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मॉनसून के खतरे ने अटकाई 19 हजार फीट की चढ़ाई, विशेषज्ञों ने श्रीखंड महादेव यात्रा-2026 को बताया असुरक्षितधर्म
25 जून 2026, 12:56 pm (44 दिन पहले)· 2

मॉनसून के खतरे ने अटकाई 19 हजार फीट की चढ़ाई, विशेषज्ञों ने श्रीखंड महादेव यात्रा-2026 को बताया असुरक्षित

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में श्रीखंड महादेव यात्रा-2026 के आयोजन पर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों की टीम ने भीमद्वारी से पार्वती बाग तक के रास्ते को बेहद जोखिमभरा बताते हुए इसे हाई रिस्क जोन घोषित करने की सिफारिश की है।

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में हर साल लाखों श्रद्धालुओं को 19 हजार फीट की ऊंचाई तक खींच लाने वाली श्रीखंड महादेव यात्रा इस बार होगी या नहीं, इस पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। यात्रा मार्ग की पड़ताल कर लौटी विशेषज्ञों की टीम ने रास्ते को मौजूदा हालात में बेहद खतरनाक बताया है, जिसके बाद प्रशासन भी यात्रा के आयोजन को लेकर फूंक-फूंककर कदम रख रहा है।

बुधवार को श्रीखंड महादेव यात्रा ट्रस्ट की एक अहम बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता ट्रस्ट के अध्यक्ष और कुल्लू के डीसी अनुराग चन्द्र शर्मा ने की। इस बैठक में हिमाचल प्रदेश मिल्कफेड के अध्यक्ष और ट्रस्ट के संस्थापक सदस्य बुद्धि सिंह ठाकुर समेत ट्रस्ट के कई सरकारी और गैर-सरकारी सदस्य वर्चुअल माध्यम से जुड़े। बैठक का मुख्य मुद्दा साल 2026 की प्रस्तावित यात्रा और रास्ते की सुरक्षा को लेकर तैयार विशेषज्ञों की रिपोर्ट रही।

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दो बार हुआ रास्ते का निरीक्षण

डीसी अनुराग चन्द्र शर्मा ने बताया कि यात्रा मार्ग का आंकलन करने के लिए एक संयुक्त टीम बनाई गई थी। इसमें राजस्व और वन विभाग के साथ-साथ मनाली स्थित अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण एवं संबद्ध खेल संस्थान (एबीवीमास) के विशेषज्ञ शामिल थे। इस टीम ने 8 जून और 18 जून को रास्ते का बारीकी से निरीक्षण किया और अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है। बैठक में स्की इंस्ट्रक्टर अंकुश कुमार और ट्रैकिंग गाइड गोपाल सिंह ने यह रिपोर्ट पेश की और कई अहम बातों की ओर ध्यान दिलाया।

भीमद्वारी से पार्वती बाग तक सबसे बड़ा खतरा

रिपोर्ट के मुताबिक भीमद्वारी से पार्वती बाग तक का इलाका इस वक्त सबसे ज्यादा संवेदनशील और जोखिमभरा है। टीम ने पाया कि यहां खड़ी ढलानें हैं, मिट्टी ढीली और अस्थिर है, रास्ते संकरे और फिसलन भरे हैं और बीच में कई नालों को पार करना पड़ता है। अब जब मॉनसून सीजन सिर पर है, तो खतरा और बढ़ जाता है। विशेषज्ञों ने भूस्खलन, चट्टानें गिरने, अचानक जलस्तर बढ़ने, फ्लैश फ्लड और मलबे के बहाव की आशंका जताई है।

संस्थान के विशेषज्ञ कई सालों से इस यात्रा से जुड़े रहे हैं और पार्वती बाग तथा आसपास के इलाके की भौगोलिक बनावट और ग्लेशियरों की गहरी जानकारी रखते हैं। अपने इसी अनुभव और ताजा निरीक्षण के आधार पर उन्होंने साफ कहा कि मौजूदा हालात में श्रीखंड महादेव यात्रा-2026 का आयोजन सुरक्षित नहीं माना जा सकता और इसकी सिफारिश नहीं की जा सकती।

वैकल्पिक रास्ता भी सुरक्षित नहीं

टीम ने अपनी पड़ताल में यह भी बताया कि भीमद्वारी और पार्वती बाग के बीच का मौजूदा रास्ता ही नहीं, बल्कि जो वैकल्पिक रास्ता सुझाया गया था, वह भी इन हालात में असुरक्षित है। रिपोर्ट में एक बड़ी चिंता यह भी जताई गई है कि किसी हादसे या आपदा की स्थिति में इस इलाके से राहत और बचाव का काम कर पाना बेहद मुश्किल होगा।

