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अगस्त 2026 में दिखेगा सूर्यग्रहण, 6 ग्रहों का दुर्लभ संरेखण और पर्सिड्स उल्कापात का विहंगम नजाराविज्ञान
6 अग॰ 2026, 7:07 pm (37 दिन पहले)· 1

अगस्त 2026 में दिखेगा सूर्यग्रहण, 6 ग्रहों का दुर्लभ संरेखण और पर्सिड्स उल्कापात का विहंगम नजारा

अगस्त 2026 का महीना खगोलप्रेमियों के लिए बेहद खास रहने वाला है, जिसमें अमावस की रात पर्सिड्स उल्कापात का चरम, यूरोप में पूर्ण सूर्यग्रहण, छह ग्रहों की परेड और 96 फीसदी चंद्रग्रहण देखने को मिलेगा।

खगोलशास्त्र प्रेमियों और आकाश में होने वाली हलचलों में दिलचस्पी रखने वालों के लिए अगस्त 2026 का महीना किसी अद्भुत उत्सव से कम नहीं होने वाला है। इस दौरान अंतरिक्ष में एक से बढ़कर एक दुर्लभ घटनाएं एक साथ देखने को मिलेंगी। अगस्त के खगोलीय कैलेंडर में साल की सबसे चमकदार उल्कापातों में से एक पर्सिड्स उल्कापात, सूर्यास्त के समय लगने वाला एक भव्य पूर्ण सूर्यग्रहण, भोर के समय छह ग्रहों का एक सीधी रेखा में अद्भुत संरेखण और महीने के अंत में 96 प्रतिशत तक लगने वाला आंशिक चंद्रग्रहण शामिल हैं। इन खगोलीय दृश्यों को देखने के लिए अभी से तैयारियां शुरू करने, दूरबीनों को साफ करने और अपने इलाके के मौसम पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।

पर्सिड्स उल्कापात: अमावस की काली रात में दिखेगा आतिशबाजी का नजारा

हर साल होने वाली खगोलीय घटनाओं में पर्सिड्स उल्कापात को दिसंबर के जेमिनिड्स और जनवरी के क्वाड्रंटिड्स के साथ साल के सबसे तीव्र और चमकदार उल्कापातों में गिना जाता है। हर साल अगस्त के महीने में हमारी पृथ्वी धूमकेतु 109P/स्विफ्ट-टटल द्वारा छोड़े गए मलबे और धूल के कणों के रास्ते से गुजरती है। जब ये सूक्ष्म कण बेहद तेज गति से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं, तो घर्षण के कारण वे जल उठते हैं और रात के अंधेरे में रोशनी की चमकदार लकीरें बनाते हैं।

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साल 2026 में पर्सिड्स उल्कापात का चरम समय बुधवार, 12 अगस्त की रात से लेकर गुरुवार, 13 अगस्त की तड़के तक रहेगा। सबसे खास बात यह है कि इस बार उल्कापात का चरम समय नए चांद यानी अमावस की तिथि के साथ मेल खा रहा है। चंद्रमा की रोशनी न होने के कारण आसमान बेहद डार्क रहेगा, जिससे हल्के से हल्के टूटते तारों और उल्काओं की लकीरों को भी आसानी से देखा जा सकेगा।

हालांकि ये उल्काएं पर्सियस तारामंडल की दिशा से आती हुई प्रतीत होती हैं, लेकिन वास्तविकता में ये आसमान के किसी भी हिस्से में तैरती हुई नजर आ सकती हैं। खगोलविदों का सुझाव है कि पर्सियस तारामंडल की सही दिशा जानने के लिए स्टारगेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल करना चाहिए, जिससे आसमान के सही हिस्से पर नजर टिकाने में आसानी होगी।

सूर्यास्त के समय स्पेन और यूरोप में दिखेगा पूर्ण सूर्यग्रहण

अगस्त 2026 का सबसे मुख्य और ऐतिहासिक खगोलीय आकर्षण 12 अगस्त को लगने वाला पूर्ण सूर्यग्रहण है। यद्यपि पूर्ण सूर्यग्रहण की छाया पृथ्वी पर एक पतली पट्टी के रूप में ही पड़ती है, लेकिन उस पट्टी में आने वाले भाग्यशाली लोग एक दुर्लभ नजारे के गवाह बनेंगे। इस पूर्णता के मार्ग में ग्रीनलैंड, आइसलैंड, पुर्तगाल और स्पेन का कुछ हिस्सा शामिल है। इस मुख्य पट्टी के बाहर स्थित आसपास के विशाल क्षेत्रों में आंशिक सूर्यग्रहण दिखाई देगा।

इस सूर्यग्रहण का समय बेहद नाटकीय और विहंगम दृश्य प्रस्तुत करने वाला है, क्योंकि पूर्णता का क्षण 12 अगस्त को ठीक सूर्यास्त के समय होगा। सूर्य क्षितिज के बेहद करीब रहेगा, जिससे काले चंद्रमा के पीछे से चमकता सूर्य का कोरोना क्षितिज के ठीक ऊपर बेहद खूबसूरत और यादगार दृश्य बनाएगा।

