जापान के काकामिगाहारा स्थित गिफू प्रेफेक्चरल ग्रीन स्टेडियम की टर्फ पर रविवार को भारतीय हॉकी का एक बड़ा इम्तिहान शुरू हो रहा है। देश की महिला और पुरुष, दोनों सीनियर राष्ट्रीय टीमें महाद्वीपीय प्रतियोगिता में अपने अभियान का आगाज करने जा रही हैं। इस पूरे टूर्नामेंट का सबसे बड़ा दांव केवल पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल करना नहीं है, बल्कि 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में सीधे प्रवेश की गारंटी पाना भी है। नियमों के मुताबिक प्रतियोगिता में सोने का तमगा जीतने वाले दल को सीधे तौर पर अगले ओलंपिक का टिकट थमा दिया जाता है, जिससे आगे होने वाले जटिल क्वालिफायर मुकाबलों का झंझट खत्म हो जाता है। ऐसे में हरमनप्रीत सिंह की अगुवाई वाली पुरुष एकादश और सलीमा टेटे की कप्तानी वाली महिला टीम दोनों के लिए यह मौका बेहद अहम बन चुका है।
मैदान पर उतरने का समय और शुरुआती प्रतिद्वंद्वी
रविवार के कार्यक्रम में सबसे पहले महिला टीम एक्शन में दिखाई देगी। पूल बी में शामिल भारतीय महिलाओं की पहली भिड़ंत उज्बेकिस्तान की टीम के साथ सुबह 7:30 बजे तय की गई है। इसके कुछ ही घंटों बाद, इसी मैदान पर दोपहर 11:30 बजे पुरुष टीम अपने पूल ए के अभियान की शुरुआत करने उतरेगी, जहां उसका पहला मुकाबला इंडोनेशिया से होगा। दोनों टीमों की प्राथमिक रणनीति यही रहेगी कि वे कमजोर माने जाने वाले शुरुआती विरोधियों के खिलाफ बड़े अंतर से जीत दर्ज करें, ताकि गोल अंतर के लिहाज से आगे की राह आसान रहे और खिलाड़ियों की लय भी मजबूत हो सके।
पुरुष टीम के सामने वापसी की कड़ी चुनौती
कप्तान हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी में खेल रही भारतीय पुरुष टीम के लिए यह मुकाबला अपनी साख को दोबारा स्थापित करने का मंच है। हाल ही में समाप्त हुए 2026 विश्व कप में टीम का प्रदर्शन काफी फीका रहा था, जहां भारतीय दल आठवें स्थान पर लुढ़क गया था और सेमीफाइनल के दरवाजे भी उसके लिए बंद हो गए थे। उस नाकामी के बाद दल की रणनीतियों और मैदानी अनुशासन पर कई सवाल उठे थे। मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने स्वीकार किया है कि खिलाड़ियों ने अपनी पिछली गलतियों से सबक लिया है और अब वे एक नए संकल्प के साथ मैदान में उतर रहे हैं। लगातार दो ओलंपिक कांस्य पदक जीतने वाली टीम के पास अनुभव की कोई कमी नहीं है, लेकिन विश्व कप के झटके से उबरकर जीत की पटरी पर लौटना उनकी सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
एशियाई खेलों में भारतीय पुरुषों का गौरवशाली रिकॉर्ड
महाद्वीपीय इतिहास पर नजर डालें तो भारतीय पुरुषों का रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है। भारत ने 1966, 1998, 2014 और 2022 के संस्करणों में चार बार इस प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। बड़े टूर्नामेंटों में दबाव झेलने का उनका पुराना अनुभव उन्हें इस बार भी खिताब का सबसे मजबूत दावेदार बनाता है। हालांकि, ग्रुप स्तर पर उन्हें सतर्क रहने की आवश्यकता होगी। पूल ए के समीकरणों को देखें तो भारत को इंडोनेशिया के अलावा दक्षिण कोरिया, जापान, बांग्लादेश और श्रीलंका के साथ रखा गया है। शुरुआती चरण के बाद भारत को चार बार के एशियाई विजेता दक्षिण कोरिया और 2018 के चैंपियन जापान के खिलाफ तीखी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। सेमीफाइनल में आसान राह तय करने के लिए भारतीय पुरुषों को बिना किसी उलटफेर का शिकार हुए अपने ग्रुप में शीर्ष पर रहना होगा।
सलीमा टेटे की अगुवाई में महिला टीम का बढ़ा हुआ हौसला
दूसरी तरफ, सलीमा टेटे के नेतृत्व में खेल रही भारतीय महिला टीम बिल्कुल अलग मानसिक स्थिति में मैदान में आ रही है। 2026 के विश्व कप में भारतीय महिलाओं ने ऐतिहासिक खेल दिखाते हुए पांचवां स्थान अर्जित किया था, जो पिछले 52 वर्षों के इतिहास में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। हालांकि वे विश्व कप के अंतिम चार में जगह नहीं बना सकी थीं, लेकिन शीर्ष वैश्विक टीमों को कड़ी टक्कर देकर उन्होंने अपना लोहा मनवाया था। कोच मारिजने का मानना है कि पिछली सफलता अब अतीत बन चुकी है और दल का पूरा ध्यान मौजूदा चुनौतियों पर केंद्रित है।
स्वर्ण पदक के 44 साल पुराने सूखे को खत्म करने की जंग
महिला टीम के लिए इस प्रतियोगिता में इतिहास को दोहराने की बड़ी चुनौती है। भारतीय महिलाओं ने इस महाद्वीपीय खेल महाकुंभ में एकमात्र स्वर्ण पदक 1982 के संस्करण में जीता था। तब से लेकर अब तक चार दशकों से अधिक समय बीत चुका है और भारतीय महिलाएं दोबारा पीला तमगा नहीं छू सकी हैं। 2023 के हांगझोउ खेलों में भी उन्हें कांस्य पदक पर ही संतोष करना पड़ा था। इसके अलावा 2020 के टोक्यो ओलंपिक में चौथे स्थान पर रहकर इतिहास रचने वाली यह टीम 2024 के पेरिस ओलंपिक में जगह बनाने से चूक गई थी। ऐसे में 2028 लॉस एंजिल्स खेलों का टिकट सीधे हासिल करना सलीमा टेटे की टीम का सबसे बड़ा लक्ष्य है।
पूल बी के समीकरण और चीन की मजबूत दीवार
महिला वर्ग के पूल बी में भारत के साथ उज्बेकिस्तान, इंडोनेशिया, थाईलैंड, जापान और सिंगापुर की टीमें रखी गई हैं। इस वर्ग में भारत का मुख्य मुकाबला चीन की ताकतवर टीम से माना जा रहा है। चीनी महिला टीम चार बार की एशियाई चैंपियन होने के साथ-साथ मौजूदा डिफेंडिंग चैंपियन भी है और ओलंपिक खेलों की रजत पदक विजेता भी रह चुकी है। ऐसे में भारतीय महिला टीम को फाइनल तक पहुंचने और स्वर्ण पदक जीतने के लिए अपने खेल को उच्चतम स्तर पर ले जाना होगा।



















