सावन के महीने में भगवान शिव की उपासना का खास महत्व माना जाता है और इस दौरान लाखों श्रद्धालु व्रत रखकर, पूजा-पाठ करके और मंत्रों का जाप करके महादेव को प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं। ऐसी मान्यता है कि सावन में सही विधि से शिव मंत्रों का जाप करने पर मन को गहरी शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है। भक्तों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि आखिर कौन से मंत्र महादेव को सबसे प्रिय हैं और इन्हें जपने का सही तरीका क्या है। आइए जानते हैं महादेव को अतिप्रिय माने जाने वाले तीन शक्तिशाली मंत्रों के बारे में, इन्हें जपने का सही समय, विधि और इनसे मिलने वाले लाभ।
महामृत्युंजय मंत्र से मिलती है सुरक्षा
पहला मंत्र है महामृत्युंजय मंत्र, जिसके बोल कुछ इस तरह हैं, "ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥" मान्यता है कि इस मंत्र के नियमित जाप से मृत्यु के भय से रक्षा होती है और शरीर में जीवन शक्ति बढ़ती है। इसे जपने के लिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त यानी सुबह 4 से 6 बजे के बीच का समय सबसे उपयुक्त बताया गया है, हालांकि रात के समय एकांत में भी इसका जाप किया जा सकता है। विधि के अनुसार, रुद्राक्ष की माला लेकर 108 बार इस मंत्र का जाप करना चाहिए। जाप के दौरान सफेद वस्त्र पहनकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके शांत मन से बैठना शुभ माना गया है। ऐसा करने से एकाग्रता बनी रहती है और मंत्र का पूरा असर मिलने की मान्यता है।
रुद्र गायत्री मंत्र से बढ़ती है बुद्धि
दूसरा मंत्र रुद्र गायत्री मंत्र है, "ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥" कहा जाता है कि इस मंत्र का जाप करने से बुद्धि तेज होती है और आत्मबल व साहस में बढ़ोतरी होती है। इसे जपने के लिए सूर्योदय से पहले या सूर्योदय के समय का चुनाव सबसे शुभ माना जाता है। जाप के लिए स्वच्छ और शांत जगह चुनकर रुद्राक्ष की माला से मंत्र बोलना चाहिए और कम से कम 21 बार इसे दोहराना चाहिए। नियमित अभ्यास से आत्मविश्वास में भी सुधार होने की बात कही जाती है।
शिव ध्यान मंत्र से मिलती है मानसिक शांति
तीसरा मंत्र है शिव ध्यान मंत्र, "ॐ शांताय नमः" या "ॐ शिवाय नमः"। माना जाता है कि इस छोटे मगर असरदार मंत्र के जाप से मन को शांति मिलती है और ध्यान लगाने में मदद मिलती है। इसे रात को सोने से पहले एकांत में जपने की सलाह दी जाती है। जाप की विधि के तौर पर आंखें बंद करके शांत मन से बैठें, दीपक जलाएं और धीमी आवाज में मंत्र बोलें। अगर संभव हो तो इसे मानसिक रूप से भी जपा जा सकता है, जिससे विचारों में उलझाव कम होता है।
जाप से पहले इन नियमों का रखें ध्यान
मंत्र जाप शुरू करने से पहले स्नान करना जरूरी माना जाता है, ताकि तन और मन दोनों शुद्ध हों। महादेव को प्रसन्न करने के लिए बेलपत्र, दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से अभिषेक करने की परंपरा है। मंत्र जाप में श्रद्धा और विश्वास को सबसे अहम बताया गया है, यानी बिना पूरे मन और भरोसे के जाप का फल पूरा नहीं मिलता। साथ ही जाप की संख्या को धीरे-धीरे बढ़ाने की सलाह दी जाती है। शुरुआत 11 बार जाप से की जा सकती है, इसके बाद अभ्यास बढ़ाकर 21 बार और फिर 108 बार तक जाप किया जा सकता है। इस तरह धीरे-धीरे संख्या बढ़ाने से जाप में स्थिरता बनी रहती है और मन भटकता नहीं है।



















