झारखंड के गोड्डा जिले के शिवपुर इलाके में स्थित बाबा रत्नेश्वर नाथ धाम मंदिर में सावन के पवित्र महीने के दौरान श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। करीब चार सौ वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक शिव मंदिर की अपनी एक खास धार्मिक महत्ता है। ऐसी गहरी मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से भगवान शंकर की आराधना करता है, उसे पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। इसी विशेष मान्यता के कारण इस पावन स्थल का नाम बाबा रत्नेश्वर नाथ पड़ा है।
एक ही प्रांगण में तीन स्वरूपों की पूजा
मंदिर के पुजारी विवेकानंद ठाकुर के अनुसार, सावन के हर एक सोमवार को इस मंदिर परिसर में दस हजार से अधिक भक्त जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के वास्ते आते हैं। इस प्राचीन मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां तीन अलग-अलग शिवलिंगों यानी बाबा रत्नेश्वर नाथ, बाबा धनेश्वर नाथ और बाबा कपलेश्वर नाथ की एक साथ पूजा की जाती है, जो इसे पूरे जिले में पूरी तरह से अद्वितीय बनाती है।
इतिहास और इलाके की पहचान
स्थानीय निवासी सुरजीत झा बताते हैं कि बीते समय में यह मंदिर घने जंगलों के बीच घिरा हुआ था और शुरुआती दौर में यहां बहुत कम संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते थे। हालांकि, उन्नीस सौ के दशक के दौरान यहां बनेली स्टेट के राजा की ओर से मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया और एक नए भवन का निर्माण किया गया। इस ऐतिहासिक कार्य के बाद से इस पावन स्थल की ख्याति झारखंड के साथ-साथ पड़ोसी राज्य बिहार के भी कई जिलों तक फैल गई।
भक्तों की आस्था और यात्रा मार्ग
इस मंदिर की बढ़ती प्रसिद्धि का ही परिणाम है कि इस पूरे क्षेत्र का नाम शिवपुर पड़ गया, जो गोड्डा के हटिया चौक से उत्तर दिशा की ओर स्थित है। सावन के पूरे महीने यहां भक्तों का मेला लगा रहता है, लेकिन विशेष तौर पर सोमवार के दिन श्रद्धालु भागलपुर के बरारी गंगा घाट से जल भरकर और पैदल यात्रा कर बाबा को अर्पित करते हैं। शिवपुर का यह मंदिर पूरे गोड्डा जिले का इकलौता ऐसा केंद्र है, जहां तीन ज्योतिर्लिंगों के दर्शन एक साथ होते हैं, जिसके कारण सावन में दूर-दराज से हजारों लोग यहां पहुंचते हैं।



















