जापान के नागोया में एशियाई खेलों का औपचारिक आगाज होने के बाद अब खिलाड़ियों का पूरा ध्यान मैदान पर पदकों की जंग जीतने पर टिक गया है। खेल गांव में रहने और परिवहन से जुड़ी शुरुआती दिक्कतों को पीछे छोड़ते हुए भारतीय दल ने अपनी पूरी ऊर्जा पदकों की दौड़ में झोंक दी है। इस महाकुंभ में भारत के सामने सबसे बड़ी कसौटी यह है कि क्या वह 2023 के हांगझोउ एशियाई खेलों में जीते गए ऐतिहासिक 107 पदकों के रिकॉर्ड को दोहरा पाएगा या उससे आगे निकलेगा। इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन की अध्यक्ष पीटी उषा ने यह भरोसा जताया है कि भारतीय एथलीट पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने की क्षमता रखते हैं।
ग्लासगो में हुए आयोजनों में पहले 28 से 30 पदकों की संभावना जताई गई थी, जहां भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार खेल दिखाते हुए उम्मीद से 10 पदक अधिक अपने नाम किए थे। उसी सिलसिले को देखते हुए नागोया में भी यह आकलन लगाया गया है कि भारत पदकों का शतक आसानी से छू सकता है। हालांकि, अंतिम पदक तालिका में देश का स्थान सिर्फ कुल संख्या से नहीं, बल्कि जीते गए स्वर्ण पदकों की तादाद से तय होगा। शीर्ष देशों के बीच रैंकिंग की असली लड़ाई इसी बात पर निर्भर करेगी कि कितने मौकों पर तिरंगा सबसे ऊपर लहराता है।
स्टार खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी और शूटिंग दल की चुनौतियां
नागोया में भारत का सफर कई मुश्किल चुनौतियों से भरा हुआ है। भाला फेंक स्पर्धा के डिफेंडिंग चैंपियन नीरज चोपड़ा और अन्नू रानी इस बार दल का हिस्सा नहीं हैं, जिससे दो बेहद मजबूत स्वर्ण पदक के अवसरों की कमी पहले से महसूस हो रही है। इसके अलावा 2023 की तुलना में भारतीय निशानेबाजी का दल भी इस बार आकार में छोटा है। इन बड़े नामों की अनुपस्थिति के चलते गोल्ड मेडल हासिल करना आसान नहीं होगा। इसके बावजूद भारतीय दल के पास विभिन्न विधाओं में ऐसे खिलाड़ी मौजूद हैं जो देश को पदक तालिका के शीर्ष चार में पहुंचाने का दम रखते हैं।
प्रतियोगिता के शुरुआती सात दिनों में भारत की झोली में पदक डालने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी निशानेबाजों के कंधों पर होगी। रेंज पर लगभग हर रोज भारतीय शूटर मुकाबले में उतरेंगे और कई मौकों पर एक ही दिन में एक से ज्यादा पदक आने की संभावना है। आकलन के अनुसार, निशानेबाजी में भारतीय टीम 18 से 20 पदक हासिल कर सकती है, जिसमें 7 से 8 गोल्ड शामिल होने का अनुमान है। अगर परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल रहीं तो पदकों की यह संख्या 22 से 24 तक भी पहुंच सकती है। इस स्पर्धा में कुछ अनिश्चितताएं भी जुड़ी हैं। दल के छोटे आकार के अलावा पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा का प्रदर्शन काफी कुछ व्यक्तिगत फॉर्म पर टिका होगा। केदार अगर अपनी लय में रहे तो विश्व रिकॉर्ड स्तर का प्रदर्शन करने की काबिलियत रखते हैं, लेकिन उनका सामान्य खेल भारत की पदक उम्मीदों को प्रभावित भी कर सकता है।
एथलेटिक्स और प्रमुख ट्रैक एवं फील्ड सितारे
ट्रैक एवं फील्ड स्पर्धाएं भारत के पदक अभियान का दूसरा सबसे मजबूत स्तंभ साबित हो सकती हैं। एथलेटिक्स स्पर्धाओं से भारत की झोली में 26 से 30 पदक आने की पूरी उम्मीद है, जो देश को कुल 100 पदकों के जादुई आंकड़े के बेहद करीब ले जाने का काम करेगा। नीरज चोपड़ा की गैरमौजूदगी बड़ा झटका जरूर है, लेकिन भारतीय एथलेटिक्स दल की गहराई अभी भी काफी मजबूत दिखाई दे रही है।
