विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकालेश्वर की नगरी उज्जैन कई प्राचीन रहस्यों और धार्मिक मान्यताओं का केंद्र रही है। महाकाल मंदिर प्रांगण में स्थित प्राचीन कोटितीर्थ कुंड का अपना एक अद्वितीय आध्यात्मिक महत्व है। सदियों से भगवान महाकालेश्वर के पूजन, अभिषेक, मंगला आरती, भस्म आरती और पंचामृत अभिषेक के लिए इसी पवित्र कुंड के जल का प्रयोग किया जाता है। माना जाता है कि इस जल में देश भर के समस्त पवित्र तीर्थों और प्रमुख जलाशयों का पावन जल समाहित है, जिससे इसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है।
भगवान हनुमान और अयोध्या के यज्ञ से जुड़ी पौराणिक कहानी
कोटितीर्थ कुंड के निर्माण के पीछे एक विशेष पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। मान्यता के अनुसार, जब भगवान श्री राम ने युद्ध में विजय प्राप्त की, तब अयोध्या नगरी में एक महान यज्ञ का आयोजन किया गया था। इस यज्ञ को संपन्न करने के लिए भगवान हनुमान जी देश भर के सभी पवित्र जलाशयों और तीर्थों का जल लेकर निकले थे। अपनी यात्रा के अंत में वे अवंतिका नगरी यानी वर्तमान उज्जैन पहुंचे। यहां पहुंचकर उन्होंने अपने पास मौजूद समस्त पवित्र तीर्थों के जल को इसी कुंड में प्रवाहित कर दिया था।
सूर्यमुखी हनुमान जी की प्रतिमा देती है इस कथा का प्रमाण
इस पौराणिक घटना का प्रत्यक्ष प्रमाण महाकाल मंदिर परिसर में ही देखा जा सकता है। मंदिर प्रांगण में भगवान सूर्यमुखी हनुमान जी की एक अति प्राचीन प्रतिमा स्थापित है। इस दिव्य प्रतिमा में हनुमान जी के एक हाथ में जल का कलश और दूसरे हाथ में सोटा दिखाई देता है। श्रद्धालु इस स्वरूप को उसी ऐतिहासिक घटना का जीवंत साक्ष्य मानते हैं, जब हनुमान जी कलश में तीर्थों का जल लेकर यहां आए थे।
कोटितीर्थ कुंड के जल की विशेषताएं और धार्मिक लाभ
कोटितीर्थ कुंड को लेकर श्रद्धालुओं में अगाध विश्वास है। इस कुंड के जल से जुड़े प्रमुख पहलू और मान्यताएं निम्नलिखित हैं
- करोड़ों तीर्थों का पुण्य: धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस कुंड के जल से मात्र आचमन करने से भक्त को करोड़ों तीर्थ स्थलों के दर्शन और स्नान के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।
- रोग और कष्टों से मुक्ति: इस जल को औषधीय और चमत्कारी गुणों से युक्त माना जाता है। मान्यता है कि बाबा महाकाल के अभिषेक के बाद इस जल को ग्रहण करने या इसका छिड़काव करने से शारीरिक व्याधियां, दुख और परेशानियां दूर होती हैं।
- अक्षय जलधारा: यह प्राचीन कुंड अति प्राचीन काल से निरंतर भरा हुआ है और किसी भी विपरीत परिस्थिति या भीषण गर्मी में भी कभी नहीं सूखता है।
यही कारण है कि उज्जैन आने वाले लाखों श्रद्धालु कोटितीर्थ कुंड के दर्शन कर इसके पवित्र जल का आचमन करना अपनी साधना और यात्रा का मुख्य हिस्सा मानते हैं।



















