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रोशनी से जमने वाला तरल बायोपॉलिमर अब कटी नसों को जोड़ने में टांकों की जगह लेगाविज्ञान
24 जून 2026, 11:05 am (45 दिन पहले)· 2

रोशनी से जमने वाला तरल बायोपॉलिमर अब कटी नसों को जोड़ने में टांकों की जगह लेगा

एक फ्रांसीसी कंपनी ने ऐसा तरल पदार्थ बनाया है जो रोशनी पड़ते ही ऊतकों से चिपक जाता है और कटी हुई नसों को तब तक थामे रखता है जब तक वे खुद ठीक न हो जाएं, फिर शरीर में घुलकर गायब हो जाता है।

नसों को जोड़ने के लिए अब तक सर्जनों को बेहद बारीक टांके लगाने पड़ते थे, लेकिन फ्रांस की कंपनी टिश्यम एक ऐसा तरीका सामने लाई है जो इस झंझट को खत्म कर सकता है। कंपनी ने एक खास तरल बायोपॉलिमर तैयार किया है, जो रोशनी पड़ते ही ऊतक से चिपक जाता है और कटी हुई नस के दोनों सिरों को एक जगह थामे रखता है। यह तरल फैटी एसिड और ग्लिसरॉल से बना है, दोनों ही चीजें शरीर में पहले से मौजूद रहती हैं। नस जब खुद की मरम्मत कर लेती है, तो यह पदार्थ शरीर में घुलकर गायब हो जाता है और नसें बरकरार रहती हैं।

नसों के कटने पर क्या होता है

पेरिफेरल नसें शरीर के तंत्रिका तंत्र का वह बड़ा जाल हैं, जो दिमाग और रीढ़ की हड्डी से निकलकर पूरे शरीर तक फैली होती हैं। चाकू या मशीनों से लगी चोटों में अक्सर ये नसें कट जाती हैं। ऐसे में नस के दोनों कटे सिरों को एक जगह स्थिर रखना जरूरी होता है, ताकि वह धीरे-धीरे खुद को ठीक कर सके। अगर ऐसा न हो, तो मरीज को झनझनाहट, सुन्नपन या बिजली के झटके जैसा तीखा दर्द झेलना पड़ सकता है।

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कटी नसों को आपस में जोड़ने के लिए माइक्रो-सूचर यानी बेहद महीन टांके लगाने पड़ते हैं। टिश्यम की सह-संस्थापक और डिप्टी सीईओ मारिया परेरा इसे बहुत नाजुक तकनीक बताती हैं। उनका कहना है, "हम पेरिफेरल नसों को एक जैसे और बेहतर तरीके से, कम तकलीफ के साथ और मरीजों के लिए बेहतर नतीजों के साथ तैयार करने का नया रास्ता देने की कोशिश कर रहे हैं।"

उंगलियों की नसों पर ट्रायल के नतीजे

कंपनी ने अमेरिका में 12 मरीजों पर एक ट्रायल किया, जिनकी उंगलियों की नसें चोट में कट गई थीं। इलाज के बाद सभी 12 मरीजों ने अपनी उंगलियों में तापमान, दर्द, बनावट और हल्के स्पर्श को दोबारा महसूस करने की क्षमता पा ली। दूसरी तकनीकों में यह आंकड़ा 80 प्रतिशत से थोड़ा ही ऊपर रहता है। एक साल बाद भी किसी मरीज ने न दर्द की शिकायत की और न ही डिवाइस से जुड़ी कोई परेशानी सामने आई। अमेरिका में सर्जन इस इलाज को पहले से खरीद सकते हैं।

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की फ्रंटियर टेक्नोलॉजीज लैबोरेटरी की निदेशक, सर्जन और मटेरियल साइंटिस्ट सिमरन चना का कहना है, "भले ही अभी और सबूतों की जरूरत है, लेकिन आधुनिक सर्जन के हाथ में इतने उन्नत बायोमटेरियल और रिजेनरेटिव तकनीकें आते देखना रोमांचक है।" चना का टिश्यम के काम से कोई जुड़ाव नहीं है।

