एशियन गेम्स 2026 के मैट पर भारतीय पहलवान सुजीत कलकल ने वह कर दिखाया जो लंबे समय तक कुश्ती प्रेमियों की यादों में ताजा रहेगा। पुरुषों की 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल स्पर्धा के खिताबी मुकाबले में उन्होंने ताजिकिस्तान के शीर्ष पहलवान अब्दुलमजीद कुडिएव को बेहद रोमांचक संघर्ष में 10-9 के अंतर से शिकस्त दी। यह मुकाबला सुजीत के संयम और मानसिक मजबूती की सबसे बड़ी परीक्षा साबित हुआ। मुकाबले के शुरुआती दौर में भारतीय पहलवान पूरी तरह बैकफुट पर दिखाई दे रहे थे और पहले हाफ की समाप्ति तक स्कोर 2-9 था। सात अंकों के विशाल अंतर से पिछड़ने के बावजूद सुजीत ने हिम्मत नहीं हारी और दूसरे हाफ में आक्रामक दांव-पेच लगाते हुए लगातार आठ अंक बटोरे। इस सनसनीखेज पलटवार ने न केवल भारत की झोली में एशियन गेम्स 2026 का 15वां स्वर्ण पदक डाला, बल्कि मौजूदा खेलों में कुश्ती का पहला गोल्ड मेडल भी पक्का कर दिया। साल 2018 के बाद से एशियन गेम्स में भारत का कुश्ती में यह पहला स्वर्ण पदक है। यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग ने भी इस शानदार मुकाबले पर सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि 9-2 के बड़े अंतर से पिछड़ने के बाद सुजीत ने 10-9 से अविश्वसनीय जीत दर्ज की।
किताबों की दुनिया छोड़ अखाड़े की राह
हरियाणा के खेल परिवेश से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा लहराने वाले सुजीत कलकल चरखी दादरी जिले के इमलौता गांव के निवासी हैं। 23 वर्षीय सुजीत केवल मैट पर ही महारथी नहीं रहे हैं, बल्कि स्कूल के दिनों में वे पढ़ाई में भी बेहद अव्वल थे। उन्होंने जब अपनी 12वीं कक्षा की परीक्षा पास की थी, तब उनके अंक 90 प्रतिशत आए थे। इतनी शानदार अकादमिक सफलता के बाद आमतौर पर परिवारों में यही धारणा बनती है कि बच्चा तकनीकी शिक्षा की राह चुनेगा। परिवार के लोगों को भी उम्मीद थी कि सुजीत अपनी मेधा के बल पर जेईई की तैयारी करेंगे और भविष्य में इंजीनियर बनेंगे। इसके बावजूद सुजीत का दिल कभी कॉलेज की किताबों या तकनीकी फॉर्मूलों में नहीं अटका। बचपन से ही उनका एक ही ख्वाब था कि वे अखाड़े में उतरें और देश का प्रतिनिधित्व करें। उन्होंने स्पष्ट फैसला लिया कि वे इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा के पीछे भागने के बजाय अपनी पूरी ताकत कुश्ती की बारीकियों को निखारने में लगाएंगे। उनके इस साहसिक निर्णय पर माता-पिता और परिजनों ने भी पूरा भरोसा जताया और उनका हर कदम पर साथ दिया।
विश्व स्तर पर लगातार मजबूत होती पकड़
एशियन गेम्स 2026 का यह स्वर्ण पदक कोई अचानक मिला संयोग नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों की कड़ी तपस्या का परिणाम है। इस महाद्वीपीय खेल से पहले सुजीत के करियर का सबसे बड़ा मुकाम पिछले साल आयोजित अंडर-23 विश्व चैंपियनशिप में आया था। वहां उन्होंने पुरुषों के 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग के फाइनल में उज्बेकिस्तान के उमिदजोन जलोलोव को एकतरफा अंदाज में 10-0 से तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर हराकर विश्व खिताब जीता था। उस चैंपियनशिप से पहले सुजीत के नाम कोई वैश्विक खिताब दर्ज नहीं था, लेकिन एशियाई महाद्वीप के जूनियर स्तर पर वे पहले ही अपना लोहा मनवा चुके थे। सुजीत ने इससे पहले अंडर-23 एशियाई चैंपियनशिप में दो बार (वर्ष 2022 और वर्ष 2025 में) स्वर्ण पदक अपने नाम किए थे। इसके अलावा उन्होंने साल 2022 में अंडर-20 एशियाई चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक भी हासिल किया था। हर आयु वर्ग में लगातार पदक जीतकर खुद को साबित करने वाले सुजीत ने अब सीनियर स्तर के सबसे बड़े मंच पर स्वर्णिम सफलता हासिल कर अपने फैसले को सही साबित कर दिया है।



















