दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए गाय और भैंस की देखभाल में डॉ. संजीव नेहरू के बताए उपाय करें शामिलसीमा पाहुजा संभालेंगी दिशा सालियान मौत मामले की कमान, सीबीआई ने दर्ज की एफआईआरअक्टूबर मासिक राशिफल: वृषभ और कर्क समेत इन प्रमुख राशियों के लिए धन लाभ और तरक्की के प्रबल योगतमिलनाडु में गरमाई राजनीति, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर विवादित टिप्पणी के बाद डीएमके नेताओं पर एफआईआर दर्जजींद से चली देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन खाली, 2600 की क्षमता पर रोजाना सिर्फ 80 यात्री कर रहे सफरहिमाचल प्रदेश के झीड़ी में जारी रहेगा फ्लाईओवर का निर्माण, हाईकोर्ट ने रोक लगाने से किया साफ इनकारप्रवर्तन निदेशालय ने अमित गांगुली को किया गिरफ्तार, 100 करोड़ से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग और जमीन पर कब्जे का है मामलाचित्रकूट जिला अस्पताल में 88 लाख की लागत से बनेगा मॉड्यूलर ओटी, गर्भवती महिलाओं को मिलेंगी आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएंमक्का के दक्षिण में सऊदी बलों ने मार गिराया संदिग्ध ड्रोन, हूती विद्रोहियों पर लगा नौ साल बाद दोबारा पवित्र शहर को निशाना बनाने का आरोपमुंबई के पूर्वी उपनगरों में पेडेस्ट्रियन फर्स्ट मुहिम के तहत 30 प्रमुख सड़कों के फुटपाथ बदलेगी बीएमसी
दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए गाय और भैंस की देखभाल में डॉ. संजीव नेहरू के बताए उपाय करें शामिलभारत
16 सित॰ 2026, 1:52 pm (51 मिनट पहले)· 1

दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए गाय और भैंस की देखभाल में डॉ. संजीव नेहरू के बताए उपाय करें शामिल

गाय और भैंस में दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए संतुलित आहार, ताजा पानी, समय पर टीकाकरण और पेट के कीड़ों की दवा देना बेहद जरूरी है।

गाय और भैंस के दूध उत्पादन में अचानक गिरावट आना पशुपालकों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय होता है। कई बार सही खानपान, स्वच्छता और उचित दिनचर्या की अनदेखी के कारण पशुओं की दूध देने की क्षमता पर सीधा असर पड़ता है। आगरा के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. संजीव नेहरू ने पशुपालकों को सलाह दी है कि अगर वे अपने गाय और भैंस का स्वास्थ्य बेहतर रखने के साथ-साथ दूध उत्पादन बढ़ाना चाहते हैं, तो उन्हें दैनिक रखरखाव और पोषण प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना होगा। सही समय पर सही देखभाल से न केवल पशु स्वस्थ रहते हैं बल्कि उनकी दूध उत्पादन क्षमता में भी बढ़ोतरी होती है।

पर्याप्त जल आपूर्ति और संतुलित आहार का महत्व

पशुओं के शरीर में पोषण और तरल पदार्थों का सही संतुलन बनाए रखना दूध उत्पादन का सबसे पहला नियम है। डॉ. संजीव नेहरू के मुताबिक पशुओं को दिनभर स्वच्छ और ताजा पानी उपलब्ध कराया जाना चाहिए। पानी की कमी से पशुओं में डिहाइड्रेशन हो सकता है, जिसका सीधा असर दूध की मात्रा पर पड़ता है। इसके साथ ही पशुओं को हमेशा ताजा, साफ और सुरक्षित हरा चारा खिलाना चाहिए। हरे चारे के साथ संतुलित आहार देने से पशुओं को सभी आवश्यक पोषक तत्व आसानी से मिल जाते हैं।

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खनिज मिश्रण और नमक का सही इस्तेमाल

केवल हरा चारा देना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि आहार में सूक्ष्म पोषक तत्वों का होना भी उतना ही जरूरी है। पशुओं के शरीर में खनिज तत्वों की पूर्ति के लिए चारे में मिनरल मिक्सचर मिलाना आवश्यक है। इसके लिए पशु चिकित्सक की सलाह अनुसार उचित मात्रा में खनिज मिश्रण शामिल करना चाहिए। इसके अलावा, पशुओं के रहने के स्थान पर नमक का ढेला रखा जा सकता है, जिसे पशु अपनी आवश्यकता के अनुसार चाट लेते हैं। हालांकि यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि नमक का ढेला केवल चाटने के लिए है, यह पानी की कमी या डिहाइड्रेशन का विकल्प नहीं हो सकता। इसलिए पानी का निरंतर इंतजाम अनिवार्य है।

आवास की सफाई, मौसम प्रबंधन और विश्राम

दूध देने वाले पशुओं के लिए उनका परिवेश बहुत मायने रखता है। जिस जगह पशु बांधे जाते हैं, वह स्थान साफ-सुथरा, सूखा और हवादार होना चाहिए। मौसम में बदलाव या गर्मी के दिनों में पशुओं को विशेष देखभाल की दरकार होती है। पशुओं को सही समय पर चारा और पानी देने के अलावा पर्याप्त विश्राम मिलना भी उतना ही जरूरी है। यदि पशु तनावमुक्त रहेगा और उसे आरामदायक माहौल मिलेगा, तो उसका दूध उत्पादन बना रहेगा।

