वैज्ञानिकों को धरती से करीब 26,000 प्रकाश वर्ष दूर एक गैस और धूल के बादल में एरिथ्रुलोज नाम का शक्कर का अणु मिला है, जो चार कार्बन परमाणुओं से बना है और धरती पर कुछ फलों में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। तारों के बीच के इस खाली अंतरिक्ष में किसी असली शक्कर के अणु की पुष्टि पहली बार हुई है, और इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि धरती पर जीवन के लिए जरूरी मूल तत्व आखिर आए कहां से।
घूमते अणु से मिला रेडियो सिग्नल
यह खोज इसी हफ्ते नेचर एस्ट्रोनॉमी पत्रिका में प्रकाशित हुई है। इज़ास्कुन खिमेनेज़ सेरा के नेतृत्व वाली टीम ने स्पेन में लगे रेडियो टेलीस्कोप से मिले आंकड़ों को खंगाला और उसमें एरिथ्रुलोज के घूमने पर निकलने वाली माइक्रोवेव फ्रीक्वेंसी के हल्के निशान को पकड़ा। हर अणु की बनावट अलग होती है, इसलिए घूमने पर निकलने वाला यह सिग्नल भी अलग होता है, और इसी खास सिग्नल ने वैज्ञानिकों को तारे या ग्रह मंडल से कोसों दूर इस शक्कर की मौजूदगी की पुष्टि करने में मदद की।
जीवन के लिए शक्कर क्यों जरूरी है
धरती पर जीवन के लिए शक्कर के अणु बेहद अहम हैं। ये कोशिकाओं को ऊर्जा देते हैं और आरएनए तथा डीएनए का हिस्सा भी होते हैं। इतना अहम होने के बावजूद वैज्ञानिक अब तक ठीक से नहीं समझ पाए हैं कि शुरुआती धरती पर इतनी बड़ी मात्रा में शक्कर के अणु इकट्ठा कैसे हुए कि जीवन शुरू हो सके। एक पुरानी धारणा यह कहती है कि इनमें से कुछ अणु धरती पर बने ही नहीं, बल्कि अरबों साल पहले धरती से टकराई उल्कापिंडों के जरिए यहां पहुंचे।
ब्लैक होल के पास बना केमिकल कारखाना
यह खोज संयोग से नहीं हुई। शोधकर्ताओं ने जानबूझकर अपने टेलीस्कोप का रुख G+0.693−0.027 नाम के आणविक बादल की ओर किया, जिसे आकाशगंगा यानी मिल्की वे के सबसे ज्यादा अणु-समृद्ध इलाकों में गिना जाता है। यह बादल हमारी आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद सुपरमैसिव ब्लैक होल के पास स्थित है, और लगता है कि किसी दूसरे बादल से हुई टक्कर ने इस इलाके को एक तरह का केमिकल कारखाना बना दिया है। वैज्ञानिक इससे पहले यहां अल्कोहल, एल्डिहाइड, यूरिया, इथेनॉलमीन, हाइड्रॉक्सिलमीन और दर्जनों जटिल कार्बनिक अणु खोज चुके हैं। एरिथ्रुलोज अब इसी लंबी सूची में जुड़ने वाला नया नाम है।
बेन्नू एस्टेरॉयड की शक्कर से मिलता जुड़ाव
यह विचार कि कुछ शक्कर धरती पर बनने की बजाय अंतरिक्ष से आई हो सकती है, दिसंबर 2025 में और मजबूत हो गया था, जब वैज्ञानिकों ने पुष्टि की कि बेन्नू एस्टेरॉयड से मिले पदार्थ में राइबोज़ के साथ-साथ कुछ और मोनोसैकेराइड भी मौजूद थे। राइबोज़ आरएनए की बुनियाद बनाने वाली अहम शक्कर है। इस नई स्टडी में मिला अणु एक अलग परिवार, यानी कीटोज परिवार से है, जो धरती पर टैनिंग लोशन और रास्पबेरी जैसी चीजों में पाया जाता है।
स्पेन के दो टेलीस्कोप से मिला सुराग
इस खोज के पीछे के आंकड़े स्पेन में लगे दो रेडियो टेलीस्कोप से आए हैं। इनमें से एक मैड्रिड के उत्तर-पूर्व में स्थित येबेस वेधशाला में है, जबकि दूसरा इंस्टीट्यूट फॉर रेडियो एस्ट्रोनॉमी इन द मिलिमीटर रेंज का है, जो सिएरा नेवादा पहाड़ों में एक स्की रिजॉर्ट के पास मौजूद है।
यह खोज बड़ी है, लेकिन जीवन का सबूत नहीं
विगो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हेसुस आर. फ्लोरेस, जो इस स्टडी का हिस्सा नहीं थे, ने साइंस मीडिया सेंटर स्पेन से कहा कि उल्कापिंडों और एस्टेरॉयड में कई प्रीबायोटिक कार्बनिक अणु मिलना कोई नई बात नहीं है, जिनमें कुछ मोनोसैकेराइड भी शामिल हैं, लेकिन इनका असली स्रोत अब तक साफ नहीं रहा। उनके मुताबिक एक संभावना यह है कि ये अणु सबसे पहले तथाकथित इंटरस्टेलर माध्यम यानी तारों के बीच के अंतरिक्ष में बनते हैं, लेकिन अब तक वहां कोई असली सैकेराइड नहीं मिला था। एरिथ्रुलोज, जो चार कार्बन वाला कीटोमोनोसैकेराइड है, ऐसा पहला अणु है।
फिर भी तारों के बीच शक्कर के अणु मिलना अंतरिक्ष में जीवन होने का सबूत नहीं है, और न ही यह अकेले यह बताता है कि धरती पर जीवन या आरएनए की शुरुआत कैसे हुई। इससे जुड़ी बढ़ती हुई स्टडीज़ जो बात साबित कर रही हैं, वह यह है कि प्रीबायोटिक केमिस्ट्री से जुड़े बुनियादी रासायनिक तत्व सिर्फ धरती तक सीमित नहीं हैं, वे अंतरिक्ष में भी मौजूद हैं। यह स्टडी पहली बार यह भी दिखाती है कि तारों के बीच के अंतरिक्ष में कोई मोनोसैकेराइड असल में बन भी सकता है। एरिथ्रुलोज खुद जीवन के लिए जरूरी अणु नहीं है, लेकिन इसे ऐसे अन्य बुनियादी तत्वों में बदला जा सकता है जो शायद जरूरी हों।











