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मछलियों में मिला अनोखा फैलने वाला कैंसर, वैज्ञानिकों ने जताई चिंता लेकिन इंसानों के लिए राहत की बातविज्ञान
27 जुल॰ 2026, 5:04 pm (74 दिन पहले)· 0

मछलियों में मिला अनोखा फैलने वाला कैंसर, वैज्ञानिकों ने जताई चिंता लेकिन इंसानों के लिए राहत की बात

वैज्ञानिकों ने मछलियों में एक दुर्लभ ट्रांसमिसिबल कैंसर का पता लगाया है जो एक जीव से दूसरे जीव में फैल सकता है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि इससे इंसानों को सीधे तौर पर कोई खतरा नहीं है।

वैज्ञानिकों ने हाल ही में जलीय जीवों की दुनिया में एक अनोखी और दुर्लभ खोज की है, जिसके तहत मछलियों में पाए जाने वाले ट्रांसमिसिबल कैंसर को लेकर चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। सामान्य तौर पर कैंसर एक ही शरीर तक सीमित रहता है, लेकिन इस विशेष प्रकार की बीमारी की प्रवृत्ति एक जीव से दूसरे जीव में स्थानांतरित होने की होती है। प्रकृति में इस तरह के संक्रामक कैंसर बहुत ही कम प्रजातियों में दर्ज किए गए हैं, जिसके कारण इस नई खोज ने मरीन बायोलॉजी से जुड़े विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है और इस पर गंभीर अध्ययन शुरू हो चुका है।

क्या होता है ट्रांसमिसिबल कैंसर

पारंपरिक रूप से कैंसर किसी भी व्यक्ति या पशु के शरीर के भीतर उत्पन्न होने वाली बीमारी है जो बाहरी तौर पर किसी अन्य जीव में संक्रमित नहीं होती है। इसके विपरीत, ट्रांसमिसिबल कैंसर एक बेहद दुर्लभ जैविक स्थिति है जिसमें ट्यूमर या कैंसर की कोशिकाएं सीधे तौर पर एक शरीर से निकलकर दूसरे जीव में प्रवेश करती हैं और वहां भी विकसित होने लगती हैं। यह प्रक्रिया किसी वायरस या बैक्टीरिया जैसे सामान्य संक्रामक कारकों के जरिए नहीं फैलती, बल्कि सीधे तौर पर कैंसर कोशिकाओं के प्रसार से काम करती है।

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मछलियों में इस दुर्लभ कैंसर का खुलासा

शोधकर्ताओं ने जब कुछ समुद्री मछलियों के शरीर में पाई जाने वाली असामान्य सेल ग्रोथ और ट्यूमर का गहराई से विश्लेषण किया, तो कई अहम तथ्य सामने आए। जांच के दौरान यह बात स्पष्ट हुई कि अलग-अलग मछलियों के नमूनों में मौजूद कैंसर सेल्स का जेनेटिक प्रोफ़ाइल लगभग एक जैसा ही था। इस समानता से वैज्ञानिकों को यह संकेत मिला कि इन जीवों में बीमारी स्वतंत्र रूप से अलग-अलग पैदा नहीं हुई थी, बल्कि यह किसी एक ही मुख्य स्रोत से अन्य मछलियों में ट्रांसफर हो रही थी।

इंसानों के लिए कितना है जोखिम

इस पूरी खोज के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या यह जलीय बीमारी इंसानों को भी प्रभावित कर सकती है। उपलब्ध विश्लेषण के आधार पर ऐसा कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण या तथ्य मौजूद नहीं है जो यह साबित करे कि मछलियों का यह फैलने वाला कैंसर इंसानों में आ सकता है। इंसानों की शारीरिक बनावट और इम्यून सिस्टम की कार्यप्रणाली पूरी तरह अलग होती है, जो सामान्य परिस्थितियों में ऐसे बाहरी जीवों के कैंसर को टिकने नहीं देती। इसलिए मछली के सेवन करने या उसके संपर्क में आने से इस बीमारी के फैलने का कोई खतरा नहीं है।

क्यों जरूरी है यह वैज्ञानिक अध्ययन

समुद्री जीवों में सामने आई इस नई रिसर्च का दायरा केवल कैंसर की प्रकृति समझने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे यह जानने में भी मदद मिलती है कि जीवों के भीतर कैंसर के प्रति प्रतिरोधक क्षमता कैसे विकसित होती है। इसके साथ ही यह अध्ययन समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का आकलन करने के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि ऐसी बीमारियां बड़े पैमाने पर फैलती हैं, तो जलीय जीवों की विशिष्ट आबादी को खतरा पैदा हो सकता है, जिस पर वैज्ञानिक लगातार नजर बनाए हुए हैं।

सवाल-जवाब

ट्रांसमिसिबल कैंसर क्या होता है?
यह एक दुर्लभ प्रकार का कैंसर है जिसमें कैंसर कोशिकाएं सीधे एक जीव से दूसरे जीव में फैलती हैं और वहां विकसित होने लगती हैं।
क्या यह मछलियों का कैंसर इंसानों में फैल सकता है?
वैज्ञानिक प्रमाणों के अनुसार, इस कैंसर से इंसानों को सीधे तौर पर कोई खतरा नहीं है क्योंकि इंसानों की जैविक बनावट और इम्यून सिस्टम इसे रोकते हैं।
मछलियों में इस कैंसर का पता कैसे चला?
शोधकर्ताओं ने समुद्री मछलियों के ट्यूमर और असामान्य सेल ग्रोथ का अध्ययन किया, जिससे पता चला कि कई मछलियों में कैंसर सेल्स का जेनेटिक प्रोफाइल एक जैसा था।
क्या मछली खाने से यह बीमारी हो सकती है?
नहीं, ऐसा कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं है जो यह बताए कि यह कैंसर मछली खाने या उसके संपर्क में आने से फैलता है।
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