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पाली का सोमनाथ: मारवाड़ का वह रहस्यमयी मंदिर जहां आज भी गूंजती है 900 साल पुराने संघर्ष की गूंजधर्म
9 जुल॰ 2026, 10:11 pm (37 दिन पहले)· 2

पाली का सोमनाथ: मारवाड़ का वह रहस्यमयी मंदिर जहां आज भी गूंजती है 900 साल पुराने संघर्ष की गूंज

सावन के पावन महीने में पाली स्थित ऐतिहासिक सोमनाथ महादेव मंदिर की चर्चा जोरों पर है। 12वीं सदी में निर्मित इस मंदिर का इतिहास विदेशी आक्रांताओं के हमलों और अदम्य श्रद्धा की कहानी बयां करता है।

सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति का एक ऐसा अनूठा अवसर है जिसमें पूरा देश महादेव की आराधना में डूब जाता है। इस दौरान देश भर के शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन आज हम आपको राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में स्थित एक ऐसे शिव धाम के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे 'पाली का सोमनाथ' के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि उस दौर के भारत का साक्षी है जब विदेशी आक्रांता भारतीय मंदिरों और संस्कृति को निशाना बना रहे थे। ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार, 12वीं सदी में जब गुजरात का सोमनाथ मंदिर संकट के दौर से गुजर रहा था, तब गुजरात के चालुक्य राजा कुमारपाल सोलंकी ने पाली में इस मंदिर की नींव रखी थी।

महमूद गजनवी के आक्रमण और संघर्ष की गौरव गाथा

इस मंदिर का इतिहास अत्यंत संघर्षपूर्ण और रोमांचक रहा है। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, जब महमूद गजनवी ने गुजरात के मूल सोमनाथ मंदिर पर अपनी कुदृष्टि डाली और उसे लूटा, तब उसका प्रकोप पाली स्थित इस सोमनाथ महादेव मंदिर पर भी पड़ा। गजनवी की सेना ने इस पवित्र स्थल को खंडित करने का प्रयास किया, वहां की मूर्तियों को क्षतिग्रस्त किया और मंदिर के गौरव को मिटाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हालांकि, स्थानीय वीरों के साहस और भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था के कारण आक्रांता इस मंदिर का पूर्ण विनाश नहीं कर सके। आज भी यदि आप मंदिर के गर्भगृह और इसके विशाल स्तंभों को ध्यान से देखें, तो वहां उन प्राचीन हमलों के घाव और निशान स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं, जो इसके साहसपूर्ण इतिहास के मूक गवाह बने हुए हैं।

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नागर शैली और स्थापत्य का बेजोड़ संगम

पाली के इस प्रतिष्ठित सोमनाथ महादेव मंदिर का निर्माण विक्रम संवत 1209 में करवाया गया था, जिसका अर्थ है कि यह मंदिर लगभग 900 साल पुराना है। इसके संस्थापक, राजा कुमारपाल सोलंकी, भगवान शिव के अनन्य भक्त माने जाते थे। मंदिर की वास्तुकला नागर शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके पत्थरों पर उकेरी गई बारीक नक्काशी, प्राचीन वास्तुकला के दर्शन कराती है और सैलानियों के साथ-साथ इतिहासकारों को भी अपनी ओर खींचती है। सदियों की तमाम राजनीतिक उथल-पुथल और विनाशकारी हमलों के बाद भी यह मंदिर आज पूरी मजबूती के साथ खड़ा है और अपनी भव्यता का अहसास कराता है।

अखंड ज्योत और अलौकिक श्रद्धा का केंद्र

इस मंदिर की सबसे बड़ी आध्यात्मिक विशेषताओं में से एक है यहां गर्भगृह में जलने वाली अखंड ज्योत। मान्यता के अनुसार, यह दिव्य दीपक सदियों से बिना किसी रुकावट के लगातार प्रज्वलित हो रहा है। स्थानीय भक्तों का मानना है कि इस ज्योत में महादेव स्वयं विद्यमान हैं। सावन के महीने में इस अखंड ज्योत के दर्शन करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है, जिससे भक्तों के कष्ट दूर होते हैं।

सावन में फूलों से सजता है महादेव का दरबार

सावन मास में यहाँ का दृश्य पूरी तरह बदल जाता है। मंदिर मंडल और स्थानीय श्रद्धालुओं द्वारा यहाँ विशेष तैयारियां की जाती हैं। सावन के हर सोमवार को भगवान सोमनाथ का अलौकिक श्रृंगार किया जाता है। इस साज-सज्जा के लिए दिल्ली, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे बड़े शहरों के साथ-साथ विदेशों से भी दुर्लभ और सुगंधित फूल मंगवाए जाते हैं। जब विदेशी और देसी फूलों से महादेव का दरबार सजता है, तो पूरे मंदिर परिसर में दिव्य वातावरण छा जाता है। इस अलौकिक दृश्य को निहारने के लिए सावन के दौरान हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुंचते हैं।

सवाल-जवाब

पाली का सोमनाथ मंदिर कितना पुराना है?
यह मंदिर विक्रम संवत 1209 में निर्मित हुआ था, जो इसे लगभग 900 वर्ष पुराना बनाता है।
इस मंदिर का निर्माण किसने करवाया था?
इस मंदिर का निर्माण गुजरात के चालुक्य वंश के राजा कुमारपाल सोलंकी ने करवाया था।
मंदिर की क्या विशेषता है?
इसकी प्रमुख विशेषता गर्भगृह में जलने वाली वह अखंड ज्योत है जो सदियों से बिना रुके लगातार जल रही है।
सावन के दौरान यहां क्या विशेष होता है?
सावन के प्रत्येक सोमवार को दुर्लभ और विदेशी फूलों से महादेव का भव्य श्रृंगार किया जाता है जिसे देखने लाखों भक्त आते हैं।
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