एशियाई खेलों में महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में पदक की दौड़ से बाहर होने के बाद भारतीय निशानेबाज मनु भाकर काफी संयमित दिखाई दे रही थीं, लेकिन जैसे ही उनके दिवंगत मेंटर जसपाल राणा का जिक्र आया, वह अपने आंसुओं को रोक नहीं पाईं। पिस्टल स्पर्धा के फाइनल में बुधवार को मनु भाकर पांचवें पायदान पर रहीं। यह मुकाबला उनके लिए केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं था, बल्कि पिछले कुछ महीनों के उस भारी मानसिक और भावनात्मक दौर का अंत भी था, जब उन्होंने अपने मार्गदर्शक राणा को खो दिया था। दिल का दौरा पड़ने से जब राणा का अचानक निधन हुआ, तब वह महज 49 वर्ष के थे।
पोडियम से चूकने के बाद मेंटर की सीख ने किया भावुक
फाइनल राउंड के समापन के बाद जब मनु भाकर से इस दिग्गज निशानेबाज के बारे में सवाल किया गया, तो उनके द्वारा दिए गए जीवन और खेल के फलसफों की चर्चा करते हुए उनकी आंखें भर आईं। जून में जसपाल राणा के आकस्मिक निधन के बाद यह पहला बड़ा बहु-खेल आयोजन था जिसमें मनु भाकर भाग ले रही थीं। खेल के शुरुआती दौर से ही उनके करियर की दिशा तय करने में राणा की भूमिका बेहद निर्णायक रही थी।
“जब कोई व्यक्ति आपके जीवन का एक बड़ा हिस्सा रहा हो, तो वह रहता है।”
मनु भाकर ने उस शख्सियत को गहराई से याद किया जिसने 2024 के पेरिस ओलंपिक में उन्हें दो ऐतिहासिक कांस्य पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि ऐसे रिश्ते और वर्षों की सीख कभी जेहन से नहीं मिटती, बल्कि वह हमेशा खिलाड़ी के भीतर जीवित रहती है।
एशियाई खेलों के स्वर्णिम इतिहास और प्रक्रिया पर जोर
जसपाल राणा खुद एशियाई खेलों के इतिहास में एक अप्रतिम हस्ती रहे हैं। उन्होंने महाद्वीपीय खेलों के तीन अलग-अलग संस्करणों में कुल आठ पदक अपने नाम किए थे, जिनमें से चार स्वर्ण पदक शामिल थे। विशेष रूप से 2006 के दोहा एशियाई खेलों में उनके तीन स्वर्ण पदक निशानेबाजी के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हैं, जहां उन्होंने तेज बुखार से जूझने के बावजूद निशानेबाजी रेंज में उतरकर देश को जीत दिलाई थी।
एक कोच के रूप में जसपाल राणा का सबसे प्रमुख और स्थायी सबक यह था कि खिलाड़ी को नतीजे की चिंता किए बिना केवल अपनी प्रक्रिया पर एकाग्र रहना चाहिए। मनु भाकर ने एशियाई खेलों के इस कड़े फाइनल में भी इसी फलसफे को लागू करने का प्रयास किया। हालांकि, फाइनल के दौरान लगे 8.9 के एक निराशाजनक निशाने ने उनके पदक जीतने के समीकरणों को गहरा झटका दिया और उन्हें पांचवें स्थान पर धकेल दिया।
चैंपियन मानसिकता और मार्गदर्शन की यादें
मनु भाकर ने जसपाल राणा को एक सच्चा एशियाई चैंपियन और अपने क्षेत्र का निर्विवाद रूप से सर्वश्रेष्ठ व्यक्तित्व करार दिया। उन्होंने 2018 के जकार्ता एशियाई खेलों का स्मरण करते हुए बताया कि उस दौरान वह एक बेजोड़ चैंपियन की तरह मौजूद थे। मनु ने याद किया कि वह उनके कुशल मार्गदर्शन में जापान में मुकाबला करने को लेकर बेहद उत्साहित थीं। बातचीत के दौरान खुद को संभालने के लिए मनु थोड़ी देर के लिए रुकीं और कहा कि राणा द्वारा कही गई हर बात में गहरा अर्थ छिपा होता था, और उनके कई संदेश तो सीधे तौर पर निशानेबाजी से परे जीवन जीने की कला से जुड़े थे।
भोपाल की तैयारियों से मिला हौसला और आगे का सफर
पांचवें स्थान पर सिमटने के कारण भले ही मनु भाकर इन खेलों की 10 मीटर व्यक्तिगत एयर पिस्टल में पोडियम फिनिश हासिल नहीं कर सकीं, लेकिन उन्होंने इस मुकाबले से भविष्य के लिए कई सकारात्मक पहलू निकाले हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि एशियाई खेलों के फाइनल का उनका यह प्रदर्शन उन ट्रायल्स से कहीं बेहतर रहा जो उन्होंने इस महाकुंभ में आने से ठीक पहले भोपाल में मॉक फाइनल के दौरान दर्ज किए थे।
मनु भाकर ने कहा कि भोपाल की तुलना में यहां का प्रदर्शन थोड़ा बेहतर रहा है और उन्हें पूरा यकीन है कि वह आने वाले समय में अपनी कमियों को दूर करते हुए और भी निखार ला सकती हैं। इसके साथ ही उन्होंने अपनी पूरी सपोर्ट टीम के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपनी वर्तमान कोच और सर्बियाई विशेषज्ञ जेलेना अरुनोविक के समर्पण की विशेष सराहना की। मनु ने स्पष्ट किया कि दर्शक केवल रेंज पर खड़े खिलाड़ी को देखते हैं, जबकि पर्दे के पीछे पूरी टीम दिन-रात पसीना बहाती है। उन्होंने कहा कि कोच जेलेना हर कदम पर बेहद धैर्यवान और परिश्रमी रही हैं, जिससे उन्हें अपनी लय बनाए रखने में मदद मिली है।



















