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26 जुल॰ 2026, 5:52 pm (2 घंटे पहले)· 3

कोलंबिया के जंगलों में पाया जाने वाला यह पीला मेंढक कई इंसानों की जान ले सकता है

कोलंबिया के प्रशांत तटीय वर्षावनों में रहने वाला गोल्डन पॉइजन डार्ट फ्रॉग दुनिया का सबसे विषैला उभयचर माना जाता है, जिसके शरीर का न्यूरोटॉक्सिन कई इंसानों को मार सकता है।

कोलंबिया के घने प्रशांत तटीय वर्षावनों में एक ऐसा नन्हा जीव रहता है, जिसकी घातक क्षमता दुनिया के सबसे खतरनाक सांपों से भी कहीं अधिक है। जब भी धरती के सबसे जहरीले जीवों की बात होती है, तो आमतौर पर लोगों का ध्यान सांपों की तरफ जाता है। लेकिन वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चलता है कि गोल्डन पॉइजन डार्ट फ्रॉग, जिसे वैज्ञानिक भाषा में फाइलोबेट्स टेरिबिलिस कहा जाता है, इस पृथ्वी पर मौजूद सबसे विषैले प्राणियों में से एक है। महज पांच से छह सेंटीमीटर लंबे इस छोटे से मेंढक का चमकीला पीला या सुनहरा रंग कोई साधारण खूबसूरती नहीं है, बल्कि यह प्रकृति की एक गंभीर चेतावनी है जो दूसरे जीवों को इससे दूर रहने का संदेश देती है।

त्वचा से निकलने वाला घातक न्यूरोटॉक्सिन

इस मेंढक की सबसे बड़ी खासियत इसके शरीर से निकलने वाला खतरनाक जहर है, जिसे बैट्राकोटॉक्सिन कहा जाता है। यह एक अत्यंत प्रभावशाली न्यूरोटॉक्सिन है, जो सीधे तौर पर शरीर के तंत्रिका तंत्र और मांसपेशियों की कार्यप्रणाली को ठप कर देता है। विज्ञान के जानकारों के अनुसार, एक वयस्क गोल्डन पॉइजन डार्ट फ्रॉग की त्वचा पर मौजूद जहर की कुल मात्रा कई वयस्क इंसानों को मौत की नींद सुलाने के लिए काफी है। हालांकि, यह जीव सांपों की तरह किसी पर हमला नहीं करता और न ही यह डंक मारकर या काटकर अपने शिकार के शरीर में जहर छोड़ता है।

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क्या केवल स्पर्श करने से ही चली जाती है जान?

इंटरनेट और सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर अक्सर यह भ्रामक दावा किया जाता है कि इस मेंढक को हाथ लगाते ही इंसान की मौत हो जाती है। वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक यह बात पूरी तरह सच नहीं है। यह मेंढक बहुत ही शांत स्वभाव का होता है और सामान्य परिस्थितियों में इंसानों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है। असल खतरा तब पैदा होता है जब इसकी गीली त्वचा पर मौजूद जहर हमारे शरीर के किसी कटे हुए हिस्से, घाव, आंख, मुंह या श्लेष्मा झिल्ली के संपर्क में आ जाता है। यही कारण है कि जंगलों में सफर करने वाले लोगों को सलाह दी जाती है कि वे चमकीले रंगों वाले इन मेंढकों से एक सुरक्षित दूरी बनाकर रखें और इन्हें छूने की कोशिश बिल्कुल न करें।

विषैले भोजन से मिलता है जानलेवा जहर

इस मेंढक के जीवन से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प पहलू इसकी खुराक से संबंधित है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह जीव अपने शरीर के भीतर खुद इस विष का निर्माण नहीं करता है। इसके बजाय, जंगल में रहने के दौरान यह जिन विशेष प्रकार की चींटियों, छोटे बीटल्स और अन्य आर्थ्रोपोड्स को अपना आहार बनाता है, उन्हीं के जरिए इसके शरीर में यह खतरनाक रसायन जमा होता है। इसी वजह से जब इन मेंढकों को चिड़ियाघरों या किसी अन्य कृत्रिम और नियंत्रित वातावरण में पाला जाता है, तो वे उतने विषैले नहीं रह जाते क्योंकि वहां उन्हें प्राकृतिक भोजन नहीं मिल पाता है।

नामकरण का इतिहास और संरक्षण के प्रयास

इस अनोखे जीव को पॉइजन डार्ट फ्रॉग नाम मिलने के पीछे कोलंबिया के स्थानीय आदिवासी समुदायों का इतिहास जुड़ा हुआ है। सदियों से यहां रहने वाले कुछ स्वदेशी कबीले शिकार करने के लिए इसके शरीर से निकलने वाले जहर का इस्तेमाल अपने ब्लोगन डार्ट की नोक पर करते थे, जिससे निशाना लगते ही शिकार तुरंत बेदम हो जाता था। आज के समय में इस प्रजाति के अस्तित्व पर गहरा संकट मंडरा रहा है, जिसके कारण इसे बचाने के विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। कई देशों में इस अनोखे मेंढक को नुकसान पहुंचाने या इसका अवैध व्यापार करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

सवाल-जवाब

गोल्डन पॉइजन डार्ट फ्रॉग मुख्य रूप से कहां पाया जाता है?
यह अत्यंत विषैला मेंढक मुख्य रूप से कोलंबिया के प्रशांत तटीय वर्षावनों में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है।
इस मेंढक का आकार कितना होता है?
इस नन्हे मेंढक की कुल लंबाई लगभग 5 से 6 सेंटीमीटर के बीच होती है।
गोल्डन पॉइजन डार्ट फ्रॉग की त्वचा से निकलने वाले जहर को क्या कहते हैं?
इसकी त्वचा से निकलने वाले शक्तिशाली जहर को बैट्राकोटॉक्सिन कहा जाता है, जो एक खतरनाक न्यूरोटॉक्सिन है।
क्या इस मेंढक को महज छूने से ही किसी इंसान की तुरंत मौत हो सकती है?
नहीं, सामान्य स्पर्श से तत्काल मौत नहीं होती है। खतरा तब होता है जब यह विष शरीर के किसी घाव, आंख, मुंह या श्लेष्मा झिल्ली के संपर्क में आता है।
चिड़ियाघर में रहने वाले गोल्डन पॉइजन डार्ट फ्रॉग कम विषैले क्यों होते हैं?
ऐसा इसलिए है क्योंकि चिड़ियाघरों या नियंत्रित माहौल में उन्हें जंगली चींटियां और बीटल जैसा प्राकृतिक भोजन नहीं मिलता, जिससे उनके शरीर में विष एकत्र नहीं हो पाता।
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