पवित्र धर्म नगरी चित्रकूट में सावन महीने की हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं का अपार जनसैलाब उमड़ पड़ा। भगवान श्रीराम की तपोभूमि में आधी रात 12 बजे के बाद से ही देश के कोने-कोने से भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। जैसे-जैसे सुबह की पहली किरण फूटी, पवित्र मंदाकिनी नदी के विभिन्न तटों, मुख्य रूप से रामघाट, और कामदगिरि परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं की अटूट कतारें देखने को मिलीं। आस्था के इस माहौल में भक्तों ने मंदाकिनी के पावन जल में डुबकी लगाकर भगवान कामतानाथ और भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की और अपने परिवार की खुशहाली की कामना की।
मंदाकिनी स्नान, जलाभिषेक और कामदगिरि परिक्रमा की पावन परंपरा
चित्रकूट में वैसे तो साल के प्रत्येक महीने पड़ने वाली अमावस्या तिथि को धार्मिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है, परंतु सावन मास में आने वाली हरियाली अमावस्या का धार्मिक दृष्टि से एक अलग ही विशिष्ट महत्व होता है। इस शुभ दिन पर देश के अलग-अलग राज्यों और दूर-दराज के इलाकों से लाखों श्रद्धालु धर्म नगरी पहुंचते हैं। इस विशाल जनसमूह में विशेष रूप से ग्रामीण अंचल के लोग और किसान भाई बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।
प्रातः काल मंदाकिनी नदी में आस्था की डुबकी लगाने के पश्चात श्रद्धालु चित्रकूट के राजा कहे जाने वाले भगवान मत्तगजेंद्रनाथ शिव मंदिर पहुंचते हैं, जहां वे पूर्ण विधि-विधान से शिवजी का जलाभिषेक करते हैं। इसके बाद भक्तजन भगवान कामतानाथ जी के दर्शन करते हुए कामदगिरि पर्वत की सात किलोमीटर लंबी पवित्र परिक्रमा पूरी करते हैं। पूरे परिक्रमा मार्ग में भक्तों का उत्साह और धार्मिक जयकारे गूंजते रहते हैं।
हरियाली अमावस्या की पौराणिक मान्यताएं और किसानों की अटूट आस्था
धार्मिक शास्त्रों और लोक मान्यताओं के अनुसार, संपूर्ण सावन का महीना देवों के देव महादेव भगवान शिव की उपासना के लिए समर्पित होता है। वहीं दूसरी ओर, हरियाली अमावस्या का पर्व प्रकृति की हरियाली, पर्यावरण के संरक्षण और जीवन में सुख-समृद्धि का संदेश देता है। मान्यता है कि इस विशेष दिन पर चित्रकूट की पावन भूमि पर जप-तप, पूजा-पाठ, दान-पुण्य और तीर्थ स्नान करने से व्यक्ति को अनंत गुना पुण्य की प्राप्ति होती है।
विशेषकर कृषक समुदाय के लोग अच्छी वर्षा, लहराती फसलों और अपने परिवारों के उत्तम स्वास्थ्य व समृद्धि की कामना लेकर चित्रकूट आते हैं। इसके अतिरिक्त स्थानीय लोक कथाओं और पौराणिक मान्यताओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि अपने वनवास काल के दौरान भगवान श्रीराम ने अमावस्या के दिन ही चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के जल में स्नान किया था। यही कारण है कि इस तिथि पर चित्रकूट में श्रद्धालुओं की उपस्थिति सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है।
भक्तों के अनुभव और पुरोहितों का क्या है कहना
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से अपने पूरे परिवार के साथ चित्रकूट पहुंचे श्रद्धालु विशंभर प्रसाद ने अपनी गहरी आस्था व्यक्त करते हुए बताया कि वे लगभग हर महीने की अमावस्या पर चित्रकूट आने का प्रयास करते हैं। हरियाली अमावस्या के इस पावन अवसर पर भी वे अपने परिजनों के साथ यहां पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि रामघाट पर मंदाकिनी नदी में स्नान करने के बाद वे भगवान कामतानाथ के दर्शन करेंगे और कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा लगाएंगे। विशंभर प्रसाद ने कहा, "भगवान कामतानाथ के दर्शन और परिक्रमा करने से मन को असीम शांति मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।"
वहीं रामघाट पर श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन कर रहे पुरोहित राजाराम ने बताया कि इस वर्ष हरियाली अमावस्या पर लाखों की संख्या में भक्त चित्रकूट पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि तड़के से ही श्रद्धालु मंदाकिनी में स्नान कर भगवान शिव का जलाभिषेक कर रहे हैं। इसके साथ ही लोग अपनी सामर्थ्य अनुसार दान-पुण्य कर रहे हैं और भगवान कामतानाथ की शरण में जाकर परिक्रमा पूरी कर रहे हैं।
सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण के लिए प्रशासन की मुस्तैदी
हरियाली अमावस्या के पर्व पर चित्रकूट में उमड़े इस विशाल जनसमुद्र को ध्यान में रखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग की ओर से सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और आवागमन को सुगम बनाने के लिए रामघाट, मंदाकिनी नदी के विभिन्न घाटों तथा कामदगिरि परिक्रमा मार्ग पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
प्रशासनिक अधिकारी और पुलिसकर्मी लगातार भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं। संवेदनशील स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई है और स्वास्थ्य व राहत टीमों को भी सतर्क रखा गया है ताकि दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं को दर्शन और परिक्रमा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।



















