बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की गिनती में प्रशांत किशोर की मजबूत बढ़त, इकलौते मुस्लिम प्रत्याशी तनवीर आलम को मिले मात्र 664 वोटसर्दियों में एसी बंद करने से पहले कर लें 4 जरूरी काम, अगली गर्मी में बचेंगे सर्विसिंग के पैसेबांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर का बड़ा दांव, क्या बिहार की राजनीति में ध्वस्त हो गए पुराने जातीय किले?डोनाल्ड ट्रंप ने शेवरॉन की सफलता का श्रेय अपनी नीतियों को दिया, तेल कंपनियों से खुदरा कीमतें घटाने की मांग कीनागरिक और सैन्य अधिकारियों के बीच संयुक्त प्रशिक्षण समय की मांग: राजनाथ सिंह4 अगस्त को पूर्वोत्तर भारत में मूसलाधार बारिश का रेड अलर्ट, दिल्ली और हरियाणा समेत 10 राज्यों के 40 शहरों में जानिए मौसम का हालअयोध्या के कनक भवन की अनोखी कथा: महारानी कैकेयी ने देवी सीता को क्यों दिया था सोने का महल?बोस्टन यूनिवर्सिटी स्कॉलरशिप और लोन से हुई अमेरिका में पढ़ाई, कॉकरोच जनता पार्टी अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने दिए वित्तीय सवालों के जवाबसीतामढ़ी का नागेश्वर नाथ धाम क्यों कहलाता है बिहार का पशुपतिनाथ, जानिए त्रेतायुग से जुड़े इस रहस्यमयी मंदिर का इतिहासमिथुन राशिफल 4 अगस्त: करियर में नए अवसरों का योग और शाम को आर्थिक चर्चा से लाभ, जानिए आज की सटीक सलाह
सीतामढ़ी का नागेश्वर नाथ धाम क्यों कहलाता है बिहार का पशुपतिनाथ, जानिए त्रेतायुग से जुड़े इस रहस्यमयी मंदिर का इतिहासधर्म
3 अग॰ 2026, 7:52 pm (3 घंटे पहले)· 1

सीतामढ़ी का नागेश्वर नाथ धाम क्यों कहलाता है बिहार का पशुपतिनाथ, जानिए त्रेतायुग से जुड़े इस रहस्यमयी मंदिर का इतिहास

सीतामढ़ी जिले के पुपरी में स्थित नागेश्वर नाथ मंदिर अपनी अनोखी वास्तुकला और त्रेतायुग के पौराणिक इतिहास के लिए जाना जाता है। नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर जैसा स्वरूप और जमीन की गहराई में बना गर्भगृह इस धाम को बेहद खास बनाता है।

बिहार के सीतामढ़ी जिले में स्थित पुपरी का नागेश्वर नाथ मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह पवित्र शिवधाम केवल अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अद्भुत स्थापत्य शैली के लिए भी पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस स्थान का संबंध त्रेतायुग से जुड़ा हुआ है। ऐसा माना जाता है कि यहां भगवान शिव का शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ था, जिसे स्वयंभू शिवलिंग कहा जाता है। युगों-युगों से इस पावन स्थल पर पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है और स्थानीय लोगों के दिल में इस मंदिर के प्रति अगाध श्रद्धा है।

नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर जैसी वास्तुकला

नागेश्वर नाथ मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसका विशेष स्थापत्य और बनावट है। इस मंदिर की वास्तुकला नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थित प्रसिद्ध श्री पशुपतिनाथ मंदिर से अत्यधिक मिलती-जुलती है। मंदिर की बाहरी भव्यता, दीवारों पर उकेरी गई सुंदर नक्काशी और परिसर का शांत माहौल श्रद्धालुओं को सहज ही आकर्षित कर लेता है। यहां आने वाले भक्तों को ठीक वैसा ही आध्यात्मिक अनुभव होता है, जैसा काठमांडू के पशुपतिनाथ धाम में दर्शन करने पर मिलता है। इसी समानता के कारण इसे स्थानीय स्तर पर बिहार के पशुपतिनाथ के रूप में भी देखा जाता है।

ये भी पढ़ें

जमीन की गहराई में बसा रहस्यमयी गर्भगृह

इस ऐतिहासिक मंदिर की एक और बड़ी विशेषता इसका गर्भगृह है, जो सामान्य धरातल से काफी गहराई में निर्मित है। यह अनोखी बनावट नागेश्वर नाथ मंदिर को अन्य सभी शिव मंदिरों से अलग और रहस्यमयी पहचान देती है। जमीन के नीचे स्थापित स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन करने के लिए भक्तों को सीढ़ियों के जरिए गहराई में उतरना पड़ता है। हालांकि गर्भगृह जमीन के काफी नीचे स्थित है, फिर भी वहां पहुंचते ही श्रद्धालुओं को एक अद्भुत और दिव्य ऊर्जा की अनुभूति होती है। वहां का वातावरण मन को असीम शांति प्रदान करता है और भक्तों का सारा तनाव दूर कर देता है।

सावन और महाशिवरात्रि पर उमड़ता है जनसैलाब

हर साल पवित्र सावन माह के दौरान नागेश्वर नाथ मंदिर में आस्था का विशाल जनसैलाब उमड़ता है। पूरे महीने पुपरी क्षेत्र हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से गूंजता रहता है। दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले लाखों शिवभक्त और कांवड़िये बागमती नदी से पवित्र जल भरकर पैदल यात्रा करते हैं और यहां पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए स्वयंभू शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करते हैं। सावन के अलावा महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर भी मंदिर परिसर में भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इन अवसरों पर मंदिर को रोशनी और फूलों से दुल्हन की तरह सजाया जाता है। इस दौरान भजन-कीर्तन और विशेष पूजा-अनुष्ठानों से पूरा माहौल भक्तिमय बना रहता है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा व्यापक व्यवस्था की जाती है।

पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के रूप में विकास

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से नागेश्वर नाथ मंदिर सीतामढ़ी जिले की एक अनमोल धरोहर है। यह स्थल केवल एक धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला का भी एक उत्कृष्ट नमूना प्रस्तुत करता है। इस पावन धाम की महत्ता को देखते हुए सरकार और पर्यटन विभाग इसके सौंदर्यकरण और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार प्रयासरत हैं। मंदिर परिसर के विकास से न केवल देश-विदेश के पर्यटकों और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि इस पौराणिक स्थल की महिमा का प्रचार-प्रसार भी बड़े पैमाने पर होगा।

सवाल-जवाब

नागेश्वर नाथ मंदिर कहाँ स्थित है?
यह पावन मंदिर बिहार के सीतामढ़ी जिले के पुपरी क्षेत्र में स्थित है।
नागेश्वर नाथ मंदिर की वास्तुकला किस प्रसिद्ध मंदिर से मिलती-जुलती है?
इस मंदिर की स्थापत्य शैली और वास्तुकला नेपाल के काठमांडू में स्थित प्रसिद्ध श्री पशुपतिनाथ मंदिर से काफी मिलती-जुलती है।
इस मंदिर का गर्भगृह अन्य शिव मंदिरों से अलग क्यों माना जाता है?
इस मंदिर का गर्भगृह सामान्य धरातल से काफी गहराई में स्थित है, जहाँ स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं को सीढ़ियों से नीचे उतरना पड़ता है।
सावन के महीने में कांवड़िये किस नदी से जल लाकर यहाँ अर्पण करते हैं?
सावन के पावन महीने में लाखों कांवड़िये और शिवभक्त बागमती नदी से पवित्र जल लाकर नागेश्वर नाथ मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR