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लखनऊ चिड़ियाघर में उम्र को मात दे रहे जानवर, 19 साल की शेरनी और 45 पार कर चुका हिप्पो बने मिसालविज्ञान
17 जून 2026, 6:20 pm (43 दिन पहले)· 1

लखनऊ चिड़ियाघर में उम्र को मात दे रहे जानवर, 19 साल की शेरनी और 45 पार कर चुका हिप्पो बने मिसाल

लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान में कई वन्यजीव अपनी प्राकृतिक औसत उम्र से कहीं ज्यादा जी रहे हैं, और इसकी वजह है सुरक्षित माहौल, संतुलित आहार और नियमित चिकित्सकीय देखभाल।

जहां इंसान बेहतर खानपान और उन्नत चिकित्सा के बाद भी लंबी उम्र के लिए जूझ रहा है, वहीं लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान के कुछ जानवर एक उलटी ही कहानी कह रहे हैं। यहां रहने वाले कई वन्यजीव अपनी प्रजाति की तय औसत उम्र को पीछे छोड़कर मानो 'बोनस लाइफ' जी रहे हैं।

कैद नहीं, बल्कि सुरक्षित ठिकाना

आमतौर पर माना जाता है कि चिड़ियाघर की चारदीवारी किसी जानवर के जीवन को सीमित कर देती है। मगर प्राणि उद्यान में हुए अध्ययन की तस्वीर इसके ठीक उलट है। यहां का नियंत्रित और सुरक्षित वातावरण, संतुलित खुराक और समय पर मिलने वाला इलाज कई जानवरों की जिंदगी को जंगल के मुकाबले लंबा बना रहा है।

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जंगल में हर जीव को भोजन की तलाश, शिकारियों के खतरे, मौसम की मार और अपने ही साथियों से होने वाले संघर्ष का सामना करना पड़ता है। यही चुनौतियां उसकी सेहत और उम्र दोनों पर असर डालती हैं। चिड़ियाघर में इन्हीं खतरों से छुटकारा मिल जाने के कारण जानवर ज्यादा वक्त तक स्वस्थ बने रहते हैं।

ये जानवर बने जीती-जागती मिसाल

इसका सबसे बड़ा उदाहरण बब्बर शेरनी वंसुधरा है। वर्ष 2006 में जन्मी वंसुधरा आज 19 साल की हो चुकी है, जबकि बब्बर शेर की औसत उम्र महज 14 से 15 वर्ष मानी जाती है।

ऐसी ही कहानी हिप्पो धीरज की है। वर्ष 1981 में जन्मा धीरज 45 वर्ष की उम्र पार कर चुका है, जबकि हिप्पो सामान्य रूप से 35 से 40 वर्ष तक ही जीवित रहते हैं। वहीं जिराफ सुजाता 25 वर्ष की हो चुकी है, जो इस प्रजाति की 23 से 25 वर्ष की औसत उम्र के ऊपरी छोर पर है। चिंपांजी निकिथा भी 36 वर्ष की उम्र में अपनी प्रजाति की औसत उम्र के बराबर या उससे आगे का जीवन जी रही है।

हर जानवर की अलग खुराक

प्राणि उद्यान प्रशासन के मुताबिक, यहां हर वन्यजीव का आहार उसकी उम्र, वजन और मौसम को ध्यान में रखकर तय किया जाता है। इसके साथ नियमित स्वास्थ्य जांच, समय पर इलाज और विशेषज्ञों की लगातार निगरानी भी मिलती है। यही वजह है कि कई जानवर अपने सामान्य प्राकृतिक जीवनकाल से अधिक समय तक तंदुरुस्त बने रहते हैं।

विशेषज्ञ की राय

लखनऊ चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक डॉ. उत्कर्ष शुक्ला इसे आसान शब्दों में समझाते हैं। उनके अनुसार जैसे मनुष्यों की एक औसत आयु होती है, वैसे ही वन्यजीवों की भी होती है। मिसाल के तौर पर जंगल में बाघ की औसत आयु 14 से 16 वर्ष होती है, लेकिन चिड़ियाघर में रहकर वही बाघ 18 से 19 वर्ष तक जी सकता है।

डॉ. शुक्ला बताते हैं कि जंगल में भोजन, इलाके और अपने अस्तित्व के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ता है, जिसका सीधा असर जानवर की सेहत और जीवनकाल पर पड़ता है। इसके उलट चिड़ियाघर में मिलने वाला सुरक्षित माहौल, बेहतर पोषण और चिकित्सकीय सुविधाएं उसकी उम्र को बढ़ा देती हैं।

लखनऊ चिड़ियाघर के ये जानवर इस बात का जीता-जागता प्रमाण हैं कि सही देखभाल और सुरक्षा किसी भी जीव की जिंदगी को न सिर्फ बेहतर, बल्कि लंबा भी बना सकती है।

सवाल-जवाब

लखनऊ चिड़ियाघर की शेरनी वंसुधरा कितने साल की है?
वर्ष 2006 में जन्मी वंसुधरा आज 19 साल की है, जबकि बब्बर शेर की औसत उम्र 14 से 15 वर्ष मानी जाती है।
हिप्पो धीरज की उम्र कितनी है?
वर्ष 1981 में जन्मा हिप्पो धीरज 45 वर्ष की उम्र पार कर चुका है, जबकि हिप्पो सामान्यतः 35 से 40 वर्ष तक जीते हैं।
चिड़ियाघर के जानवर जंगल से ज्यादा क्यों जीते हैं?
सुरक्षित वातावरण, संतुलित आहार और नियमित चिकित्सकीय देखभाल के कारण, जबकि जंगल में भोजन, शिकारियों और संघर्ष का खतरा उम्र घटाता है।
जंगल और चिड़ियाघर में बाघ की उम्र में कितना फर्क है?
पशु चिकित्सक डॉ. उत्कर्ष शुक्ला के अनुसार जंगल में बाघ की औसत आयु 14 से 16 वर्ष होती है, जबकि चिड़ियाघर में वही बाघ 18 से 19 वर्ष तक जी सकता है।
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