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काशी के 400 साल पुराने स्वामीनाथ अखाड़े में माटी पर दांव आजमा रही हैं बेटियां, जानिए तुलसीदास से जुड़ा इतिहासखेल
7 अग॰ 2026, 4:43 pm (81 दिन पहले)· 1

काशी के 400 साल पुराने स्वामीनाथ अखाड़े में माटी पर दांव आजमा रही हैं बेटियां, जानिए तुलसीदास से जुड़ा इतिहास

वाराणसी के 400 साल पुराने स्वामीनाथ अखाड़े में साल 2017 से बेटियां पुरुषों के साथ कुश्ती का अभ्यास कर रही हैं और राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत रही हैं।

धर्म नगरी काशी की पहचान सिर्फ इसके प्रसिद्ध मंदिरों से ही नहीं, बल्कि यहां की सदियों पुरानी अखाड़ा संस्कृति से भी जुड़ी है। इन्हीं मिट्टी के अखाड़ों में कड़ा अभ्यास करके पहलवानों की कई पीढ़ियों ने राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और ओलंपिक स्तर पर भारत का परचम लहराया है। वाराणसी का 400 साल से भी अधिक पुराना स्वामीनाथ अखाड़ा इस गौरवशाली परंपरा का मुख्य केंद्र रहा है। अब यह ऐतिहासिक अखाड़ा सामाजिक सोच में बदलाव की एक नई मिसाल पेश कर रहा है, जहां बेटियां पुरुषों के साथ माटी में जोर आजमाइश कर देश का नाम रोशन कर रही हैं।

गोस्वामी तुलसीदास से जुड़ा है अखाड़े का 400 साल पुराना इतिहास

स्वामीनाथ अखाड़े का इतिहास बेहद समृद्ध और खास है। मान्यता के अनुसार, इस अखाड़े की स्थापना स्वयं गोस्वामी तुलसीदास ने 400 साल से अधिक समय पहले की थी। वह हर दिन खुद भी इस अखाड़े में शारीरिक अभ्यास और रियाज किया करते थे। काशी में रामपुर अखाड़ा और रामसिंह अखाड़ा जैसे कई प्रसिद्ध अखाड़े रहे हैं, जिनमें से रामसिंह अखाड़े को सबसे खूंखार और ताकतवर पहलवान तैयार करने वाले स्थान के रूप में जाना जाता था। यद्यपि समय के साथ वाराणसी के कई पारंपरिक अखाड़े विलुप्त हो गए, लेकिन स्वामीनाथ अखाड़े ने अपनी ऐतिहासिक पहचान और विरासत को आज भी पूरी तरह संजोकर रखा है।

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ओलंपिक से लेकर विश्व मंच तक चमके काशी के पहलवान

काशी के पारंपरिक अखाड़ों की माटी से निकलकर हजारों पहलवानों ने दुनिया भर में भारत का नाम ऊंचा किया है। कल्लू पहलवान, सर्वजीत पहलवान, लक्ष्मीकांत, रणसिंह और चिक्कन पहलवान जैसे ढेरों दिग्गज नाम इसी धरती की देन हैं। इन पहलवानों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों और ओलंपिक कुश्ती प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए शानदार सफलता हासिल की। इनकी बदौलत काशी को कुश्ती की दुनिया में एक विशिष्ट पहचान मिली, जो परंपरा आज भी निरंतर जारी है।

2017 में खुले महिलाओं के लिए दरवाजे, बेटियों ने जीतीं पदक

वाराणसी के अखाड़ों के इतिहास में साल 2017 में एक नया अध्याय जुड़ा, जब स्वामीनाथ अखाड़े ने बेटियों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए। यह महिलाओं को अखाड़े की माटी में अभ्यास की अनुमति देने वाला काशी का पहला अखाड़ा बना। इसके बाद से यहां की बेटियों ने पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर दांव-पेच सीखे हैं। इस अखाड़े में पसीना बहाकर खुशी यादव, आस्था, कशिश और पलक जैसी कई महिला पहलवानों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।

तानों की परवाह किए बिना जारी रखा अभ्यास, विदेशी भी आते हैं देखने

परंपरागत अखाड़े में दांव-पेच सीखना महिला पहलवानों के लिए आसान नहीं था। महिला पहलवान कशिश यादव ने बताया कि जब उन्होंने अखाड़े में अभ्यास शुरू किया था, तो उन्हें समाज के तीखे तानों का सामना करना पड़ा था। हालांकि, उन्होंने लोगों की बातों को नजरअंदाज करते हुए माटी पर कड़ी मेहनत जारी रखी। आज इस 400 साल पुराने अखाड़े की साख इतनी फैल चुकी है कि यहां आने वाले विदेशी मेहमान भी पहलवानों की जोर आजमाइश देखने और खुद अपनी ताकत परखने के लिए अखाड़े में उतरते नजर आते हैं।

सवाल-जवाब

स्वामीनाथ अखाड़ा कितना पुराना है और इसकी स्थापना किसने की थी?
स्वामीनाथ अखाड़ा 400 साल से अधिक पुराना है और इसकी स्थापना गोस्वामी तुलसीदास ने की थी, जो स्वयं भी यहां रोज अभ्यास करते थे।
स्वामीनाथ अखाड़े में महिलाओं के लिए अभ्यास की शुरुआत कब हुई?
स्वामीनाथ अखाड़े ने साल 2017 में महिलाओं के लिए अपने दरवाजे खोले, जिसके बाद लड़कियां यहां पुरुषों के साथ अभ्यास करने लगीं।
स्वामीनाथ अखाड़े से जुड़ी प्रमुख महिला पहलवान कौन-कौन हैं?
इस अखाड़े से अभ्यास करके खुशी यादव, आस्था, कशिश और पलक जैसी कई महिला पहलवानों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते हैं।
काशी के अखाड़ों से निकले कुछ प्रसिद्ध पहलवानों के नाम क्या हैं?
काशी के अखाड़ों से कल्लू पहलवान, सर्वजीत पहलवान, लक्ष्मीकांत, रणसिंह और चिक्कन पहलवान जैसे प्रसिद्ध खिलाड़ी निकले हैं जिन्होंने ओलंपिक तक भारत का नाम रोशन किया।
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