फिल्म हनुमान अंश की चर्चा के बीच कैंची धाम से जुड़े संत का सांसारिक जीवन भी सुर्खियों में लौट आया है। हर साल लाखों भक्त उनका आशीर्वाद पाने के लिए कैंची धाम पहुंचते हैं और मन्नत पूरी होने की कहानियां सुनाते हैं, लेकिन उनके अपने घर, पत्नी और तीन संतानों की कहानी बहुत कम लोगों को मालूम है। आइए इस कम चर्चित पारिवारिक इतिहास को सिलसिलेवार समझते हैं।
असली नाम पंडित लक्ष्मीनारायण शर्मा, कम उम्र में हुआ विवाह
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक संत का जन्म का नाम पंडित लक्ष्मीनारायण शर्मा था। छोटी उम्र में ही उनका विवाह रामबेटी शर्मा से करा दिया गया था, जिन्हें कुछ जगहों पर राम बेटी देवी नाम से भी दर्ज किया गया है। दोनों की गृहस्थी में आगे चलकर दो बेटे और एक बेटी ने जन्म लिया। परिवार बढ़ने के साथ ही संत का रुझान धीरे-धीरे सांसारिक जिम्मेदारियों से हटकर भक्ति और साधना की तरफ बढ़ता चला गया, और आगे चलकर वे कैंची धाम से जुड़ गए।
बड़े बेटे अनेक सिंह शर्मा, भोपाल में परिवार, 2021 में निधन
पहली संतान के रूप में बेटे अनेक सिंह शर्मा का जन्म हुआ था। वे अपनी पत्नी और बच्चों के साथ भोपाल शहर में बस गए और वहीं जीवन बिताया। मिली जानकारी के अनुसार नवंबर 2021 में उनका निधन हो गया। उनके परिवार में एक बेटा और एक बेटी हैं। बेटे धनंजय शर्मा पेशे से डॉक्टर रहे हैं और सरकारी नौकरी से रिटायर होने के बाद फिलहाल भोपाल में ही रहते हैं।
छोटे बेटे धर्म नारायण शर्मा, वन विभाग की नौकरी और वृंदावन में साधना
दूसरे बेटे धर्म नारायण शर्मा ने करियर की शुरुआत वन विभाग में रेंजर की नौकरी से की थी। सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने वृंदावन को अपना ठिकाना बनाया और बाकी जीवन वहीं आध्यात्मिक साधना में बिताया। अप्रैल 2021 में उनका निधन हो गया। उनकी छह बेटियां हैं, सुनीता, अर्चना, वंदना, भावना, ऋतु और ऋचा, जो आज अलग-अलग शहरों में अपने परिवार के साथ रह रही हैं।
बेटी गिरिजा देवी उर्फ गिरिजा भाटेले, आगरा में रहती हैं
तीसरी और आखिरी संतान बेटी गिरिजा देवी थीं, जिन्हें आगे चलकर गिरिजा भाटेले नाम से भी पहचाना जाने लगा। जानकारी के मुताबिक वे फिलहाल आगरा में रहती हैं। कहा जाता है कि उन्होंने भी सांसारिक मोह-माया छोड़कर आध्यात्मिक राह पकड़ ली और उनका जीवन हनुमान भक्ति व सेवा को समर्पित हो गया। परिवार की तीनों संतानों में गिरिजा भाटेले अकेली ऐसी संतान हैं जिनके अभी जीवित होने की जानकारी सामने आई है, जबकि दोनों भाइयों का निधन हो चुका है। यही वजह है कि संत के परिवार को जानने वालों के लिए गिरिजा भाटेले का नाम खास मायने रखता है।
पत्नी रामबेटी शर्मा का 1995 में निधन
संत जब आध्यात्मिक मार्ग पर पूरी तरह आगे बढ़ गए, तब घर-परिवार संभालने की जिम्मेदारी उनकी पत्नी रामबेटी शर्मा के कंधों पर आ गई। बेटी गिरिजा से जुड़ी एक बातचीत में भी मां के साथ बिताए पुराने पारिवारिक पलों का जिक्र मिलता है। परिवार से जुड़े स्रोतों के मुताबिक रामबेटी शर्मा का निधन 15 जून 1995 को हुआ था, इसलिए उन्हें अभी जीवित बताना सही नहीं होगा। कुल मिलाकर देखें तो संत के परिवार में आज सिर्फ बेटी गिरिजा भाटेले के जीवित होने की पुष्टि होती है, जबकि पत्नी और दोनों बेटों का निधन हो चुका है। फिर भी उनकी विरासत भक्तों की आस्था और परिवार की यादों में आज भी जीवित है।


















