रक्षाबंधन का पावन पर्व भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और अटूट स्नेह का प्रतीक माना जाता है। इस शुभ अवसर पर बहनें अपने भाई की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधती हैं। राखी बांधने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले एक सुसज्जित पूजा थाली तैयार की जाती है, जिसमें शास्त्रों और लोक परंपराओं के अनुसार आवश्यक पूजन सामग्रियां रखी जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तैयार की गई इस राखी थाली को सबसे पहले घर के मंदिर में स्थापित किया जाता है। इसके बाद पूरे विधि-विधान से भगवान की पूजा अर्चना की जाती है। सबसे पहली राखी प्रथम पूज्य भगवान गणेश को अर्पित की जाती है। इसके उपरांत घर के अन्य देवी-देवताओं और अपने इष्ट देव को राखी समर्पित करने का नियम है। जब भगवान को राखी अर्पित कर दी जाती है, तब उसी थाली से भाई का पूजन किया जाता है।
राखी की थाली में अनिवार्य रूप से होनी चाहिए ये 7 चीजें
राखी की थाली को संपूर्ण और फलदायी बनाने के लिए उसमें सात मुख्य वस्तुओं को शामिल करना बेहद जरूरी माना गया है
- रक्षासूत्र यानी राखी: यह रेशमी या सूती धागा भाई और बहन के प्रेम के साथ-साथ सुरक्षा का सबसे बड़ा संकल्प होता है, जिसे भाई की दाहिनी कलाई पर बांधा जाता है।
- रोली या कुमकुम: भाई के माथे पर विजय और आरोग्य का तिलक लगाने के लिए रोली का उपयोग किया जाता है। इसे शुभता और देवी लक्ष्मी के आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है।
- अक्षत (साबुत चावल के दाने): रोली के तिलक के ऊपर लगाए जाने वाले चावल पूरी तरह से साबुत यानी बिना टूटे होने चाहिए। अक्षत को जीवन में अखंड सौभाग्य, धन-धान्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
- घी का दीपक: थाली में शुद्ध गाय के घी का दीया जलाकर रखा जाता है। इस दीपक से भाई की आरती उतारी जाती है, जिससे उनके जीवन से सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और मंगलमय जीवन का प्रकाश फैलता है।
- स्वादिष्ट मिठाई: रक्षासूत्र बांधने और तिलक करने के उपरांत भाई का मुंह मीठा कराया जाता है। यह परंपरा भाई-बहन के रिश्ते में मिठास और आपसी प्रेम को सदैव बनाए रखने का संकेत है।
- दूर्वा (दूब घास): धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दूर्वा घास में अमृत का वास होता है। पूजा के दौरान दूर्वा को अक्षत के साथ मिलाकर भाई के सिर पर रखने से उन्हें दीर्घायु और आरोग्य प्राप्त होता है।
- मौली या कलावा: कई स्थानों पर राखी के साथ-साथ भाई को कलावा बांधना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि कलावा धारण कराने से भाई को लंबी उम्र का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
थाली को अधिक फलदायी बनाने के लिए अतिरिक्त सामग्री
इन सात अनिवार्य चीजों के अलावा, अपनी क्षेत्रीय या पारिवारिक परंपरा के अनुसार थाली में कुछ अन्य पवित्र वस्तुएं भी शामिल की जा सकती हैं। अनेक स्थानों पर राखी की थाली में एक छोटा जल कलश रखा जाता है। इस कलश के जल को पहले भगवान पर छिड़क कर पवित्र किया जाता है और फिर भाई पर छिड़क कर आशीर्वाद दिया जाता है। इसके साथ ही, थाली में नारियल (श्रीफल) रखना भी बेहद शुभ माना गया है, जो भाई की रक्षा और जीवन में उन्नति का प्रतीक है। पूजा की थाली में प्रथम पूज्य भगवान गणेश जी की एक छोटी मूर्ति या चित्र रखना भी उत्तम माना जाता है, जिससे संपूर्ण पूजा निर्विघ्न संपन्न होती है।



















