्कंद पुराण में भी मिलता है। स्कंद पुराण में अंकित प्रसंगों के कारण इस स्थान की आध्यात्मिक प्रासंगिकता भक्तों के बीच और अधिक बढ़ जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस पावन शिवलिंग के श्रद्धापूर्वक दर्शन मात्र से ही भक्त को भारत में स्थित सभी 12 ज्योतिर्लिंगों (द्वादश ज्योतिर्लिंगों) के दर्शन के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति हो जाती है। जब इस शिवलिंग को विभिन्न दिशाओं में घुमाया जाता है, तब यह भक्तों को अलग-अलग ज्योतिर्लिंगों के दिव्य स्वरूप का आभास कराता है।
महाकाल वन क्षेत्र और श्रावण मास में जलाभिषेक की परंपरा
महाकाल वन क्षेत्र के अंतर्गत स्थित होने के कारण इस पावन धाम का प्रभाव और अधिक फलदायी माना जाता है। विशेष रूप से पवित्र श्रावण मास में इस मंदिर का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। श्रावण के महीने में दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु सबसे पहले पवित्र शिप्रा नदी में आस्था की डुबकी लगाते हैं और तत्पश्चात मंदिर पहुंचकर रामेश्वर महादेव का जलाभिषेक करते हैं। धार्मिक विश्वास है कि जो भी भक्त सच्चे मन से यहां आकर जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करता है, महादेव उसकी सभी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण करते हैं।



















