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संत प्रेमानंद महाराज की चेतावनी: नशे और गलत संगति में डूबती किशोर पीढ़ी को सिर्फ अध्यात्म ही बचा सकता हैअध्यात्म
16 जून 2026, 4:14 pm (106 दिन पहले)· 3

संत प्रेमानंद महाराज की चेतावनी: नशे और गलत संगति में डूबती किशोर पीढ़ी को सिर्फ अध्यात्म ही बचा सकता है

वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज ने एक 12वीं के छात्र की पीड़ा सुनाते हुए बताया कि आज हजारों बच्चे नशे और गलत आदतों में फंस रहे हैं, और इससे निकलने का असली रास्ता आध्यात्मिकता है।

मथुरा से जुड़े वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज अपने प्रवचनों और जीवन को लेकर दी जाने वाली सीखों के कारण अक्सर चर्चा में रहते हैं। वे लोगों को सही ढंग से जीवन जीने का तरीका समझाते हैं और खासकर बच्चों की परवरिश तथा अच्छे संस्कारों पर माता-पिता का ध्यान बार-बार खींचते हैं। हाल ही में उन्होंने आज के बच्चों में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति और बिगड़ती आदतों पर गहरी चिंता जताई और इससे उबरने का उपाय भी सुझाया।

एक छात्र की पीड़ा जिसने सबको झकझोरा

महाराज जी ने एक ऐसे बच्चे का जिक्र किया जो उनके पास पहुंचा था। उस बच्चे ने बताया कि वह नौवीं कक्षा से ही शराब और गलत संगति की चपेट में आ गया था और अब वह 12वीं कक्षा में पढ़ रहा है। अपनी बेबसी बयां करते हुए लड़के ने कहा, ‘इस समय मेरी हालत ऐसी हो गई है कि लगता है, पता नहीं कब खुद को नष्ट कर लूं’। संत प्रेमानंद महाराज ने स्पष्ट किया कि यह किसी एक बच्चे की कहानी नहीं है, बल्कि आज हजारों बच्चे ठीक इसी हालत से गुजर रहे हैं।

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आखिर क्यों बिगड़ रहे हैं बच्चे

इसकी जड़ की ओर इशारा करते हुए संत ने कहा कि बच्चों में गलत आचरण पनपने की सबसे बड़ी वजह आध्यात्मिकता का अभाव है। उनका तर्क था कि जब माता-पिता के पास खुद आध्यात्मिक ज्ञान नहीं है, तो वे अपने बच्चों को इसकी शिक्षा कहां से देंगे। उन्होंने एक आम उदाहरण देते हुए कहा कि स्कूल में अगर शिक्षक किसी बच्चे को डांट देते हैं, तो माता-पिता उल्टा शिक्षक को ही डांटने लगते हैं। इससे बच्चे का हौसला और बढ़ जाता है और वह गलत राह की ओर खिसकने लगता है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन बच्चों को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए, उनके साथ माता-पिता अवहेलना भरी बातें करते हैं और कई बार हिंसक व्यवहार तक अपना लेते हैं।

गलत रास्ते से लौटने का उपाय

संत प्रेमानंद महाराज ने आगाह किया कि आध्यात्म के बिना बच्चे लगातार गलत दिशा में बढ़ते जाएंगे और अंततः चोरी-चकारी जैसे कामों में उतर जाएंगे। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में किसी के गले से चेन या कानों से कुंडल खींचते वक्त उन्हें रत्ती भर भी दया नहीं आएगी कि सामने वाले को कितनी तकलीफ हो रही होगी। उनका साफ संदेश था कि जो नई पीढ़ी बिगड़ रही है, उसे सुधारने का एकमात्र भरोसेमंद रास्ता आध्यात्म ही है।

सवाल-जवाब

संत प्रेमानंद महाराज के पास आए बच्चे ने क्या बताया था?
उसने कहा कि वह नौवीं कक्षा से शराब और गलत संगति में फंस गया था और अब 12वीं में है, तथा उसे डर है कि पता नहीं कब वह खुद को नष्ट कर ले।
महाराज जी के अनुसार बच्चों के बिगड़ने की सबसे बड़ी वजह क्या है?
उनके मुताबिक सबसे बड़ी वजह आध्यात्मिकता का अभाव है, क्योंकि जब माता-पिता के पास खुद आध्यात्मिक ज्ञान नहीं होता तो वे बच्चों को सही शिक्षा नहीं दे पाते।
स्कूल में डांट को लेकर महाराज जी ने क्या उदाहरण दिया?
उन्होंने कहा कि शिक्षक के बच्चे को डांटने पर माता-पिता उल्टा शिक्षक को ही डांटने लगते हैं, जिससे बच्चे का हौसला बढ़ता है और वह गलत राह की ओर बढ़ता है।
संत प्रेमानंद महाराज ने इसका समाधान क्या बताया?
उन्होंने कहा कि बिगड़ती नई पीढ़ी को सुधारने का एकमात्र रास्ता आध्यात्म है।
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