कतर की राजधानी दोहा में चल रही आईएसएसएफ विश्व चैम्पियनशिप में भारतीय खेल खेमे को एक बड़ा झटका झेलना पड़ा है। भारत की महिला राइफल निशानेबाज शांभवी क्षीरसागर को उपकरण नियमों की अनदेखी के चलते 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम स्पर्धा से अयोग्य घोषित कर दिया गया। इस मुकाबले में हिस्सा ले रहे कुल 63 देशों के 126 निशानेबाजों में से केवल पार्थ माने और शांभवी की भारतीय जोड़ी ही इस कड़े नियम की चपेट में आई और उन्हें तुरंत बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
पांच महीने के भीतर दूसरी बार हुई कार्रवाई
यह घटनाक्रम इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि बीते पांच महीनों के दौरान शांभवी के साथ ऐसी तकनीकी गड़बड़ी दूसरी बार सामने आई है। इससे पहले जून के महीने में जर्मनी के अंदर आयोजित जूनियर विश्व चैम्पियनशिप में भी उनकी किट जांच के मानकों पर खरी नहीं उतरी थी और वहां भी उन्हें इसी प्रकार अयोग्य ठहराया गया था। दोहा में हो रहा यह टूर्नामेंट 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के क्वालिफिकेशन दौर का आगाज भी करता है। हालांकि इस मिक्स्ड टीम स्पर्धा के तहत कोई ओलंपिक कोटा तय नहीं था, क्योंकि सभी कोटे केवल व्यक्तिगत स्पर्धाओं के लिए ही रखे गए हैं।
आईएसएसएफ के कड़े परिधान नियम और तकनीकी मानक
निशानेबाजी की शीर्ष संस्था आईएसएसएफ के तकनीकी नियम 6.7.9.1.ए के तहत यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। यह विशेष नियम राइफल निशानेबाजों द्वारा उपयोग किए जाने वाले कपड़ों की कठोरता और मोटाई से सीधे तौर पर जुड़ा है। प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ी एक खास तरह का सख्त जैकेट और ट्राउजर पहनते हैं, जिसे तकनीकी भाषा में शूटिंग सूट कहा जाता है। इस सूट का मुख्य काम निशानेबाज के शरीर को सीधा और स्थिर रखना, मांसपेशियों के अनावश्यक तनाव या कंपन को रोकना और लंबे समय तक भारी राइफल को साधने में संतुलन प्रदान करना होता है। यदि यह सूट निर्धारित सीमा से अधिक कड़ा पाया जाता है, तो नियम उल्लंघन पर खिलाड़ी को प्रतियोगिता से तुरंत बाहर करने का प्रावधान है। आयोजकों ने आधिकारिक स्कोर शीट पर स्पष्ट दर्ज किया कि एथलीट संख्या 1598 शांभवी क्षीरसागर को नियम 6.7.9.1.ए के उल्लंघन के कारण अयोग्य किया गया है।
कैंप में मिला था भरोसा पर दोहा में फेल हुई किट
इस पूरे मामले पर शांभवी की मां ने विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय कैंप के समय भी इस पोशाक को लेकर संदेह पैदा हुआ था, लेकिन कोच ने पूरी तसल्ली दी थी कि किट जांच पास कर लेगी। उनके अनुसार, शांभवी ने लगभग एक महीने पहले यह नई पोशाक खरीदी थी जिसमें शुरुआत से ही कुछ तकनीकी दिक्कत थी। उस समय इसे तराशा और काटा गया था ताकि यह शरीर पर सही बैठ सके। दोहा पहुंचने के बाद भी सूट की दो बार पहले जांच कराई गई थी। मुकाबले से ठीक पहले जब यह महसूस हुआ कि पोशाक नियमों के दायरे में पूरी तरह फिट नहीं है, तो वहां मौजूद कोच दीपाली देशपांडे ने इसे नियमों के अनुकूल बनाने के लिए दोबारा काटा था।
औचक निरीक्षण में खुली पोल
अंतिम पलों में किए गए इन बदलावों के बावजूद जब आयोजकों ने औचक निरीक्षण किया, तो शांभवी का सूट तय मानकों से बाहर पाया गया और उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। शांभवी की मां ने बताया कि जर्मनी में भी ठीक ऐसी ही स्थिति बनी थी। राष्ट्रीय शिविर के दौरान राइफल कोच मनोज कुमार ने आश्वस्त किया था कि चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है और उपकरण जांच में कोई अड़चन नहीं आएगी। हालांकि दोहा में मैच के दिन यह भरोसा काम नहीं आया और तकनीकी परीक्षण में किट एक बार फिर फेल साबित हुई।



















