एशियाई खेलों के पहले ही दिन भारतीय एथलीटों ने अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर पदक तालिका में देश की मौजूदगी दर्ज करा दी। इस उद्घाटन दिवस पर सबसे चमकदार सितारा 27 वर्षीय निशानेबाज इलावेनिल वालारिवन साबित हुईं, जिन्होंने देश को दो पदक दिलाए। निशानेबाजी रेंज के अलावा क्रिकेट मैदान, हॉकी टर्फ और मार्शल आर्ट्स रिंग से भी भारतीय प्रशंसकों के लिए उत्साहवर्धक नतीजे सामने आए। भारतीय दल ने कई स्पर्धाओं में एकतरफा अंदाज में जीत हासिल कर आगामी दिनों के लिए मजबूत उम्मीदें जगाई हैं।
इलावेनिल वालारिवन का 10 मीटर एयर राइफल में दोहरा कमाल
निशानेबाजी प्रतियोगिता के 10 मीटर एयर राइफल वर्ग में इलावेनिल वालारिवन ने अपने असाधारण कौशल का परिचय दिया। उन्होंने सबसे पहले टीम स्पर्धा के अंतर्गत सोनम उत्तम मस्कर तथा पहली बार खेल रहीं विदार्सा विनोद के साथ मिलकर दूसरे स्थान पर रहते हुए रजत पदक पर निशाना साधा। इसके बाद व्यक्तिगत वर्ग के फाइनल में भी उन्होंने अपनी शानदार फॉर्म जारी रखी और देश की झोली में एक और चांदी का तमगा डाला।
पिछले दो महाद्वीपीय आयोजनों में पोडियम से वंचित रहने वाली इलावेनिल के लिए यह लम्हा बेहद भावुक और खास रहा। व्यक्तिगत फाइनल में उन्होंने 252.4 अंक जुटाए और शीर्ष पर रहने वाली जापान की हिनाता ताइची से केवल 0.6 अंक पीछे रह गईं। जापानी निशानेबाज ने 253.0 अंक का नया एशियाई खेल रिकॉर्ड कायम करते हुए सोने का तमगा हासिल किया, जबकि दक्षिण कोरिया की बान ह्योजिन को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। इलावेनिल मुकाबले के अधिकांश हिस्से में बढ़त बनाए रखने में कामयाब रही थीं, किंतु अंतिम दौर के तीन शॉट में हुई चूक के कारण वह शीर्ष स्थान से फिसल गईं।
एमएमए रिंग में सुचिका तरियाल ने रच दिया इतिहास
निशानेबाजी के बाद भारतीय खेमे में सबसे बड़ी ऐतिहासिक कामयाबी मिक्स मार्शल आर्ट्स से आई। 36 वर्ष की सुचिका तरियाल ने महिलाओं के पारंपरिक 60 किलोग्राम भारवर्ग के क्वार्टर फाइनल मैच में मंगोलिया की अल्तानचिमेग बैगलमा को 2-0 के स्पष्ट अंतर से मात दी। सेमीफाइनल में पहुंचते ही उन्होंने कम से कम कांस्य पदक अपने नाम पक्का कर लिया।
एशियाई खेलों के इतिहास में मिक्स मार्शल आर्ट्स को पहली दफा शामिल किया गया है, जिसके चलते सुचिका की यह उपलब्धि भारतीय खेल इतिहास में दर्ज हो गई। जूडो के गलियारों से निकलकर एमएमए का रुख करने वाली सुचिका घरेलू और एशियाई दोनों स्तरों पर पूर्व में भी अपना लोहा मनवा चुकी हैं। अब इस बड़े महाद्वीपीय मंच पर पदक सुनिश्चित कर उन्होंने अपनी प्रतिभा को एक बार फिर साबित कर दिया है।
शेफाली के धुआंधार शतक से बांग्लादेश को धोकर महिला क्रिकेट टीम फाइनल में
क्रिकेट के अखाड़े में भारतीय महिला एकादश का दबदबा पूरी तरह कायम दिखा। सेमीफाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने बांग्लादेश के खिलाफ 114 रनों से एकतरफा जीत दर्ज करते हुए खिताबी मुकाबले का टिकट हासिल किया। सिक्का जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला करने वाली भारतीय टीम ने चार विकेट के नुकसान पर 195 रनों का बड़ा स्कोर खड़ा किया। इस विशाल स्कोर की सूत्रधार युवा बल्लेबाज शेफाली वर्मा रहीं, जिन्होंने केवल 49 गेंदों पर अपने टी20 अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला शतक जड़ दिया।
