उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के एक छोटे से ग्रामीण इलाके से निकलकर अंतरराष्ट्रीय ट्रैक पर अपनी चमक बिखेरने वाली धाविका प्राची चौधरी ने इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया है। जापान में संपन्न हुए 2026 एशियन गेम्स में प्राची ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड और ब्रोंज मेडल अपने नाम किए। इस ताजा दोहरी कामयाबी के साथ ही उनके नाम अब एशियन गेम्स के तीनों प्रतिष्ठित पदक दर्ज हो चुके हैं। इससे पहले साल 2023 में चीन के हांगझोउ में आयोजित एशियन गेम्स के दौरान उन्होंने रिले रेस में भारत के लिए सिल्वर मेडल हासिल किया था। अपने बुलंद हौसले और कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने पूरे देश, अपने गृह राज्य, जिले और अपने परिवार को गर्व महसूस कराया है।
गोल्ड का संकल्प और डीएसपी बनने की अनूठी जिद
प्राची चौधरी और उनके स्वजनों का शुरू से सपना रहा है कि वह पुलिस महकमे में पुलिस उपाधीक्षक यानी डीएसपी के पद पर आसीन हों। साल 2023 के एशियन गेम्स में जब उन्होंने सिल्वर मेडल जीता था, तब उन्हें यह पद हासिल करने का अवसर नहीं मिल सका था। उत्तर प्रदेश सरकार की खेल नीति के मुताबिक स्वर्ण पदक जीतने वाले एथलीट को ही सीधे डीएसपी पद पर नियुक्त किया जाता है। जब प्राची को इस नियम की पूरी जानकारी हुई, तो उन्होंने अपने मन में ठान लिया कि अगली बार वह हर हाल में स्वर्ण पदक ही जीतेंगी।
प्रतियोगिता के लिए रवाना होने से पहले उनका आत्मविश्वास इतना मजबूत था कि उन्होंने नतीजे आने से पहले ही डीएसपी की वर्दी सिलने के लिए अपना नाप टेलर को दे दिया था। घर से निकलते समय उन्होंने अपनी माताजी से स्पष्ट शब्दों में वादा किया था कि इस बार जब वह वापस लौटेंगी, तो एक डीएसपी अफसर बनकर ही घर में कदम रखेंगी। ट्रैक पर उतरने से पहले खुद की मेहनत पर ऐसा अडिग भरोसा बहुत कम खिलाड़ियों में देखने को मिलता है, और प्राची ने अपनी इस बात को सच साबित कर दिखाया।
कच्ची पगडंडियों पर नंगे पांव शुरू हुआ था सफर
एक सामान्य किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली प्राची चौधरी का खेल का सफर बेहद कठिनाइयों से भरा रहा है। महज 10 वर्ष की उम्र से ही वह अपने गांव की धूल भरी कच्ची सड़कों और रास्तों पर नंगे पांव दौड़ लगाकर अभ्यास किया करती थीं। उस दौर में उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन सीमित संसाधनों के बावजूद घर के लोगों ने बेटी के जुनून को समझा और उसे लगातार हौसला दिया।
ग्रामीण परिवेश से निकलकर खेल की दुनिया के सर्वोच्च मंच तक पहुंचना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने यह साबित कर दिखाया कि गांव की बेटियों में किसी से कम हुनर नहीं होता। सही अवसर, निरंतर प्रोत्साहन और पारिवारिक सहयोग मिलने पर बेटियां विश्व पटल पर तिरंगा लहरा सकती हैं और अपने समूचे क्षेत्र का मान बढ़ा सकती हैं।
सहारनपुर में भव्य स्वागत और वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारी
एशियन गेम्स में ऐतिहासिक सफलता हासिल करने के बाद जब प्राची चौधरी अपने गृह जनपद सहारनपुर पहुंचीं, तो वहां उनका जोरदार और भव्य स्वागत किया गया। पदकों के साथ लौटी अपनी लाडली का स्वागत करने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े। उनके गांव और घर में इस समय जश्न का माहौल बना हुआ है और परिवार में खुशियां मनाई जा रही हैं।
अपनी इस शानदार उपलब्धि पर खुशी जताते हुए प्राची चौधरी ने बताया कि दो नए पदक हासिल करने के बाद वह बेहद उत्साहित हैं। पहले उनके पास केवल एक सिल्वर मेडल था, लेकिन अब ब्रोंज और गोल्ड के साथ एशियन गेम्स के तीनों पदकों का पूरा सेट उनके पास मौजूद है। हालांकि, वह इस उपलब्धि पर रुकने वाली नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एशियन गेम्स का पड़ाव पूरा होने के बाद अब उनका पूरा ध्यान अगले साल आयोजित होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप पर टिक गया है और वह जल्द ही उसकी तैयारियों में जुटने जा रही हैं।

