पेट के कीड़ों की दवा और टीकाकरण

कई बार पशु बाहर से पूरी तरह स्वस्थ नजर आता है, लेकिन उसके पेट में अंदरूनी कीड़े मौजूद हो सकते हैं। ये कीड़े पशु द्वारा खाए गए भोजन का पोषण खुद सोख लेते हैं, जिससे पशु कमजोर होने लगता है और उसका दूध उत्पादन घट जाता है। इससे बचाव के लिए समय-समय पर पशु चिकित्सक से परामर्श लेकर पेट के कीड़ों की दवा देनी चाहिए। दवा की खुराक पशु की उम्र, वजन और शारीरिक स्थिति के आधार पर निर्धारित की जानी चाहिए। साथ ही, निर्धारित समय-सारणी के अनुसार संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए पशुओं का टीकाकरण कराना भी बेहद जरूरी है।

दूध उत्पादन में अचानक गिरावट पर लें चिकित्सीय सलाह

यदि गाय या भैंस का दूध अचानक बहुत कम हो जाए या पशु अचानक दूध देना बंद कर दे, तो केवल घरेलू उपायों के भरोसे नहीं बैठना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत किसी योग्य पशु चिकित्सक से जांच करानी चाहिए ताकि बीमारी या समस्या के सटीक कारण का पता लगाकर सही समय पर उचित इलाज शुरू किया जा सके।

सवाल-जवाब

गाय और भैंस को चारे में मिनरल मिक्सचर देना क्यों जरूरी है?
मिनरल मिक्सचर चारे में मौजूद पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है। इससे पशुओं की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है और दूध उत्पादन में सुधार होता है।
पशुओं के पास नमक का ढेला रखने का क्या फायदा है?
नमक का ढेला रखने से पशु अपनी शारीरिक जरूरत के अनुसार इसे चाट सकते हैं। हालांकि, नमक डिहाइड्रेशन या पानी की कमी का इलाज नहीं है, इसलिए साफ पानी की व्यवस्था अलग से होनी चाहिए।
पेट के कीड़ों की दवा पशुओं को कब और कैसे देनी चाहिए?
पेट के कीड़ों की दवा पशु चिकित्सक की सलाह पर समय-समय पर देनी चाहिए। दवा की खुराक पशु की उम्र, वजन और स्वास्थ्य स्थिति देखकर तय की जाती है।
अगर पशु अचानक दूध देना कम कर दे तो क्या करना चाहिए?
यदि दूध में अचानक गिरावट आए, तो घरेलू नुस्खों पर निर्भर न रहकर तुरंत पशु चिकित्सक से जांच करानी चाहिए। सही समय पर सटीक निदान से बीमारी का इलाज संभव होता है।
पशुओं के रहने का स्थान कैसा होना चाहिए?
पशुओं के रहने की जगह साफ-सुथरी, सूखी और हवादार होनी चाहिए। मौसम में बदलाव और गर्मी के दौरान पशुओं को तनाव से बचाने के लिए विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 मिनट पहले

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुधन नीति के दृष्टिकोण से यह रिपोर्ट जमीनी स्तर पर वैज्ञानिक पशुपालन के महत्व को रेखांकित करती है। डेयरी क्षेत्र में उत्पादकता बनाए रखने के लिए केवल नीतियां बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि पशुपालकों तक सही पोषण, टीकाकरण और स्वास्थ्य प्रबंधन की तकनीकी जानकारी पहुंचाना आवश्यक है। स्थानीय निकायों और पशुपालन विभागों द्वारा चलाए जाने वाले विस्तार कार्यक्रमों में ऐसे व्यावहारिक सुझावों का समावेश ग्रामीण आय और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

Aisha Khan@aisha-khan·3 मिनट पहले

अर्जुन की बात को आगे बढ़ाते हुए, ऐसी वैज्ञानिक और व्यावहारिक जानकारी को जन-जन तक पहुँचाने में जनसंचार और दृश्य-श्रव्य (ऑडियो-विजुअल) माध्यमों की बड़ी भूमिका हो सकती है। जब पशु स्वास्थ्य और उचित खानपान जैसे विषयों को क्षेत्रीय टीवी शो, डॉक्यु-ड्रामा या लोक-मनोरंजन के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है, तो पशुपालक इसे और अधिक सहजता से अपनाते हैं। मीडिया और इन्फोटेनमेंट का यह संयोजन ग्रामीण जागरूकता और विकास की गति को कई गुना बढ़ा सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·23 मिनट पहले

पशु क्रूरता निवारण कानून और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक और चिकित्सकीय सलाह का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। कई बार उत्पादन बढ़ाने के नाम पर अनधिकृत रसायनों या अनुचित तरीकों के प्रयोग के मामले सामने आते हैं, जो कानूनन अपराध हैं और जन-स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बनते हैं। इस प्रकार की जागरूकता से पशुपालक कानूनी और सुरक्षित दायरे में रहकर सही देखभाल अपनाते हैं, जिससे डेयरी आपूर्ति श्रृंखला में खाद्य सुरक्षा और पशु कल्याण मानकों का पालन सुनिश्चित होता है।

Ravikash Gupta@ravikash·22 मिनट पहले

करण की बात को आर्थिक और बाज़ार के दृष्टिकोण से आगे बढ़ाएं तो डेयरी क्षेत्र भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्तंभ है। अनधिकृत तरीकों के बजाय पशुपालकों द्वारा वैज्ञानिक और चिकित्सकीय सलाह अपनाना आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती प्रदान करता है। दूध उत्पादन में अप्रत्याशित गिरावट छोटे किसानों की आय और नकदी प्रवाह पर सीधा असर डालती है। पोषण प्रबंधन, टीकाकरण और डिओर्मिंग जैसी निवारक पद्धतियां पशुधन हानि के वित्तीय जोखिम को कम करती हैं। इससे संगठित डेयरी उद्योग, कृषि प्रसंस्करण और ग्रामीण साख व्यवस्था को स्थिरता मिलती है, जिससे इस क्षेत्र में दीर्घकालिक बाज़ार विश्वसनीयता बनी रहती है।

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