पंचांग के मुताबिक 20 अक्टूबर 2026 को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के उपरांत दशमी तिथि का संयोग बन रहा है। इस दिन मंगलवार व्रत के साथ विजयादशमी यानी दशहरे का पावन पर्व भी मनाया जाएगा। ज्योतिष गणना के अनुसार आज श्रवण नक्षत्र, कौलव करण और शूल योग का निर्माण हो रहा है, जबकि उत्तर दिशा की ओर दिशाशूल रहेगा। खगोलीय स्थिति पर नजर डालें तो चंद्रमा मकर राशि में संचार करेंगे और सूर्य कन्या राशि में विराजमान रहेंगे। इस बार मंगलवार के दिन विजयादशमी आने से श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
धार्मिक महत्व और पूजा विधि
सनातन परंपरा में मंगलवार का दिन संकटमोचन हनुमानजी और ग्रहों के सेनापति मंगलदेव की उपासना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। विजयादशमी का पर्व असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के जानकारों का मानना है कि हनुमानजी की आराधना करने से मंगल ग्रह से जुड़ी तमाम परेशानियां दूर होती हैं और मांगलिक दोष का शमन होता है। इस विशेष अवसर पर सुबह स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करें और अपने घर के पूजा स्थल पर हनुमानजी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। दीपक प्रज्वलित करने के बाद सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल और गुड़-चने या बूंदी के लड्डू अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद पूरी श्रद्धा के साथ हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ किया जाता है। अपनी सामर्थ्य और पारिवारिक परंपरा के अनुसार भगवान राम के नाम का स्मरण भी किया जाता है। पूजा के समापन पर परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और हर प्रकार के संकटों से रक्षा की प्रार्थना की जाती है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार मंगल ग्रह साहस, ऊर्जा, पराक्रम और आत्मविश्वास के प्रतीक हैं। विजयादशमी का यह पर्व भगवान श्रीराम की रावण पर और देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय की स्मृति में मनाया जाता है, जिससे भक्ति और सेवा का संदेश मिलता है।
प्रमुख पंचांग विवरण और तिथियां
आज की तिथि और नक्षत्रों की स्थिति इस प्रकार है
- तिथि: नवमी तिथि दोपहर 12:50 बजे तक रहेगी, जिसके बाद दशमी तिथि शुरू हो जाएगी।
- नक्षत्र: श्रवण नक्षत्र शाम 06:02 बजे तक रहेगा, जिसके उपरांत धनिष्ठा नक्षत्र आरंभ होगा।
- करण: कौलव करण दोपहर 12:50 बजे तक प्रभावी रहेगा और उसके बाद 21 अक्टूबर की रात 01:36 बजे तक तैतिल करण रहेगा।
- योग: शूल योग 21 अक्टूबर की रात 12:50 बजे तक रहेगा, जिसके बाद गण्ड योग शुरू होगा।
- चन्द्रास्त: चंद्रमा का अस्त 21 अक्टूबर को रात 01:23 बजे होगा।
शुभ मुहूर्त और समय
दिनभर के विभिन्न शुभ और अनुकूल समय इस प्रकार हैं
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:44 बजे से सुबह 05:35 बजे तक।
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक।
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:00 बजे से दोपहर 02:46 बजे तक।
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:48 बजे से शाम 06:13 बजे तक।
- निशिता मुहूर्त: रात 11:41 बजे से 21 अक्टूबर की रात 12:32 बजे तक।
- अमृत काल: सुबह 06:35 बजे से सुबह 08:21 बजे तक।
- शिववास: दोपहर 12:50 बजे तक गौरी के साथ, उसके बाद सभा में।
अशुभ मुहूर्त और राहुकाल
आज के दिन इन अशुभ और वर्जित समयों में किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए
- राहुकाल: दोपहर 02:57 बजे से शाम 04:22 बजे तक।
- यमगण्ड: सुबह 09:16 बजे से सुबह 10:41 बजे तक।
- गुलिक काल: दोपहर 12:06 बजे से दोपहर 01:32 बजे तक।
- विडाल योग: सुबह 06:25 बजे से शाम 06:02 बजे तक।
- दुर्मुहूर्त: सुबह 08:42 बजे से सुबह 09:27 बजे तक।
- वर्ज्य काल: रात 10:19 बजे से 21 अक्टूबर की रात 12:02 बजे तक।



















