उत्तर प्रदेश का सुल्तानपुर जिला अपनी समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के लिए जाना जाता है। यहां स्थापित भगवान भोलेनाथ के प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र हैं। महाभारत कालीन मान्यताओं से लेकर 200 साल पुराने ऐतिहासिक निर्माण तक, इन शिव धामों में हर साल लाखों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं। विशेष रूप से सावन के पवित्र महीने और महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर इन स्थानों पर विशाल मेलों और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है।
इसौली गांव का लखौरी ईंटों से बना 200 वर्ष पुराना शिव मंदिर
सुल्तानपुर शहर से कुड़वार रोड पर लगभग 40 किलोमीटर दूर इसौली ग्राम सभा में एक अति प्राचीन शिव मंदिर स्थित है। लगभग 20 फीट ऊंचे विशाल टीले पर बना यह मंदिर 200 वर्षों से अधिक पुराना माना जाता है। इस ऐतिहासिक मंदिर की नींव 150 वर्ष से अधिक पहले हनुमंत राय श्रीवास्तव द्वारा रखी गई थी। पारंपरिक लखौरी ईंटों से निर्मित यह मंदिर जिले की समृद्ध धार्मिक वास्तुकला को आज भी सजोए हुए है। local resident बद्री विशाल तिवारी के अनुसार यह स्थान क्षेत्र के लोगों की अटूट आस्था का मुख्य केंद्र है।
प्रत्येक वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर प्रांगण में भव्य मेले का आयोजन होता है। इसके अलावा हर तीसरे वर्ष मलमास के दौरान यहां एक महीने तक लगातार धार्मिक कथा चलती है। इस दौरान टिकरी से मंदिर तक एक विशाल शिव बारात निकाली जाती है, जिसमें 15 हजार से भी अधिक श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं। इस दिव्य यात्रा में हाथी, घोड़े और नंदी बैल विशेष आकर्षण का केंद्र बनते हैं।
देवरहर का ऐतिहासिक महेश नाथ धाम और भुरुच कबीले की कहानी
देवरहर गांव में स्थित महेश नाथ धाम का संबंध महाभारत काल से जोड़ा जाता है। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल में यह स्थान भुरुचों का कबीला हुआ करता था, जहां भुरुच अपने साथियों के साथ निवास करते थे। मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य प्रशांत उपाध्याय बताते हैं कि इस पावन भूमि पर भगवान भोलेनाथ स्वयं प्रकट हुए थे और यहीं उनकी पवित्र मूर्ति प्राप्त हुई थी।
श्रद्धालुओं में यह दृढ़ विश्वास है कि बाबा महेश नाथ अत्यंत क्रोधी स्वभाव के हैं, लेकिन अपने भक्तों के प्रति वे उतने ही दयालु और सहनशील भी हैं। धाम में आने वाले हर श्रद्धालु की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। विशेष रूप से सावन मास में हजारों भक्त बाबा का जलाभिषेक करने के लिए यहां एकत्रित होते हैं।
पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो रहा बाबा जनवारी नाथ जी मंदिर
सुल्तानपुर शहर से लगभग 22 किलोमीटर दूर लंभुआ रोड पर स्थित बाबा जनवारी नाथ जी का मंदिर राज्य सरकार द्वारा धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्य मार्ग पर लंभुआ बाजार से दाहिनी ओर ब्लॉक रोड के जरिए मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। इस मंदिर में बाबा जनवारी नाथ जी को विशेष प्रसाद के रूप में लड्डू, बर्फी और पेड़ा चढ़ाने की परंपरा है।
यह मंदिर रोजाना सुबह 4 बजे से रात 9 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है। दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए मंदिर परिसर के विशाल हॉल में 1 से 2 दिन तक ठहरने का नि:शुल्क प्रबंध भी उपलब्ध है।
शहर के मध्य स्थित सिद्धेश्वर नाथ मंदिर
सुल्तानपुर शहर के ठीक बीचों-बीच रामलीला मैदान परिसर में स्थित सिद्धेश्वर नाथ मंदिर स्थानीय निवासियों की दिनचर्या का अहम हिस्सा है। इस मंदिर के बारे में यह प्रचलित मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु निष्ठापूर्वक यहां आकर भगवान शिव पर जल अर्पित करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं। सावन और शिवरात्रि के मौकों पर शहर भर के लोग यहां दर्शन के लिए उमड़ते हैं।
इछूरी पर्यटक स्थल पर 6 फीट ऊंची भव्य शिव प्रतिमा
सुल्तानपुर-अयोध्या मार्ग पर जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर इछूरी पर्यटक स्थल स्थित है। इस पर्यटन स्थल के मुख्य प्रवेश द्वार पर ही एक अत्यंत आकर्षक और भव्य मंदिर का निर्माण किया गया है। इस मंदिर में भगवान भोलेनाथ की लगभग 6 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है। यहां आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु भगवान शिव की विशाल प्रतिमा के दर्शन कर जलाभिषेक करते हैं।



















