भगवान शिव की भक्ति का पवित्र महीना श्रावण जल्द ही आरंभ होने वाला है। इस पावन महीने में लाखों की संख्या में श्रद्धालु भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए कांवड़ यात्रा निकालते हैं। कांवड़िये पवित्र नदियों, मुख्य रूप से गंगा नदी से जल भरकर लंबी पैदल यात्रा करते हैं और भगवान आशुतोष के प्रसिद्ध शिव मंदिरों में पहुंचकर पवित्र शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। सनातन धर्म में इस धार्मिक अनुष्ठान का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है। ऐसी मान्यता है कि सावन के महीने में कांवड़ उठाकर गंगाजल अर्पित करने से महादेव प्रसन्न होते हैं और साधक के सभी दुख, भय तथा सांसारिक कष्ट दूर हो जाते हैं। देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों जैसे काशी, हरिद्वार, उज्जैन और झारखंड स्थित देवघर में कांवड़ यात्रा के दौरान एक अद्भुत आध्यात्मिक उत्साह देखने को मिलता है।
तिथि और पंचांग गणना
धार्मिक पंचांग की गणना के अनुसार, सावन महीने के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ 29 जुलाई की रात्रि में 8 बजकर 5 मिनट पर हो रहा है। यह प्रतिपदा तिथि अगले दिन 30 जुलाई को रात्रि 9 बजकर 30 मिनट तक मान्य रहेगी। उदयातिथि के नियम को मुख्य मानते हुए कांवड़ यात्रा की आधिकारिक शुरुआत 30 जुलाई 2026 से मानी जाएगी। इस विशेष दिन से ही समूचा वातावरण बोल बम और हर हर महादेव के जयकारों से गुंजायमान होने लगेगा।
विभिन्न क्षेत्रों में कांवड़ यात्रा की समयावधि
अलग-अलग क्षेत्रों में कांवड़ यात्रा की समयावधि और परंपराएं भिन्न होती हैं। मुख्य रूप से दो प्रमुख क्षेत्रों की समयावधि इस प्रकार है
- दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र: दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में कांवड़ यात्रा की शुरुआत सावन कृष्ण प्रतिपदा यानी 30 जुलाई से होती है और इसका समापन सावन शिवरात्रि के दिन 11 अगस्त 2026 को जल चढ़ाने के साथ होता है।
- देवघर क्षेत्र: बाबा वैद्यनाथ धाम देवघर में पूरे सावन मास तक कांवड़ यात्रा का आयोजन किया जाता है। यहाँ कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से शुरू होकर सावन पूर्णिमा यानी 28 अगस्त 2026 तक निरंतर चलती है।
सावन 2026 में जलाभिषेक की प्रमुख शुभ तिथियां
सावन माह के दौरान भगवान शिव का जल से अभिषेक करने के लिए कुछ विशेष तिथियों को अत्यंत फलदायी और शुभ माना गया है। शिव भक्त इन महत्वपूर्ण तिथियों को ध्यान में रखकर अपना पूजन संकल्प पूरा कर सकते हैं
- 3 अगस्त 2026: सावन महीने का पहला सोमवार, जो जलाभिषेक के लिए अत्यंत शुभ है।
- 10 अगस्त 2026: सावन का दूसरा सोमवार एवं सोम प्रदोष व्रत का दुर्लभ योग।
- 11 अगस्त 2026: सावन शिवरात्रि, इस दिन लाखों कांवड़िये मुख्य जलाभिषेक संपन्न करते हैं।
- 17 अगस्त 2026: सावन का तीसरा सोमवार तथा नाग पंचमी का पावन पर्व।
- 24 अगस्त 2026: सावन महीने का चौथा सोमवार।
- 25 अगस्त 2026: भौम प्रदोष व्रत का पावन अवसर।
- 28 अगस्त 2026: श्रावण पूर्णिमा, जो सावन महीने की अंतिम तिथि है।
श्रावण मास में पूजन व व्रत का आध्यात्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार महादेव की आराधना के लिए सावन का महीना सर्वश्रेष्ठ समय माना गया है। इस पूरे माह में या सावन के प्रत्येक सोमवार के दिन नियमपूर्वक व्रत रखने और पूजन करने का विधान है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि सावन के दौरान जो श्रद्धालु निष्ठापूर्वक व्रत रखते हैं और भगवान शिव को जल अर्पित करते हैं, उन्हें मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। कांवड़ यात्रा करने वाले भक्तों को सोमवार या शिवजी के प्रिय तिथियों पर जल चढ़ाने का विशेष लाभ प्राप्त होता है। सोमवार के अतिरिक्त प्रदोष व्रत, नाग पंचमी और सावन शिवरात्रि जैसी तिथियां भी जलाभिषेक और रुद्राभिषेक अनुष्ठानों के लिए विशेष रूप से कल्याणकारी मानी गई हैं।



