इबेरियन प्रायद्वीप के लिए यह घटना बेहद ऐतिहासिक है, क्योंकि इस क्षेत्र में एक सदी से भी अधिक समय के बाद पहली बार पूर्ण सूर्यग्रहण दिखाई देगा। स्पेन की राजधानी मैड्रिड के अलावा गलीसिया, अस्टुरियास, कैस्टिल एंड लियोन, आरागॉन, कैटालोनिया, वेलेंसिया और बैलेरिक द्वीप समूह जैसे प्रांत पूर्ण सूर्यग्रहण के रास्ते में आएंगे। देश के बाकी हिस्सों में आंशिक सूर्यग्रहण देखने को मिलेगा।

ग्रहण के मार्ग से बाहर रहने वाले लोगों के लिए नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी जैसी प्रमुख वैज्ञानिक संस्थाएं इस घटना का सीधा प्रसारण करेंगी। खगोलविदों की सबसे महत्वपूर्ण चेतावनी यह है कि सुरक्षा उपकरणों के बिना किसी भी स्थिति में नग्न आंखों से सीधे सूर्य की ओर न देखें।

सुबह के समय आसमान में दिखेगा छह ग्रहों का दुर्लभ संरेखण

खगोलीय घटनाओं के इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए 12 अगस्त की सुबह सूर्योदय से ठीक पहले सौरमंडल के छह ग्रह एक सीधी रेखा में दिखाई देंगे। इस दुर्लभ ग्रह संरेखण यानी प्लैनेटरी अलाइनमेंट में बृहस्पति, बुध, मंगल, यूरेनस, शनि और नेपच्यून ग्रह शामिल होंगे।

इस ग्रह संरेखण को देखना उल्कापात की तुलना में थोड़ा अधिक चुनौतीपूर्ण होगा, क्योंकि इनमें से कुछ ग्रहों की रोशनी बेहद धुंधली होती है। यदि मौसम साफ रहा और वायुमंडलीय परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो सूर्योदय से कुछ समय पहले क्षितिज के पास बुध, मंगल और शनि को बिना किसी उपकरण के नग्न आंखों से देखा जा सकेगा। हालांकि, दूर स्थित यूरेनस और नेपच्यून ग्रहों को देखने के लिए टेलीस्कोप या शक्तिशाली दूरबीन की सख्त जरूरत होगी।

27 अगस्त को 96 फीसदी चंद्रग्रहण के साथ होगा महीने का समापन

अगस्त महीने का खगोलीय समापन 27 अगस्त को लगने वाले आंशिक चंद्रग्रहण के साथ होगा, जिसमें चंद्रमा का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की छाया से ढक जाएगा। सूर्यग्रहण के विपरीत, जो पृथ्वी के बहुत छोटे हिस्से पर ही पूर्ण दिखाई देता है, चंद्रग्रहण को पृथ्वी के एक बहुत बड़े भूभाग से देखा जा सकता है।

यह आंशिक चंद्रग्रहण पूरे अमेरिका महाद्वीप में दिखाई देगा, जिसमें उत्तरी कनाडा से लेकर दक्षिण में अर्जेंटीना तक का विशाल क्षेत्र शामिल है। इसके अलावा, चंद्रग्रहण को देखने के लिए आंखों के लिए किसी विशेष सुरक्षा चश्मे या फिल्टर की आवश्यकता नहीं होती है। इसे देखने के लिए बस किसी ऐसे स्थान पर जाने की जरूरत है जहां शहर का प्रकाश प्रदूषण न हो और क्षितिज साफ दिखाई दे। दक्षिणी गोलार्ध के क्षेत्रों में मौजूद दर्शकों को ठंड से बचने के इंतजाम करने की सलाह दी गई है, क्योंकि वहां इस दौरान शीत ऋतु होती है।

सवाल-जवाब

अगस्त 2026 में पर्सिड्स उल्कापात कब अपने चरम पर होगा?
पर्सिड्स उल्कापात का चरम समय 12 अगस्त 2026 की रात से लेकर 13 अगस्त की सुबह तड़के तक रहेगा। इस दौरान अमावस्या होने के कारण अंधेरा रहेगा और उल्काएं साफ दिखेंगी।
12 अगस्त 2026 का पूर्ण सूर्यग्रहण किन देशों में दिखाई देगा?
पूर्ण सूर्यग्रहण का मार्ग स्पेन, पुर्तगाल, आइसलैंड और ग्रीनलैंड के कुछ हिस्सों से होकर गुजरेगा। इसके आसपास के अन्य क्षेत्रों में आंशिक सूर्यग्रहण दिखाई देगा।
12 अगस्त की सुबह कौन से 6 ग्रह एक लाइन में दिखाई देंगे?
सुबह सूर्योदय से ठीक पहले बृहस्पति, बुध, मंगल, यूरेनस, शनि और नेपच्यून ग्रह आसमान में एक सीधी रेखा में संरेखित नजर आएंगे।
27 अगस्त के चंद्रग्रहण को देखने के लिए क्या विशेष चश्मे की आवश्यकता है?
नहीं, चंद्रग्रहण को देखने के लिए किसी सुरक्षात्मक चश्मे की आवश्यकता नहीं होती है। इसे नग्न आंखों से सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है।
पर्सिड्स उल्कापात किस धूमकेतु के मलबे से बनता है?
पर्सिड्स उल्कापात धूमकेतु 109P/स्विफ्ट-टटल (Comet 109P/Swift-Tuttle) द्वारा छोड़े गए धूल और बर्फ के कणों के पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने से बनता है।
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