एकता कपूर जैसी मास्टरमाइंड शख्सियत नहीं देखी, तेजस्वी प्रकाश ने खोले मनोरंजन जगत की रानी के राजशहनाज गिल का वो भावुक गाना, जिसे सुन आज भी नम हो जाती हैं सिडनाज फैंस की आंखेंअयोध्या को दीपोत्सव से पहले मिलेगी दशरथ पथ की सौगात, 418 करोड़ से ज्यादा की लागत से तैयार हो रहा फोरलेनव्हाइट हाउस के नए मुख्य वकील होंगे विल शार्फ, डोनाल्ड ट्रंप ने किया प्रशासनिक फेरबदल का ऐलानप्रयागराज में माफिया अतीक अहमद के बेटे उमर के काफिले पर केस दर्ज, नवाबगंज टोल प्लाजा पर बैरियर तोड़ने का आरोपरामायण के ट्रेलर पर फिदा हुए नागार्जुन, रणबीर और यश की अदाओं की जमकर की प्रशंसाजब पंकज त्रिपाठी को पड़ी थीं लाठियां, कभी संजय दत्त के दीवाने थे ये दिग्गज अभिनेताराजनाथ सिंह ने महाराष्ट्र के नेताओं के साथ मिलकर की जवानों के लिए रक्तदान पहलनागौर के गुढ़ा जोधा में 450 साल पुरानी संत खेमदास महाराज की जीवित समाधि, आज भी अटूट है चमत्कारिक वचनों पर विश्वासअक्षय कुमार का 1994 का सुपरहिट गाना 'गोरे गोरे मुखड़े पे काला चश्मा', जिसमें कुमार सानू और अलका याज्ञनिक की आवाज ने मचाया था धमाल
महाकालेश्वर मंदिर के कोटितीर्थ कुंड का रहस्य, जानिए हनुमान जी से जुड़ी पावन कथाधर्म
9 अग॰ 2026, 1:29 pm (15 घंटे पहले)· 0

महाकालेश्वर मंदिर के कोटितीर्थ कुंड का रहस्य, जानिए हनुमान जी से जुड़ी पावन कथा

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर परिसर में स्थित कोटितीर्थ कुंड के पवित्र जल का उपयोग सदियों से भगवान महाकाल के पूजन और अभिषेक में किया जा रहा है, जिसका सीधा पौराणिक संबंध भगवान हनुमान से है।

विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकालेश्वर की नगरी उज्जैन कई प्राचीन रहस्यों और धार्मिक मान्यताओं का केंद्र रही है। महाकाल मंदिर प्रांगण में स्थित प्राचीन कोटितीर्थ कुंड का अपना एक अद्वितीय आध्यात्मिक महत्व है। सदियों से भगवान महाकालेश्वर के पूजन, अभिषेक, मंगला आरती, भस्म आरती और पंचामृत अभिषेक के लिए इसी पवित्र कुंड के जल का प्रयोग किया जाता है। माना जाता है कि इस जल में देश भर के समस्त पवित्र तीर्थों और प्रमुख जलाशयों का पावन जल समाहित है, जिससे इसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है।

भगवान हनुमान और अयोध्या के यज्ञ से जुड़ी पौराणिक कहानी

कोटितीर्थ कुंड के निर्माण के पीछे एक विशेष पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। मान्यता के अनुसार, जब भगवान श्री राम ने युद्ध में विजय प्राप्त की, तब अयोध्या नगरी में एक महान यज्ञ का आयोजन किया गया था। इस यज्ञ को संपन्न करने के लिए भगवान हनुमान जी देश भर के सभी पवित्र जलाशयों और तीर्थों का जल लेकर निकले थे। अपनी यात्रा के अंत में वे अवंतिका नगरी यानी वर्तमान उज्जैन पहुंचे। यहां पहुंचकर उन्होंने अपने पास मौजूद समस्त पवित्र तीर्थों के जल को इसी कुंड में प्रवाहित कर दिया था।

ये भी पढ़ें

सूर्यमुखी हनुमान जी की प्रतिमा देती है इस कथा का प्रमाण

इस पौराणिक घटना का प्रत्यक्ष प्रमाण महाकाल मंदिर परिसर में ही देखा जा सकता है। मंदिर प्रांगण में भगवान सूर्यमुखी हनुमान जी की एक अति प्राचीन प्रतिमा स्थापित है। इस दिव्य प्रतिमा में हनुमान जी के एक हाथ में जल का कलश और दूसरे हाथ में सोटा दिखाई देता है। श्रद्धालु इस स्वरूप को उसी ऐतिहासिक घटना का जीवंत साक्ष्य मानते हैं, जब हनुमान जी कलश में तीर्थों का जल लेकर यहां आए थे।

कोटितीर्थ कुंड के जल की विशेषताएं और धार्मिक लाभ

कोटितीर्थ कुंड को लेकर श्रद्धालुओं में अगाध विश्वास है। इस कुंड के जल से जुड़े प्रमुख पहलू और मान्यताएं निम्नलिखित हैं

  • करोड़ों तीर्थों का पुण्य: धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस कुंड के जल से मात्र आचमन करने से भक्त को करोड़ों तीर्थ स्थलों के दर्शन और स्नान के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।
  • रोग और कष्टों से मुक्ति: इस जल को औषधीय और चमत्कारी गुणों से युक्त माना जाता है। मान्यता है कि बाबा महाकाल के अभिषेक के बाद इस जल को ग्रहण करने या इसका छिड़काव करने से शारीरिक व्याधियां, दुख और परेशानियां दूर होती हैं।
  • अक्षय जलधारा: यह प्राचीन कुंड अति प्राचीन काल से निरंतर भरा हुआ है और किसी भी विपरीत परिस्थिति या भीषण गर्मी में भी कभी नहीं सूखता है।

यही कारण है कि उज्जैन आने वाले लाखों श्रद्धालु कोटितीर्थ कुंड के दर्शन कर इसके पवित्र जल का आचमन करना अपनी साधना और यात्रा का मुख्य हिस्सा मानते हैं।

सवाल-जवाब

कोटितीर्थ कुंड कहां स्थित है?
यह मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर परिसर के अंदर स्थित है।
महाकालेश्वर मंदिर में किस जल से भगवान महाकाल का अभिषेक होता है?
भगवान महाकालेश्वर की भस्म आरती, मंगला आरती और पंचामृत अभिषेक के लिए कोटितीर्थ कुंड के पवित्र जल का उपयोग किया जाता है।
कोटितीर्थ कुंड का हनुमान जी से क्या संबंध है?
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्री राम की विजय के बाद आयोजित यज्ञ के लिए हनुमान जी सभी तीर्थों से जल लाए थे और अवंतिका नगरी पहुंचकर उन्होंने उस जल को इस कुंड में डाला था।
कोटितीर्थ कुंड की कथा का प्रमाण मंदिर में किस रूप में मिलता है?
मंदिर परिसर में सूर्यमुखी हनुमान जी की प्रतिमा स्थित है, जिनके एक हाथ में कलश और दूसरे हाथ में सोटा है, जो इस पौराणिक कथा को प्रमाणित करती है।
कोटितीर्थ कुंड के जल की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?
मान्यता है कि इसमें औषधीय गुण हैं, यह कभी नहीं सूखता है और इसका आचमन करने से करोड़ों तीर्थों के दर्शन के समान पुण्य प्राप्त होता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR