अंतरिक्ष की गहराइयों को देखने वाले वैज्ञानिकों के लिए यह ब्रह्मांड हमेशा से रहस्यों से भरा रहा है। मौजूदा अनुमानों के मुताबिक, संपूर्ण ब्रह्मांड का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा डार्क एनर्जी से बना है, जो अंतरिक्ष को लगातार फैलाने का काम कर रही है। वहीं, लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा डार्क मैटर के रूप में मौजूद है, जो आकाशगंगाओं को बांधकर रखता है। हालांकि शाब्दिक रूप से कहें तो ये दोनों ही चीजें उतनी डार्क नहीं हैं जितनी कि अदृश्य हैं। ये न तो प्रकाश उत्सर्जित करती हैं और न ही उसे परावर्तित या अवशोषित करती हैं, जिसकी वजह से इन्हें सीधे तौर पर देखना अब तक असंभव साबित हुआ है।
डार्क एनर्जी और डार्क मैटर का जुड़ाव
आमतौर पर वैज्ञानिक डार्क एनर्जी और डार्क मैटर को दो अलग-अलग इकाइयां मानते आए हैं और इनके बीच की एकमात्र समानता यह है कि ये दोनों ही पकड़ में नहीं आती हैं। लेकिन हालिया खगोलशास्त्रीय अवलोकनों ने वैज्ञानिकों को इस पुराने विचार पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है, जिसके तहत दोनों को भौतिक रूप से आपस में जुड़ा हुआ माना जाता है। साल 2024 में डार्क एनर्जी स्पेक्ट्रोस्कोपिक इंस्ट्रूमेंट यानी DESI के शोध दल ने कुछ ऐसे प्रमाण जुटाए जिनसे पता चला कि डार्क एनर्जी की ताकत में स्थिरता नहीं रही है। इसके बाद 2025 में दोगुने से अधिक डेटा पर आधारित एक अन्य अध्ययन ने भी यही निष्कर्ष निकाला कि डार्क एनर्जी समय के साथ बदल रही है। इन परिणामों से संकेत मिला कि करीब 2 अरब साल पहले अपने अधिकतम स्तर पर पहुंचने के बाद डार्क एनर्जी कमजोर होने लगी होगी। हालांकि इससे यह भी अंदेशा हुआ कि शुरुआती दौर में यह ऊर्जा और संरक्षण के नियमों को चुनौती देते हुए और अधिक मजबूत हो गई होगी।
फैंटम रेजिम और क्वांटम क्रोमोडायनामिक्स
शोधकर्ताओं ने डार्क एनर्जी के इस चरण को फैंटम रेजिम का नाम दिया है और इसकी तुलना ढलान पर ऊपर की ओर लुढ़कती हुई गेंद से की है जो केवल तभी संभव है जब उस पर गुरुत्वाकर्षण के अलावा किसी अन्य बल का प्रभाव हो। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, इरविन के कण भौतिक विज्ञानी टिम टैट ने कहा कि यह कल्पना की जा सकती है कि एक तत्व दूसरे को प्रभावित कर रहा हो और यह कोई हैरानी की बात नहीं होगी यदि ये डार्क यूनिवर्स के किसी एकीकृत सिद्धांत का हिस्सा हों। इस दिशा में पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के भौतिक विज्ञानी जस्टिन खौरी ने 2005 में भी इस संभावना पर अध्ययन किया था। दो दशक बाद DESI के नए आंकड़ों के आधार पर खौरी ने अपने सहयोगियों मेंग-क्सियांग लिन और मार्क ट्रोडेन के साथ मिलकर क्वांटम क्रोमोडायनामिक्स के आधार पर डार्क इंटरैक्शन का एक मॉडल तैयार किया, जिसमें डार्क एनर्जी का घनत्व और डार्क मैटर का द्रव्यमान दोनों एक साथ बदलते हैं।
हबल टेंशन और कॉस्मोलॉजी की गुत्थी
जनवरी में फिजिकल रिव्यू डी जर्नल में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन के अनुसार, ब्रह्मांड के इतिहास के किसी पिछले दौर में डार्क मैटर ने अपनी ऊर्जा का एक छोटा हिस्सा डार्क एनर्जी को ट्रांसफर किया होगा। यूनिवर्सिटी ऑफ मोंटपेलिए की ब्रह्मांड विज्ञानी एल्सा टेइक्सीरा ने बताया कि डार्क मैटर ब्रह्मांड के फैलाव पर मुख्य ब्रेक का काम करता है, इसलिए उस ब्रेक को थोड़ा ढीला करने से ब्रह्मांड की गति तेज हो गई होगी। इसके अलावा, फ्रांस के नेशनल सेंटर फॉर वैज्ञानिक रिसर्च के भौतिक विज्ञानी डेविड एंड्रिओट ने मई 2025 में अपना एक मॉडल पेश किया जिसमें बताया गया कि डार्क मैटर के द्रव्यमान में होने वाला हर बदलाव डार्क एनर्जी के दायरे में आता है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के भौतिक विज्ञानी कुमरुण वाफा ने भी इस बात से सहमति जताई कि डार्क एनर्जी की गणना डार्क मैटर के बिना करना गलत है। इन मॉडलों की खूबी यह है कि यह कॉस्मोलॉजी की एक पुरानी समस्या यानी हबल टेंशन को सुलझाने में मदद करते हैं। शुरुआती ब्रह्मांड और हालिया ब्रह्मांड के फैलाव की दर में लगभग 9 प्रतिशत का अंतर पाया गया है, जिसे यह नया मॉडल दूर कर सकता है।
स्ट्रिंग थ्योरी और डार्क डाइमेंशन का सिद्धांत
यदि डार्क एनर्जी और डार्क मैटर आपस में क्रिया करते हैं, तो इसका अर्थ यह हो सकता है कि दोनों का उद्गम एक ही है। स्ट्रिंग थ्योरी पर चल रहे काम से इस बात के संकेत मिलते हैं कि ये दोनों अवधारणाएं किस प्रकार जुड़ी हो सकती हैं। वाफा और उनके साथियों ने 2019 में यह निष्कर्ष निकाला था कि डार्क मैटर के कणों का द्रव्यमान भी समय के साथ बदल सकता है, जिसके बाद उन्होंने 2022 में सुझाव दिया कि डार्क मैटर और डार्क एनर्जी का संबंध किसी डार्क डाइमेंशन से हो सकता है। स्ट्रिंग थ्योरी अंतरिक्ष के तीन और समय के एक आयाम के अलावा छह या सात अतिरिक्त आयामों के होने की बात कहती है। शोधकर्ताओं ने प्रस्ताव दिया कि यह डार्क डाइमेंशन अन्य आयामों की तुलना में काफी बड़ा यानी लगभग एक माइक्रोन के बराबर हो सकता है। गुरुत्वाकर्षण बल देने वाले सैद्धांतिक कण यानी ग्रैविटन इस बड़े डार्क डाइमेंशन में रिस सकते हैं और डार्क मैटर की भूमिका निभा सकते हैं।
भविष्य के परीक्षण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के भौतिक विज्ञानी जॉर्जेस ओबिएड ने कहा कि इस परिदृश्य में डार्क एनर्जी और डार्क मैटर के बीच एक स्वाभाविक जुड़ाव है। जुलाई 2025 के एक पेपर में ओबिएड, वाफा, एलेक बेड्रोया और डेविड वू ने पाया कि उनका मॉडल DESI के डेटा से मेल खाता है। उनके मॉडल के अनुसार डार्क एनर्जी की ताकत और डार्क मैटर का द्रव्यमान समय के साथ कम होगा। ओबिएड ने बताया कि इस बदलाव की गति इतनी धीमी है कि हमें इसे देखने के लिए ब्रह्मांड की पूरी उम्र का इंतजार करना पड़ा। यदि डार्क मैटर डार्क एनर्जी से जुड़ा हुआ है, तो इसके कण गुरुत्वाकर्षण से अलग किसी नए लंबे दायरे के बल के जरिए एक-दूसरे से इंटरैक्ट कर सकते हैं। इसके परीक्षण के लिए खगोलीय तरीके तलाशे जा रहे हैं। मार्क कामिओन्कोव्स्की और माइकल केस्डेन जैसे भौतिकविदों ने पहले ही ऐसे परीक्षणों पर काम किया है, जिससे यह पता चलता है कि अमूर्त सैद्धांतिक कार्य और खगोलीय अवलोकन अब एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं। ओबिएड का मानना है कि वैज्ञानिक सच्चाई तक पहुंचने के लिए विभिन्न तरीकों से प्रयास करना ही सही रास्ता है।



















