स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर राजस्थान के प्रसिद्ध खाटूश्यामजी धाम में धार्मिक आस्था और देशभक्ति का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। 15 अगस्त के उपलक्ष्य में बाबा श्याम का भव्य दरबार राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे की थीम पर सजाया गया। देश के विभिन्न राज्यों से मंगाए गए केसरिया, सफेद और हरे रंग के फूलों से प्रभु का अलौकिक श्रृंगार किया गया, जो मंदिर पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं के मुख्य आकर्षण का केंद्र बना रहा। इस दिव्य और मनमोहक रूप के दर्शन के लिए सुबह से ही देश भर से आए भक्तों का तांता लगा रहा।
भव्य श्रृंगार और रत्नजड़ित स्वर्ण मुकुट
श्री श्याम मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान ने आयोजन की जानकारी देते हुए बताया कि स्वतंत्रता दिवस के खास मौके पर बाबा श्याम का तीन रंगों के फूलों से विशेष श्रृंगार किया गया। इसके लिए देश के अलग-अलग राज्यों से विशेष रूप से केसरिया, सफेद और हरे फूल मंगवाए गए थे। फूलों की इस सजावट के साथ-साथ बाबा श्याम को रत्नजड़ित सोने का मुकुट भी धारण कराया गया। इसके अतिरिक्त, प्रभु के पूरे गर्भगृह को भी राष्ट्रीय ध्वज की खूबसूरत थीम के अनुसार फूलों से भव्य रूप से सुसज्जित किया गया, जिसने पूरे वातावरण को राष्ट्रभक्ति के रंगों से सराबोर कर दिया।
मंदिर परिसर में राष्ट्रध्वज और भारत माता के जयकारे
स्वतंत्रता दिवस समारोह की आधिकारिक शुरुआत श्याम मंदिर कमेटी की ओर से मंदिर परिसर में तिरंगा फहराकर की गई। ध्वजारोहण के दौरान पूरा मंदिर प्रांगण भारत माता के ओजस्वी जयकारों से गूंज उठा। इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं और मंदिर अधिकारियों ने देश की सुख, शांति, समृद्धि और प्रगति की प्रार्थना की। स्वतंत्रता दिवस के साथ वीकेंड की छुट्टियां होने के कारण खाटूश्यामजी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। दूर-दूर के राज्यों से पहुंचे भक्त बाबा श्याम के इस अनुपम रूप की एक झलक पाने के लिए पंक्तियों में खड़े नजर आए।
हर वर्ष की परंपरा और श्रद्धालुओं का उत्साह
श्याम मंदिर कमेटी के अनुसार, स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर बाबा श्याम का तिरंगा थीम पर श्रृंगार करने की परंपरा हर साल निभाई जाती है। इस विशेष आयोजन का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं के मन में धार्मिक आस्था के साथ-साथ राष्ट्रप्रेम और देशभक्ति की भावना को सुदृढ़ करना है। दिल्ली से दर्शन करने आए श्रद्धालु उमेश ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे इससे पहले भी कई बार खाटू धाम आ चुके हैं, परंतु बाबा श्याम का ऐसा अद्भुत तिरंगा रूप उन्होंने पहली बार देखा है। उन्हें ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं प्रभु राष्ट्रध्वज में लिपटे हुए हैं। वहीं हरियाणा से आई महिला श्रद्धालु बबीता ने बताया कि धार्मिक स्थल पर देशभक्ति का ऐसा वातावरण भक्तों में देश के प्रति सम्मान और प्रेम की भावना को और प्रगाढ़ करता है।
हारे के सहारे बाबा श्याम की पौराणिक कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 'हारे के सहारे' कहे जाने वाले बाबा श्याम को भगवान कृष्ण का ही अवतार माना जाता है। इस धाम का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथा के अनुसार, पांडव पुत्र भीम के पौत्र बर्बरीक महाभारत के युद्ध में कौरवों की ओर से शामिल होने के लिए प्रस्थान कर रहे थे। बर्बरीक के पास तीन ऐसे दिव्य और अचूक तीर थे, जो संपूर्ण युद्ध का परिणाम पलक झपकते ही बदलने की क्षमता रखते थे। युद्ध की विभीषिका को देखते हुए भगवान कृष्ण ने एक ब्राह्मण का रूप धारण किया और बर्बरीक से उनका शीश दान में मांग लिया। दानवीर बर्बरीक ने बिना किसी संकोच के अपना मस्तक काटकर श्री कृष्ण के चरणों में अर्पित कर दिया। बर्बरीक के इस महान त्याग से प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलयुग में उन्हें कृष्ण के 'श्याम' नाम से पूजा जाएगा और वे संसार के समस्त निराश व हारे हुए लोगों का सहारा बनेंगे।



















