शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर मां दुर्गा की भक्ति और उपासना के लिए पटना जंक्शन के समीप स्थित प्रसिद्ध महावीर मंदिर में भक्तों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए व्यापक प्रबंध किए गए हैं। इस धार्मिक आयोजन के अंतर्गत श्रद्धालु अब मंदिर परिसर में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए बिना भी अपने नाम और गोत्र के संकल्प के साथ कलश स्थापना करवा सकते हैं। इसके साथ ही नवरात्र के पूरे नौ दिनों तक देवी भगवती की शास्त्रसम्मत विधि-विधान से विशेष पूजा-अर्चना और पाठ संपन्न कराए जाएंगे। मंदिर प्रबंधन ने इन सभी अनुष्ठानों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी बुकिंग दर्ज करा रहे हैं।
श्रद्धालुओं के लिए बुकिंग के दोहरे विकल्प और परंपरा
महावीर मंदिर में नवरात्र पर्व के दौरान कलश स्थापित करने और दुर्गा सप्तशती का पाठ करवाने की परंपरा कई वर्षों से अनवरत चली आ रही है। दूर-दराज रहने वाले या व्यस्तता के कारण मंदिर न पहुंच पाने वाले भक्तों के लिए भी व्यवस्था को सुगम बनाया गया है। जो भी श्रद्धालु अपने या अपने परिवार के नाम से अनुष्ठान संपन्न कराना चाहते हैं, वे मंदिर परिसर में स्थित बुकिंग काउंटर पर जाकर सीधे रसीद कटवा सकते हैं। इसके अतिरिक्त मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से भी घर बैठे डिजिटल माध्यम से पूजा की बुकिंग कराने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
सम्पुट पाठ और साधारण दुर्गासप्तशती पाठ का विवरण
मंदिर प्रबंधन ने पूजा-पाठ के लिए अलग-अलग श्रेणियां और शुल्क तय किए हैं। विशेष फल की प्राप्ति के उद्देश्य से दुर्गासप्तशती के सम्पुट पाठ का आयोजन रखा गया है, जिसके लिए 2310 रुपये का शुल्क निर्धारित है। श्रीदुर्गासप्तशती ग्रंथ में कुल सात सौ श्लोक अथवा मंत्र संकलित हैं। भक्तों की विभिन्न विशिष्ट मनोकामनाओं की सिद्धि के लिए इन मूल मंत्रों के आगे तथा पीछे विशेष बीजमंत्रों को जोड़कर सम्पुट पाठ किया जाता है। बीजमंत्रों के संयोजन की वजह से इस पाठ में साधारण पाठ की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक समय लगता है, जिसे आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली और कल्याणकारी माना गया है।
इसके अलावा जो भक्त साधारण दुर्गासप्तशती पाठ का संकल्प लेना चाहते हैं, उनके लिए 1110 रुपये की दक्षिणा तय की गई है। इस साधारण अनुष्ठान के अंतर्गत अर्गला स्तोत्र, कीलक, कवच, शापोद्धार, देवी के शतनाम तथा मूल 13 अध्यायों का क्रमवार वाचन किया जाता है। इसके उपरांत वैदिक ऋचाओं के साथ ऋग्वेद के पावन देवी-सूक्त का सस्वर पाठ संपन्न होता है। इस पूरे धार्मिक अनुष्ठान को विधिपूर्वक पूर्ण करने में तकरीबन ढाई घंटे का समय लगता है।
नौ दिवसीय सम्पूर्ण कलश स्थापना और पूजा पैकेज
यदि कोई भक्त पूरे नौ दिनों तक चलने वाले समग्र नवरात्र अनुष्ठान का यजमान बनना चाहता है, तो उसके लिए 8250 रुपये का शुल्क नियत किया गया है। इस व्यवस्था के तहत आचार्यगण यजमान के नाम और पारिवारिक गोत्र का विधिवत उच्चारण कर घट अथवा कलश की स्थापना करेंगे। घट स्थापना के उपरांत पूरे नौ दिनों तक नवदुर्गा के विभिन्न पावन स्वरूपों की प्रतिदिन विधि-विधान से पूजा की जाएगी और दुर्गा पाठ संपन्न होगा। हिंदू धर्म की मान्यताओं में नवरात्र के समय कलश स्थापना को शक्ति साधना का अत्यंत अनिवार्य और आधारभूत अंग स्वीकार किया गया है।
प्रबंधन की तैयारियां और परिसर में 3D पंडाल का आकर्षण
श्री महावीर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल ने जानकारी दी कि पूर्ववर्ती वर्षों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस बार भी श्रद्धालुओं की आध्यात्मिक संतुष्टि के लिए यह व्यापक बंदोबस्त किया गया है। भक्त अपनी श्रद्धा, समय और सामर्थ्य के अनुसार विभिन्न पूजा विकल्पों का चयन कर सकते हैं तथा काउंटर अथवा आधिकारिक वेबसाइट के जरिए अपना स्थान सुरक्षित कर सकते हैं।
इसके साथ ही महावीर मंदिर न्यास के जनसंपर्क अधिकारी अजय सिंह ने बताया कि दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर मंदिर के प्रांगण को विशेष रूप देने के लिए एक भव्य 3D पंडाल तैयार किया जा रहा है, जिससे यहां आने वाले दर्शनार्थियों को एक अनूठा और विहंगम दृश्य देखने को मिले। इस विशेष पंडाल के निर्माण कार्य में पश्चिम बंगाल के कोलकाता से आए दक्ष कारीगर दिन-रात जुटे हुए हैं। पंडाल का मुख्य ढांचा बनकर तैयार हो चुका है और वर्तमान में अंतिम साज-सज्जा तथा फिनिशिंग का कार्य प्रगति पर है।



