विशेषज्ञों ने भीमद्वारी के कैंपिंग एरिया को भी हाई रिस्क जोन करार दिया और कहा कि यहां फ्लैश फ्लड का खतरा बना रहता है। रिपोर्ट में बताया गया कि प्रभावित इलाके की जमीन ढीले पत्थरों और अस्थिर मिट्टी से बनी है, इसलिए यहां अस्थायी पुल, रस्सी का रास्ता या कोई और अस्थायी ढांचा बनाना भी न तो सुरक्षित है और न ही व्यावहारिक। टीम ने इस पूरे हिस्से को हाई रिस्क जोन घोषित करने की सिफारिश की है।

अंतिम फैसला अभी बाकी

डीसी ने कहा कि जिला प्रशासन और श्रीखंड महादेव यात्रा ट्रस्ट श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और मौजूदा हालात तथा रिपोर्ट को देखते हुए यात्रा का आयोजन जोखिमभरा होगा। उन्होंने ट्रस्ट के सदस्यों से कहा कि अगर इस रिपोर्ट पर उन्हें कोई आपत्ति है तो वे अपने लिखित सुझाव तहसीलदार को दें। इसके बाद ही सुरक्षा मानकों और सभी पहलुओं की गहन जांच कर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

बैठक में विशेषज्ञों ने यह सुझाव भी दिया कि भीमद्वारी से पार्वती बाग तक के संवेदनशील इलाके का विस्तृत भू-वैज्ञानिक अध्ययन भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) या किसी अन्य सक्षम संस्था से करवाया जाए। इससे इलाके की असल स्थिति का वैज्ञानिक आकलन हो सकेगा और आगे चलकर यात्रा को सुरक्षित तरीके से कराने के लिए दीर्घकालिक समाधान और बचाव के उपाय सुझाए जा सकेंगे।

कितनी कठिन है यह यात्रा

श्रीखंड महादेव यात्रा कुल्लू जिले के निरमंड से शुरू होती है। यह करीब 32 किलोमीटर लंबा ट्रैक है, जिसमें खड़ी पहाड़ी पर पैदल ही चढ़ाई करनी पड़ती है। बीच में खतरनाक रास्ते आते हैं और ग्लेशियर भी पार करने पड़ते हैं। हर साल यह यात्रा आधिकारिक तौर पर 10 जुलाई से 23 जुलाई तक आयोजित की जाती है। यहां 19 हजार फीट की ऊंचाई पर 75 फीट ऊंचा पत्थर का शिवलिंग है, जिसके दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। हालांकि यह यात्रा बेहद जोखिमभरी मानी जाती है।

सवाल-जवाब

क्या श्रीखंड महादेव यात्रा-2026 होगी?
इस पर अभी संशय है। विशेषज्ञों ने मौजूदा हालात में यात्रा को असुरक्षित बताया है और अंतिम फैसला सुरक्षा मानकों की जांच के बाद ही लिया जाएगा।
रास्ते का सबसे खतरनाक हिस्सा कौन सा है?
भीमद्वारी से पार्वती बाग तक का इलाका सबसे ज्यादा संवेदनशील और जोखिमभरा बताया गया है, जहां खड़ी ढलानें, ढीली मिट्टी और कई नाले हैं।
विशेषज्ञों की टीम ने कब निरीक्षण किया?
टीम ने 8 जून और 18 जून को यात्रा मार्ग का विस्तृत निरीक्षण किया और अपनी रिपोर्ट सौंपी।
बैठक की अध्यक्षता किसने की?
ट्रस्ट के अध्यक्ष और कुल्लू के डीसी अनुराग चन्द्र शर्मा ने बुधवार को हुई इस बैठक की अध्यक्षता की।
विशेषज्ञों ने किन खतरों की आशंका जताई है?
मॉनसून को देखते हुए भूस्खलन, चट्टानें गिरने, अचानक जलस्तर बढ़ने, फ्लैश फ्लड और मलबे के बहाव की आशंका जताई गई है।
यह यात्रा हर साल कब आयोजित होती है?
श्रीखंड महादेव यात्रा हर साल आधिकारिक तौर पर 10 जुलाई से 23 जुलाई तक आयोजित की जाती है।
श्रीखंड महादेव यात्रा कहां से शुरू होती है और कितनी लंबी है?
यह यात्रा कुल्लू जिले के निरमंड से शुरू होती है और करीब 32 किलोमीटर लंबा कठिन ट्रैक है।
शिवलिंग कितनी ऊंचाई पर है?
19 हजार फीट की ऊंचाई पर 75 फीट ऊंचा पत्थर का शिवलिंग है, जिसके दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं।
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