बड़ा निवेश और आगे की योजना

कंपनी ने अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए वेंचर कैपिटल फर्मों और फैमिली ऑफिसों से €30 मिलियन का निजी निवेश जुटाया है। इसके साथ ही यूरोपीय संघ की कर्ज देने वाली शाखा यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक से €30 मिलियन का कर्ज भी हासिल किया है। पिछले साल इस उत्पाद को FDA की मार्केटिंग मंजूरी मिल चुकी है, और इसका निर्माण उत्तरी फ्रांस में जारी रहेगा।

इस पैसे का इस्तेमाल इस तकनीक को दूसरी समस्याओं पर लागू करने में भी होगा। टिश्यम की योजना अमेरिका में हर्निया के इलाज के बाद शरीर को ठीक होने में मदद करने के लिए करीब 200 मरीजों पर ट्रायल करने की है। हर्निया में सर्जन उभरे हुए अंग या ऊतक को मांसपेशी की दीवार के पीछे वापस धकेलते हैं और फिर टांकों और जाली से उस हिस्से को मजबूत करते हैं। परेरा, जो कंपनी की चीफ इनोवेशन ऑफिसर भी हैं, बताती हैं कि अभी टांके लगाने के तरीके में कुछ असमानता रह जाती है, जिसका असर नतीजों पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि टिश्यम का इलाज इसमें एकरूपता ला सकता है, जिससे रिकवरी बेहतर हो सकती है।

परेरा एक यूरोपीय अध्ययन के नतीजों को अंतिम रूप दे रही हैं, जिसमें हर्निया की मरम्मत करा रहे 78 मरीजों पर इस इलाज को परखा गया। उनके मुताबिक सर्जन हर बार, यानी 100 प्रतिशत मामलों में टिश्यम के इस पदार्थ को लगा पाए। मरीजों में दर्द, रिकवरी और रोजमर्रा की गतिविधियों के लिहाज से बेहतर जीवन के संकेत दिखे और हर्निया दोबारा होने की दर भी कम रही।

दिल की सर्जरी पर भी काम

टिश्यम दिल और रक्तवाहिकाओं की मरम्मत के लिए भी उत्पाद विकसित कर रही है। दरअसल यही इस तकनीक का पहला मकसद था, जो परेरा ने करीब 20 साल पहले बायोइंजीनियरिंग में पीएचडी करते वक्त सोचा था। कंपनी अब अपने कार्डियोवैस्कुलर उत्पाद के लिए अमेरिका में एक रैंडमाइज्ड पिवटल ट्रायल शुरू करने की तैयारी में है, जिसे इसी नए फंडिंग से सहारा मिलेगा।

सवाल-जवाब

टिश्यम का यह तरल पदार्थ किस चीज से बना है?
यह एक बायोपॉलिमर है जो फैटी एसिड और ग्लिसरॉल से बना है, और ये दोनों चीजें शरीर में पहले से मौजूद रहती हैं।
यह पदार्थ नसों को कैसे जोड़ता है?
रोशनी पड़ते ही यह ऊतक से चिपक जाता है और कटी नस के दोनों सिरों को एक जगह थामे रखता है, फिर ठीक होने के बाद शरीर में घुल जाता है।
उंगलियों की नसों के ट्रायल में कितने मरीज शामिल थे और क्या नतीजा रहा?
अमेरिका में 12 मरीजों पर ट्रायल हुआ और सभी 12 ने तापमान, दर्द, बनावट और हल्के स्पर्श को महसूस करने की क्षमता दोबारा पा ली।
क्या यह इलाज अभी उपलब्ध है?
हां, अमेरिका में सर्जन इसे पहले से खरीद सकते हैं और पिछले साल इसे FDA की मार्केटिंग मंजूरी मिल चुकी है।
कंपनी ने कितना पैसा जुटाया है?
टिश्यम ने वेंचर कैपिटल और फैमिली ऑफिसों से €30 मिलियन और यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक से €30 मिलियन का कर्ज जुटाया है।
टिश्यम इस तकनीक का और कहां इस्तेमाल करना चाहती है?
कंपनी हर्निया के इलाज और दिल व रक्तवाहिकाओं की मरम्मत के लिए भी इस तकनीक को विकसित कर रही है।
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