लंबी कूद में मुरली श्रीशंकर और डेकाथलन में तेजस्विन शंकर से देश को बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीद है। वहीं मध्यम और लंबी दूरी की दौड़ में गुलवीर सिंह और पारुल चौधरी पदक के मजबूत दावेदारों में शामिल हैं। गोला फेंक स्पर्धा में तेजिंदरपाल सिंह तूर अपनी ताकत दिखाने के लिए तैयार हैं। एथलेटिक्स दल का यह मजबूत संतुलन उम्मीद जगाता है कि अगर कुछ अप्रत्याशित पदक भी भारतीय खेमे में आए, तो कुल पदकों की संख्या 100 के पार आसानी से निकल सकती है।
टीम खेलों में स्वर्णिम लक्ष्य: क्रिकेट और हॉकी
क्रिकेट की बात करें तो भारतीय दल का मकसद पूरी तरह स्पष्ट है, जहां पुरुष और महिला दोनों वर्गों से सिर्फ गोल्ड मेडल की अपेक्षा की जा रही है। इन दोनों वर्गों में रजत या कांस्य पदक से संतोष करने का कोई विचार नहीं है। दोनों टीमें अपने विरोधियों पर भारी नजर आ रही हैं और उनसे स्वर्ण पदक की ही उम्मीद लगाई जा रही है।
हॉकी के मैदान पर भी पुरुष और महिला दोनों टीमों से सुनहरे प्रदर्शन की दरकार है। भारतीय पुरुष हॉकी टीम को स्वर्ण पदक का बेहद प्रबल दावेदार माना जा रहा है। दूसरी ओर, महिला टीम ने हाल के मुकाबलों में चीन जैसी मजबूत टीम को मात देकर अपनी ताकत का लोहा मनवाया है। हॉकी में स्वर्ण पदक जीतना इसलिए भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका सीधा असर LA28 की तैयारियों और ओलंपिक की राह पर पड़ेगा।
रैकेट खेल, कुश्ती और मुक्केबाजी की भूमिका
स्क्वैश के कोर्ट पर भारत के पास पदक हासिल करने के वास्तविक और ठोस अवसर हैं, जहां 3 पदक जीतना एक व्यावहारिक लक्ष्य माना गया है। बैडमिंटन में भी भारत पदक की दौड़ में मजबूती से शामिल रहेगा, जिससे 2 से 3 पदक मिलने की आशा है। अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की पुरुष युगल जोड़ी से देश को गोल्ड मेडल की पूरी आस होगी।
कुश्ती और मुक्केबाजी ऐसे दो खेल हैं जो भारत के 100 पदकों के अभियान की दिशा पूरी तरह बदल सकते हैं। इन दोनों स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों की फौज बेहद सक्षम है। यदि मैट और रिंग में पहलवानों और मुक्केबाजों ने अपने स्तर के अनुरूप खेल दिखाया और कुछ अप्रत्याशित पदक जीतने में सफल रहे, तो भारत पदक तालिका में शीर्ष स्थानों की ओर तेजी से कदम बढ़ाएगा।
तीरंदाजी, नौकायन, कबड्डी और टेबल टेनिस का परिदृश्य
कबड्डी के मैट पर भारतीय टीम केवल शीर्ष पायदान यानी गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाने के इरादे से उतरेगी। रोइंग में भी भारतीय नाविकों से बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीद है, जहां खिलाड़ी देश के खाते में कुछ और पदक जोड़ने का माद्दा रखते हैं। तीरंदाजी में भारतीय दल का प्रदर्शन प्रभावशाली रहने की पूरी संभावना है, जिसमें विशेषकर कंपाउंड तीरंदाजों की टीमों से पदकों की बड़ी उम्मीदें जुड़ी हैं। दूसरी तरफ, टेबल टेनिस के पटल पर इस बार मुकाबला बेहद कड़ा दिखाई दे रहा है और वहां पदक जीतना भारतीय खिलाड़ियों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
नागोया में पदकों का शतक पूरा करना भारतीय दल के लिए पूरी तरह संभव नजर आ रहा है। यह सफर 100 के पार जाता है या उससे पहले थमता है, इसका फैसला बेहद बारीक अंतरों से तय होगा। कुछ अनपेक्षित जीत भारत को 100 के आंकड़े से बहुत आगे धकेल सकती हैं, जबकि कुछ करीबी मौकों पर हार पूरे समीकरण को प्रभावित कर सकती है। अंततः सबसे बड़ा कारक स्वर्ण पदकों की संख्या होगी, जो यह तय करेगी कि नागोया में भारत का समग्र अभियान कितना ऐतिहासिक साबित होता है।



