शीर्ष क्रम में स्मृति मंधाना ने 37 रनों का सहयोग दिया, जबकि कप्तान हरमनप्रीत कौर के बल्ले से 40 रन निकले। बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी विरोधी टीम भारतीय आक्रमण के सामने टिक नहीं पाई और 15.4 ओवरों में महज 81 रन बनाकर ढेर हो गई। गेंदबाजी मोर्चे पर नंदनी शर्मा और दीप्ति शर्मा ने घातक गेंदबाजी करते हुए तीन-तीन बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा। इस धमाकेदार जीत के साथ टीम खिताब की रक्षा करने की दहलीज पर पहुंच गई है, जहां फाइनल में उनका मुकाबला श्रीलंका से तय है।
हॉकी के मैदान पर बरसे 32 गोल, उज्बेकिस्तान और इंडोनेशिया पस्त
भारतीय हॉकी टीमों ने अपने अभियान का आगाज बेहद आक्रामक अंदाज में किया। दोनों राष्ट्रीय टीमों ने अपने ग्रुप चरण के मैचों में कुल मिलाकर 32 बार विपक्षी गोल पोस्ट को भेद डाला। महिला हॉकी टीम ने अपने पहले मुकाबले में उज्बेकिस्तान को 19-0 के विशाल अंतर से धोया। इस मैच की स्टार खिलाड़ी दीपिका सेहरावत रहीं, जिन्होंने अकेले ही आठ गोल अपने खाते में जोड़े।
दूसरी ओर, पुरुष हॉकी टीम ने भी इंडोनेशिया के खिलाफ कोई रहम नहीं दिखाया और 13-1 के बड़े अंतर से मुकाबला जीता। भारत के लिए दिलप्रीत सिंह ने शानदार खेल दिखाते हुए सर्वाधिक चार गोल दागे। दोनों ही मुकाबलों में मिले इन एकतरफा परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय हॉकी दल इस बार केवल स्वर्ण पदक के लक्ष्य के साथ मैदान पर उतरा है।
बैडमिंटन में कजाकिस्तान को 3-0 से रौंदा, टेबल टेनिस में महिला टीम की वापसी
बैडमिंटन के कोर्ट पर भारतीय महिला टीम ने कजाकिस्तान को 3-0 के अंतर से धूल चटाकर क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह सुरक्षित कर ली। क्वार्टर फाइनल में भारत का सामना मेजबान जापान की मजबूत टीम से होना है। अनुभवी खिलाड़ी पीवी सिंधु ने सीधे गेमों में मुकाबला जीतकर टीम को शुरुआती बढ़त दिलाई। इसके बाद युवा खिलाड़ी उन्नति हुड्डा और तन्वी शर्मा ने अपने-अपने एकल मैच जीतकर टीम को बिना कोई गेम गंवाए जीत दिला दी।
टेबल टेनिस के एरीना में भारतीय दल के लिए दिन मिला-जुला साबित हुआ। पुरुष और महिला दोनों वर्गों में भारत ने अपने पहले मैच में इंडोनेशिया को 3-0 से शिकस्त दी। इसके उपरांत महिला टीम ने सिंगापुर के विरुद्ध रोमांचक अंदाज में पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए 3-2 से मुकाबला अपने नाम किया। एक समय 1-2 से पीछे चल रही भारतीय टीम के लिए श्रीजा अकुला ने स्कोर बराबर किया और फिर पांचवें मैच में यशस्विनी घोरपड़े ने लॉय मिंग को पछाड़कर भारत की झोली में जीत डाल दी। इसके विपरीत, पुरुष टेबल टेनिस टीम को ईरान से 0-3 से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। मानुष शाह, मानव ठक्कर और हरमीत देसाई अपने-अपने मैच हार गए। अब दोनों भारतीय टीमों की अगली भिड़ंत पाकिस्तान के साथ निर्धारित है।
टेकबॉल और तैराकी में हाथ लगी निराशा
शानदार सफलताओं के बीच कुछ स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों को कड़वे परिणाम भी झेलने पड़े। टेकबॉल में भारत की क्विंसी डी’सूजा दो कांस्य पदकों के बेहद करीब आकर चूक गईं। उन्हें महज पांच मिनट के अंतराल पर दो पदक मैचों में हार का सामना करना पड़ा। महिला एकल के मुकाबले में जापान की युइना सकामोतो ने उन्हें 11-12, 11-12 के बेहद नजदीकी अंतर से हराया। इसके तुरंत बाद वह मोहम्मद अनस बेग के साथ मिक्स्ड डबल्स के कांस्य पदक मैच में उतरीं, जहां वियतनाम की जोड़ी ने भारतीय जोड़ी को 2-0 से हरा दिया।
जलीय स्पर्धाओं में तैराक ऋषभ दास पुरुषों के 100 मीटर बैकस्ट्रोक फाइनल में 54.77 सेकंड का समय निकालकर छठे स्थान पर रहे। मार्शल आर्ट्स की बात करें तो वुशू के चांगक्वान फाइनल में सूरज सिंह मयांगलमबम 11वें स्थान पर रहे, जबकि सांडा वर्ग के राउंड ऑफ 16 में अर्पणा और विक्रांत बलियान दोनों को पराजय का मुंह देखना पड़ा।



















